मौत से पहले छटपटाई थी नीट छात्रा, शरीर पर कई निशान; पटना पुलिस की भूमिका पर गहराते सवाल
- byAman Prajapat
- 16 January, 2026
पटना की फिज़ा आजकल भारी है। हवा में सन्नाटा है, और उस सन्नाटे को चीरती है एक सवाल—क्या नीट की तैयारी कर रही उस छात्रा को मरने के लिए छोड़ दिया गया?
ये कोई आम मौत नहीं है। ये एक ऐसी कहानी है जिसमें किताबों के पन्ने खून से भीगे हुए लगते हैं, और सपनों की लाश एक बंद कमरे में मिली।
📌 क्या है पूरा मामला?
पटना में रहकर नीट (NEET) की तैयारी कर रही एक होनहार छात्रा की रहस्यमयी परिस्थितियों में मौत हो गई। शुरुआत में इसे आत्महत्या बताने की कोशिश हुई, लेकिन जैसे-जैसे परतें खुलीं, कहानी ने खतरनाक मोड़ ले लिया।
छात्रा का शव जब बरामद हुआ, तो उसके शरीर पर कई चोटों के निशान पाए गए। हाथों पर खरोंचें, पैरों पर नीले निशान और गर्दन के आसपास ऐसे चिह्न, जो सिर्फ एक सवाल पूछते हैं—
क्या वह मरने से पहले ज़िंदा रहने की लड़ाई लड़ रही थी?
🩸 शरीर पर मिले निशान क्या कहते हैं?
परिजनों का दावा है कि छात्रा के शरीर पर जो निशान मिले हैं, वो सामान्य नहीं हैं।
हाथों पर संघर्ष के निशान
नाखूनों के अंदर त्वचा के अंश
शरीर के कई हिस्सों पर चोट
ये सब चीख-चीखकर कहते हैं कि मौत से पहले वह छटपटाई थी, तड़पी थी, और शायद मदद के लिए पुकारा भी होगा।
🚨 पटना पुलिस पर क्यों उठ रहे सवाल?
अब बात कड़वी है, लेकिन सच है—पटना पुलिस की भूमिका पर सवाल उठना लाज़मी है।
परिजनों का आरोप है कि:
पुलिस ने शुरुआती जांच में लापरवाही बरती
बिना फॉरेंसिक जांच के आत्महत्या का एंगल आगे बढ़ाया गया
सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल्स को गंभीरता से नहीं देखा गया
आज के दौर में, जब एक मोबाइल पूरा सच उगल सकता है, वहां जांच का इतना हल्का होना शक पैदा करता है।
👨👩👧 परिजनों का दर्द और आक्रोश
छात्रा के माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है। मां की आवाज़ कांपती है, लेकिन शब्दों में आग है—
“मेरी बेटी कमजोर नहीं थी। वह डॉक्टर बनना चाहती थी, मरना नहीं।”
परिजन साफ कहते हैं कि ये आत्महत्या नहीं, बल्कि साजिश हो सकती है। वे सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं।
🏫 कोचिंग संस्कृति पर भी सवाल
नीट की तैयारी आज सिर्फ पढ़ाई नहीं रही, ये एक मानसिक युद्ध बन चुका है।
लगातार दबाव
रैंक की होड़
अकेलापन
हॉस्टल लाइफ की खामोशी
हर साल सैकड़ों छात्र इस दबाव में टूट जाते हैं। सवाल ये है—कब तक?
🧠 मानसिक स्वास्थ्य: अनदेखा सच
हम परंपरा की बात करते हैं, गुरुकुल की बात करते हैं—जहां गुरु शिष्य को सिर्फ पढ़ाता नहीं था, समझता भी था।
आज के कोचिंग सेंटरों में बस सिलेबस है, इंसान नहीं।
अगर इस छात्रा को वक्त पर सुना गया होता, समझा गया होता—तो शायद ये खबर आज न होती।

📣 जनता की मांग: सच सामने आना चाहिए
सोशल मीडिया पर लोग गुस्से में हैं।
#JusticeForNEETStudent ट्रेंड कर रहा है।
लोग पूछ रहे हैं—
क्या दोषियों को बचाया जा रहा है?
क्या ये मामला दबा दिया जाएगा?
जनता अब सिर्फ बयान नहीं, न्याय चाहती है।
⚖️ आगे क्या?
अब निगाहें उच्च अधिकारियों पर हैं।
क्या जांच दोबारा होगी?
क्या पुलिस अपनी चुप्पी तोड़ेगी?
क्या उस छात्रा को इंसाफ मिलेगा?
क्योंकि अगर आज ये मामला दब गया, तो कल कोई और सपना इसी तरह दफनाया जाएगा।
✍️ आख़िरी बात
ये खबर सिर्फ एक छात्रा की मौत नहीं है।
ये सिस्टम के मुंह पर तमाचा है।
ये हमें आईना दिखाती है—कि हम बच्चों से सपने मांगते हैं, लेकिन सुरक्षा नहीं देते।
सच चाहे जितना कड़वा हो, सामने आना चाहिए।
क्योंकि चुप्पी भी कभी-कभी अपराध होती है।
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राजस्थान में अपराधों...
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