पटना में 500 रुपये के लिए दोस्त का कत्ल: चाकू से मर्डर कर शव घर पहुंचाकर फरार हुए आरोपी
- byAman Prajapat
- 17 January, 2026
कभी चाय साथ पी, कभी हंसी बांटी… और आज वही दोस्त खून में सना पड़ा।
पटना की यह घटना कोई फिल्मी सीन नहीं, बल्कि हकीकत की सबसे बदसूरत तस्वीर है। 500 रुपये — हां, सिर्फ 500 — इतने में एक इंसान की सांसें खरीद ली गईं।
यह कहानी सिर्फ हत्या की नहीं है, यह कहानी है गिरते इंसानियत के ग्राफ की।
🏙️ घटना की पृष्ठभूमि
पटना शहर, जहां एक तरफ विकास की बातें होती हैं, वहीं दूसरी तरफ ऐसी वारदातें चुपचाप भरोसे का गला रेत देती हैं।
पीड़ित और आरोपी — दोनों आपस में दोस्त थे। लंबे समय से पहचान, उठना-बैठना, और पैसों का लेन-देन।
कहानी यहीं से बिगड़ती है।
💸 500 रुपये बना मौत का कारण
बताया जा रहा है कि 500 रुपये के लेन-देन को लेकर दोनों के बीच कहासुनी हुई।
शब्द पहले ज़हरीले हुए, फिर हाथ चले, और फिर चाकू निकला।
गुस्से के एक पल ने रिश्ते के सालों को खत्म कर दिया।
🔪 चाकू से हमला: दोस्ती का खून
आरोपियों ने आपा खो दिया।
चाकू निकाला गया और वार पर वार किए गए।
पीड़ित वहीं ढेर हो गया — न कोई मौका, न कोई माफी।
खून सड़क पर नहीं, भरोसे पर बहा।
🏠 शव घर पहुंचाकर फरार — हैवानियत की हद
सबसे चौंकाने वाली बात यही है।
हत्या के बाद आरोपी शव को उठाकर पीड़ित के घर तक पहुंचाते हैं और फिर मौके से फरार हो जाते हैं।
सोचिए —
जिस दरवाज़े पर कभी दोस्त बनकर आते थे, आज उसी दरवाज़े पर लाश छोड़ गए।
यह सिर्फ अपराध नहीं, यह मानसिकता का पतन है।
😢 परिवार का टूटता संसार
घर में मातम है।
परिवार सदमे में है, सवालों से घिरा हुआ —
“अगर 500 रुपये नहीं दिए होते तो क्या आज बेटा ज़िंदा होता?”
मां की आंखें सूखी नहीं हैं, आवाज़ कांप रही है, और भरोसा टूट चुका है।
🚓 पुलिस की कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची।
मामला दर्ज कर लिया गया है और आरोपियों की तलाश जारी है।
इलाके में दबिश दी जा रही है, मोबाइल लोकेशन खंगाली जा रही है।
कानून अपनी चाल से चलता है — तेज नहीं, मगर तय।
⚖️ कानून क्या कहता है?
भारतीय दंड संहिता के तहत यह मामला हत्या (302 IPC) का बनता है।
अगर आरोप साबित होते हैं तो आरोपियों को उम्रकैद या फांसी तक की सजा हो सकती है।
500 रुपये के लिए ज़िंदगी गंवाने और लेने वालों के लिए कानून कोई नरमी नहीं रखता।

🧠 समाज के लिए चेतावनी
यह घटना सिर्फ पटना की नहीं है।
यह पूरे समाज के मुंह पर तमाचा है।
आज गुस्सा, नशा, और पैसा — तीनों मिलकर इंसान को हैवान बना रहे हैं।
दोस्ती, रिश्ते, भरोसा — सब सस्ते पड़ते जा रहे हैं।
📢 सच कड़वा है, पर जरूरी
आज अगर हम इसे “एक और खबर” समझकर स्क्रॉल कर गए,
तो कल यह कहानी किसी और घर के दरवाज़े पर लाश बनकर दस्तक देगी।
पैसा जरूरी है,
लेकिन इंसानियत उससे कहीं ज्यादा।
🕯️ निष्कर्ष:
500 रुपये लौटाए जा सकते थे।
माफी मांगी जा सकती थी।
लड़ाई टल सकती थी।
लेकिन चाकू चल गया।
और अब एक घर हमेशा के लिए सूना हो गया।
दोस्ती का खून सिर्फ एक इंसान का नहीं, पूरे समाज का होता है।
Note: Content and images are for informational use only. For any concerns, contact us at info@rajasthaninews.com.
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