राजनीति से ऊपर प्रदूषण की जंग: दिल्ली को बेहतर बनाने की साझा चुनौती है वायु संकट — मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता
- byAman Prajapat
- 17 January, 2026
दिल्ली—एक ऐसा शहर जो इतिहास की धड़कन भी है और भविष्य की उम्मीद भी। लेकिन इन्हीं सड़कों, इमारतों और सपनों के बीच एक ज़हर धीरे-धीरे सांसों में घुल रहा है—प्रदूषण। इसी गंभीर मुद्दे पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक ऐसा बयान दिया है, जो सियासत की सीमाओं से बाहर निकलकर सीधे जनता के दिल और फेफड़ों तक जाता है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने साफ शब्दों में कहा कि “प्रदूषण कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह दिल्ली को बेहतर बनाने की एक बड़ी और साझा चुनौती है।”
यह बयान सिर्फ एक प्रेस लाइन नहीं है, बल्कि उस सोच की झलक है जो कहती है—पहले इंसान, बाद में राजनीति।
🌫️ प्रदूषण: एक अदृश्य दुश्मन
दिल्ली में प्रदूषण कोई नई कहानी नहीं। हर साल सर्दियों के आते ही AQI आसमान छूने लगता है। स्कूल बंद, बुज़ुर्ग घरों में कैद, बच्चे मास्क में और अस्पतालों में सांस के मरीजों की लाइन। यह सब अब “न्यू नॉर्मल” बनता जा रहा है—और यही सबसे खतरनाक बात है।
रेखा गुप्ता ने इसी आदत बन चुके संकट पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अगर हर समस्या को राजनीतिक चश्मे से देखा जाएगा, तो समाधान कभी ज़मीन पर नहीं उतरेगा।
🏛️ राजनीति बनाम ज़िम्मेदारी
मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब प्रदूषण पर अक्सर आरोप-प्रत्यारोप का खेल चलता रहता है—कभी केंद्र बनाम राज्य, कभी पड़ोसी राज्य, कभी पिछली सरकारें।
लेकिन रेखा गुप्ता का स्टैंड साफ है—दोषारोपण से पहले समाधान।
उन्होंने कहा कि प्रदूषण से निपटने के लिए सभी एजेंसियों, सरकारों और नागरिकों को मिलकर काम करना होगा। यह लड़ाई किसी एक पार्टी की नहीं, बल्कि हर उस इंसान की है जो दिल्ली की हवा में सांस लेता है।
🌱 सरकार की रणनीति और दिशा
मुख्यमंत्री ने संकेत दिए कि सरकार दीर्घकालिक योजनाओं पर काम कर रही है, जिनमें शामिल हैं:
सार्वजनिक परिवहन को और मज़बूत करना
इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा
निर्माण कार्यों पर सख्त निगरानी
हरित क्षेत्र (Green Cover) बढ़ाना
पराली जलाने पर पड़ोसी राज्यों से समन्वय
उनका मानना है कि तात्कालिक उपायों से ज्यादा ज़रूरी है स्थायी समाधान।
👥 जनता की भूमिका: सिर्फ सरकार नहीं, हम भी ज़िम्मेदार
रेखा गुप्ता ने यह भी साफ किया कि प्रदूषण सिर्फ सरकार की समस्या नहीं है। जब तक आम नागरिक अपनी आदतें नहीं बदलेगा—जैसे निजी गाड़ियों का अत्यधिक उपयोग, कचरा जलाना, नियमों की अनदेखी—तब तक कोई भी नीति पूरी तरह सफल नहीं हो सकती।
यह बयान पुराने ज़माने की उस सोच की याद दिलाता है जहाँ शहर सिर्फ सरकार से नहीं, बल्कि समाज से बनते थे।

🔍 विशेषज्ञों की राय
पर्यावरण विशेषज्ञों का भी मानना है कि प्रदूषण को राजनीतिक हथियार बनाना सबसे बड़ी गलती है। यह एक वैज्ञानिक और सामाजिक समस्या है, जिसका हल डेटा, नीति और सहयोग से ही निकलेगा।
📌 दिल्ली का भविष्य और उम्मीद
दिल्ली आज एक चौराहे पर खड़ी है—एक रास्ता वही पुराना है, जहां हर साल वही बहसें, वही बयान और वही धुंध।
दूसरा रास्ता कठिन है, लेकिन साफ है—जहां राजनीति पीछे और जनता आगे हो।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का बयान उसी दूसरे रास्ते की तरफ इशारा करता है।
✍️ निष्कर्ष
प्रदूषण न तो किसी पार्टी का एजेंडा होना चाहिए, न ही चुनावी हथियार। यह एक चेतावनी है—हमारी सांसों के लिए, हमारे बच्चों के भविष्य के लिए।
अगर सच में दिल्ली को बेहतर बनाना है, तो राजनीति को साइड में रखकर काम करना ही होगा।
और शायद, यही बात रेखा गुप्ता कहना चाह रही थीं—बिना घुमा-फिरा कर।
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