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पत्नी ने आधी रात को चाकू से काटी पति की जीभ, गाजियाबाद में रिश्तों को शर्मसार करने वाली खौफनाक वारदात

पत्नी ने आधी रात को चाकू से काटी पति की जीभ, गाजियाबाद में रिश्तों को शर्मसार करने वाली खौफनाक वारदात

गाजियाबाद की एक शांत समझी जाने वाली कॉलोनी में आधी रात ऐसा मंजर सामने आया, जिसने इंसानियत और रिश्तों — दोनों को कटघरे में खड़ा कर दिया। जिस रिश्ते को विश्वास, सहारे और सम्मान की डोर से बंधा माना जाता है, उसी रिश्ते ने यहां खून और चीखों की शक्ल ले ली।

🌙 आधी रात का खौफ

घटना देर रात की है। घर के भीतर पति-पत्नी के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी चल रही थी। शुरू में यह रोज़मर्रा का झगड़ा लगा — वही तकरार, वही ऊँची आवाज़ें। लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि यह बहस कुछ ही मिनटों में हिंसा की हदें पार कर जाएगी।

आरोप है कि गुस्से में बेकाबू पत्नी ने रसोई से चाकू उठाया और सो रहे पति पर हमला कर दिया। वार इतना बेरहम था कि पति की जीभ कट गई। खून से लथपथ हालत में वह चीखता रहा, मदद की गुहार लगाता रहा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

🩸 दर्द, चीख और सन्नाटा

घटना के बाद घर में सन्नाटा पसर गया। पड़ोसियों ने जब चीख-पुकार सुनी, तब जाकर पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी गई। घायल पति को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है।

डॉक्टरों के मुताबिक, जीभ पर गंभीर चोट आई है और उसे लंबे इलाज की जरूरत पड़ेगी। बोलने और खाने में स्थायी दिक्कत होने की आशंका भी जताई जा रही है।

🚔 पुलिस की कार्रवाई

पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। आरोपी पत्नी को हिरासत में ले लिया गया है और उससे पूछताछ जारी है। शुरुआती जांच में घरेलू विवाद, शक और लंबे समय से चल रहे तनाव की बात सामने आ रही है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामला बेहद संवेदनशील है और सभी पहलुओं से जांच की जा रही है। मेडिकल रिपोर्ट और बयान के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई होगी।

🧠 रिश्तों में बढ़ता ज़हर

यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि समाज के भीतर पनप रहे उस ज़हर की कहानी है, जहां संवाद खत्म हो चुका है और गुस्सा हथियार बन चुका है। पति-पत्नी का रिश्ता, जो कभी एक-दूसरे की ढाल हुआ करता था, आज एक-दूसरे के लिए खतरा बनता जा रहा है।

बीते कुछ सालों में घरेलू हिंसा के मामलों में इज़ाफा देखा गया है। फर्क बस इतना है कि अब हिंसा की दिशा बदल रही है — और वह और भी डरावनी होती जा रही है।

🧩 सवाल जो समाज से पूछते हैं

क्या हम रिश्तों में बात करना भूल चुके हैं?

क्या गुस्से पर काबू रखना अब कमजोरी समझी जाने लगी है?

क्या कानून और काउंसलिंग इतनी दूर हैं कि लोग चाकू उठा लें?

ये सवाल किसी एक घर के नहीं हैं, ये पूरे समाज के आईने हैं।

🕯️ अंत में

गाजियाबाद की यह घटना हमें झकझोरती है। यह याद दिलाती है कि अगर समय रहते रिश्तों की दरारों को नहीं भरा गया, तो वही दरारें खून बहाने लगती हैं। कानून अपना काम करेगा, लेकिन समाज को भी आत्ममंथन करना होगा।

क्योंकि जब घर ही सुरक्षित नहीं रहा, तो बाहर की दुनिया किस काम की?


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