इंदौर जल संकट: दूषित पानी से बिगड़ी सेहत, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय बोले—इलाज में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी
- byAman Prajapat
- 01 January, 2026
इंदौर—मालवा की शान, स्वच्छता की मिसाल—इन दिनों एक कड़वी सच्चाई से दो-चार है। नल से बहता पानी, जो ज़िंदगी देता है, वही जब ज़हर बन जाए तो शहर थम सा जाता है। इंदौर में सामने आए जल संदूषण के मामले ने आम जनजीवन को हिला दिया है। गली-मोहल्लों से लेकर कॉलोनियों तक, लोग पेट दर्द, उल्टी, दस्त और बुखार की शिकायत लेकर अस्पतालों की ओर दौड़ते दिखे। हालात गंभीर हैं, पर सरकार का दावा है—कंट्रोल में हैं।
इसी बीच प्रदेश के वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मोर्चा संभालते हुए साफ शब्दों में कहा कि मरीजों के इलाज में कोई ढिलाई नहीं बरती जा रही। अस्पतालों में अतिरिक्त बेड, दवाइयों का स्टॉक, डॉक्टरों की टीमें और एंबुलेंस सेवाएं—सब कुछ फुल गियर में है। उनका कहना है कि यह वक्त राजनीति का नहीं, सेवा का है। बात सीधी है—लोगों की सेहत पहले।
शहर के सरकारी अस्पतालों में ओपीडी का वक्त बढ़ाया गया है। इमरजेंसी वार्ड को और मजबूत किया गया है ताकि किसी भी मरीज को इंतज़ार न करना पड़े। स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार फील्ड में हैं—पानी के सैंपल लिए जा रहे हैं, टंकियों की जांच हो रही है, और जहां गड़बड़ी दिखी, वहां सप्लाई रोकी गई है। पुराने ज़माने की सीख याद दिलाती है—पहले स्रोत ठीक करो, फिर भरोसा लौटेगा।
मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि जिन इलाकों में सबसे ज्यादा शिकायतें आई हैं, वहां मेडिकल कैंप लगाए गए हैं। स्थानीय स्तर पर ही इलाज मिले—यही सोच है। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों पर खास नजर रखी जा रही है। दवाइयां फ्री में दी जा रही हैं, और ज़रूरत पड़ने पर रेफरल सिस्टम भी एक्टिव है। यानी अगर मामला बिगड़े, तो रास्ता साफ है।
नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की जॉइंट टीम 24x7 काम कर रही है। पाइपलाइनों में लीकेज, सीवेज की मिलावट, और ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता—हर कड़ी की जांच हो रही है। मंत्री ने माना कि व्यवस्था इंसानों की होती है, गलती हो सकती है, लेकिन गलती सुधारना भी जिम्मेदारी है। यही बात लोगों को सुननी थी—ईमानदारी और एक्शन।
सोशल मीडिया पर अफवाहें भी तैर रही हैं—कभी आंकड़े बढ़ा-चढ़ाकर, कभी डर फैलाकर। प्रशासन ने साफ किया है कि केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें। हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं, ताकि किसी भी लक्षण पर तुरंत मार्गदर्शन मिल सके। सच यही है—डर से ज्यादा नुकसान लापरवाही करती है।

पानी उबालकर पीने, फिल्टर का इस्तेमाल करने और खुले स्रोतों से पानी न लेने की अपील की गई है। पुराने घरों की जर्जर पाइपलाइनें भी जांच के दायरे में हैं। शहर को फिर से सुरक्षित पानी देना प्राथमिक लक्ष्य है। मंत्री विजयवर्गीय का कहना है कि जैसे ही स्थिति सामान्य होगी, एक स्थायी समाधान पर काम किया जाएगा—ताकि ये कहानी दोबारा न लिखी जाए।
इंदौर ने पहले भी मुश्किलें देखी हैं और हर बार संभला है। यह शहर मेहनत से, अनुशासन से और सामूहिक जिम्मेदारी से आगे बढ़ता है। आज भी वही रास्ता है। सरकार कह रही है—हम साथ हैं। जनता कह रही है—काम दिखाओ। और सच कहें तो, यही डील ठीक है।
अंत में संदेश साफ है: इलाज चल रहा है, इंतज़ाम मजबूत हैं, और जवाबदेही तय की जा रही है। पानी ज़िंदगी है—और ज़िंदगी से समझौता नहीं। इंदौर फिर उठेगा, फिर मुस्कुराएगा। अभी बस धैर्य, सावधानी और सच का साथ चाहिए।
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जीणमाता मंदिर के पट...
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