‘अब गिनती 70 पार’: ट्रंप के दोहराए गए ‘भारत-पाक’ दावे पर कांग्रेस का पीएम मोदी पर तीखा वार
- byAman Prajapat
- 21 January, 2026
भारतीय राजनीति में कुछ बयान ऐसे होते हैं जो वक्त के साथ धुंधले नहीं पड़ते, बल्कि हर बार दोहराए जाने पर और ज़्यादा चुभते हैं। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का भारत-पाकिस्तान को लेकर किया गया दावा भी कुछ ऐसा ही है। एक बार फिर ट्रंप ने वही पुराना राग अलापा, और इस बार कांग्रेस ने गिनती बढ़ाकर सीधे वार कर दिया — “अब तक 70 बार”।
कांग्रेस का यह तंज सिर्फ़ शब्दों का खेल नहीं है, यह उस बेचैनी की आवाज़ है जो विपक्ष लंबे समय से जता रहा है। पार्टी का आरोप है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार ने ट्रंप के इन बयानों पर कभी ठोस, स्पष्ट और सार्वजनिक जवाब नहीं दिया। और यही चुप्पी अब सवालों के कटघरे में है।
🔥 क्या है ट्रंप का दावा?
डोनाल्ड ट्रंप बार-बार यह कहते रहे हैं कि उनके हस्तक्षेप से भारत और पाकिस्तान के बीच बड़ा टकराव टल गया था। वह खुद को मध्यस्थ बताने की कोशिश करते रहे हैं। भारत सरकार पहले भी कई बार कह चुकी है कि कश्मीर या भारत-पाक मुद्दे पर किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार नहीं की जाती। लेकिन दिक्कत यह है कि ट्रंप का बयान रुकता नहीं, और सरकार की प्रतिक्रिया हर बार उतनी तेज़ नहीं दिखती।
🏛️ कांग्रेस का सीधा हमला
कांग्रेस नेताओं ने इस मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री मोदी पर सीधा और तीखा हमला बोला। पार्टी का कहना है कि अगर कोई विदेशी नेता बार-बार भारत की संप्रभुता से जुड़े मुद्दे पर मनगढ़ंत दावे कर रहा है, तो सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह उसे सार्वजनिक रूप से खारिज करे — वो भी हर बार, बिना थके।
कांग्रेस का तंज — “अब गिनती 70 पार हो चुकी है” — दरअसल सरकार की चुप्पी पर एक राजनीतिक हथौड़ा है। यह संदेश साफ है: या तो सरकार कमजोर है, या फिर जानबूझकर अनदेखी कर रही है।
🌍 विदेश नीति पर सवाल
यह मुद्दा अब सिर्फ़ बयानबाज़ी तक सीमित नहीं रहा। कांग्रेस का कहना है कि इससे भारत की विदेश नीति की गंभीरता पर सवाल उठते हैं। दुनिया के मंच पर भारत खुद को एक मजबूत, आत्मनिर्भर और निर्णायक शक्ति के रूप में पेश करता है, लेकिन जब अमेरिका का एक बड़ा नेता बार-बार ऐसे दावे करे और जवाब न मिले, तो संदेश गलत जाता है।
पुराने ज़माने की कूटनीति में एक बात साफ होती थी — चुप्पी भी एक जवाब होती है, लेकिन हर बार नहीं। कभी-कभी चुप्पी को कमजोरी समझ लिया जाता है, और कांग्रेस इसी बिंदु पर सरकार को घेर रही है।
🧠 बीजेपी का पलटवार
वहीं सत्तारूढ़ बीजेपी ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। पार्टी का कहना है कि कांग्रेस बेवजह मुद्दा बना रही है और देश की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रही है। बीजेपी नेताओं के मुताबिक, भारत ने हर मंच पर साफ किया है कि कश्मीर और भारत-पाक संबंध द्विपक्षीय मुद्दे हैं, इसमें किसी तीसरे की जरूरत नहीं।
लेकिन सियासत में “कहा गया” और “दिखा गया” — दोनों में फर्क होता है। और कांग्रेस इसी फर्क को जनता के सामने रख रही है।
🗳️ राजनीतिक मायने
आने वाले समय में यह मुद्दा चुनावी बहस का हिस्सा बन सकता है। विपक्ष इसे राष्ट्रीय स्वाभिमान से जोड़कर पेश करेगा, जबकि सरकार इसे गैर-ज़रूरी विवाद बताएगी। लेकिन सच यह है कि ट्रंप का बयान जितनी बार दोहराया जाएगा, उतनी बार यह सवाल उठेगा — सरकार अब क्या करेगी?

✍️ निष्कर्ष
राजनीति में याददाश्त छोटी नहीं होनी चाहिए। पुराने बयान, पुराने दावे — सब लौटकर आते हैं। ट्रंप का यह दावा भी लौट आया है, और इस बार कांग्रेस ने गिनती के साथ चोट की है। अब गेंद सरकार के पाले में है — जवाब दे, या फिर चुप्पी की कीमत चुकाने को तैयार रहे।
क्योंकि इतिहास एक बात सिखाता है —
जो बात समय पर साफ न की जाए, वही सबसे बड़ा सवाल बन जाती है।
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