‘Friday ko pata chalega’: Border 2 को लेकर ट्रोल्स पर वरुण धवन का दो-टूक जवाब
- byAman Prajapat
- 21 January, 2026
बॉलीवुड की गलियों में शोर मचा है, और इस बार नाम है वरुण धवन। वजह? Border 2। जैसे ही फिल्म से जुड़ी पहली झलक और कास्टिंग की बातें सामने आईं, सोशल मीडिया का मैदान गरम हो गया। कुछ ने तालियां बजाईं, कुछ ने भौंहें चढ़ाईं, और कुछ ने तो सीधे ट्रोलिंग का हथौड़ा चला दिया। लेकिन वरुण? भाई ने सीधा, साफ, बिना फिल्टर बोल दिया — “Friday ko pata chalega.”
ये लाइन छोटी है, मगर वजनदार। पुराने ज़माने की कहावत याद आती है—काम बोलता है, बातें नहीं। और यही वरुण का मूड लग रहा है।
ट्रोलिंग की आग कैसे लगी?
Border (1997) भारतीय सिनेमा की वो विरासत है जिसे लोग सिर्फ फिल्म नहीं, एहसास मानते हैं। जे.पी. दत्ता की उस फिल्म ने देशभक्ति को परदे पर ऐसे उतारा कि आज भी डायलॉग्स कानों में गूंजते हैं। ऐसे में Border 2 का ऐलान हुआ, तो उम्मीदें आसमान पर थीं।
लेकिन जैसे ही वरुण धवन का नाम इससे जुड़ा, सोशल मीडिया पर सवाल उठे—
“क्या वो इस किरदार के लिए सही हैं?”
“क्या नई पीढ़ी उस क्लासिक की गरिमा संभाल पाएगी?”
यहीं से ट्रोलिंग शुरू हुई। मीम्स बने, ट्वीट्स चले, और कमेंट सेक्शन रणभूमि बन गया।
वरुण का जवाब: शोर नहीं, सब्र
जहां कई स्टार्स सफाई देने लगते हैं, वहीं वरुण ने पुरानी स्कूल वाली सोच अपनाई—पहले काम, फिर जवाब। उनका “Friday ko pata chalega” वाला बयान यही कहता है कि फैसला स्क्रीन पर होगा, स्टेटस पर नहीं।
Gen Z की भाषा में कहें तो—लेट द वर्क कुक।
और सच बोलें तो, यही एटीट्यूड सॉलिड लगता है।
Border 2: विरासत का बोझ और नई उम्मीद
Border 2 सिर्फ एक फिल्म नहीं, एक जिम्मेदारी है। इसमें देशभक्ति है, जज़्बा है, और उन शहीदों की याद है जिनकी कहानियां हर पीढ़ी तक पहुंचनी चाहिए। मेकर्स का दावा है कि सीक्वल पुरानी आत्मा को जिंदा रखते हुए नई कहानी कहेगा—आज की पीढ़ी के नज़रिए से, लेकिन पुराने सम्मान के साथ।
वरुण धवन के लिए ये करियर का अहम मोड़ माना जा रहा है। रोमांटिक और कॉमर्शियल फिल्मों से निकलकर ऐसे सशक्त विषय में कदम रखना आसान नहीं होता। यही वजह है कि उनकी तैयारी, फिजिकल ट्रेनिंग और किरदार में डूबने की खबरें सामने आ रही हैं।
फैंस बनाम ट्रोल्स
एक तरफ ट्रोल्स हैं, दूसरी तरफ फैंस की फौज।
फैंस का कहना साफ है—
“पहले फिल्म देखो, फिर जज करो।”
कई लोगों ने याद दिलाया कि वरुण पहले भी खुद को अलग-अलग जॉनर में साबित कर चुके हैं। और अगर इतिहास देखें, तो बॉलीवुड में कई बार कास्टिंग पर सवाल उठे, लेकिन परदे पर वही फैसले सोना बने।
शुक्रवार का इंतजार क्यों अहम?
यह ‘Friday’ सिर्फ एक दिन नहीं, एक फैसला है। ट्रेलर हो, टीज़र हो या कोई बड़ा अपडेट—जो भी सामने आएगा, वही ट्रोलिंग का जवाब बनेगा। वरुण का बयान एक तरह से खुली चुनौती है—देख लो, फिर बोलो।
पुरानी परंपरा यही कहती है कि सिनेमा का इम्तिहान थिएटर में होता है। ट्विटर पोल में नहीं।

इंडस्ट्री की खामोशी भी एक बयान
दिलचस्प बात ये है कि इंडस्ट्री के कई लोग इस विवाद पर चुप हैं। और ये चुप्पी अक्सर भरोसे का संकेत होती है। जब टीम अपने कंटेंट पर यकीन करती है, तब शोर की जरूरत नहीं पड़ती।
आखिर में—सीधी बात
ट्रोलिंग आजकल पैकेज डील है। बड़ी फिल्म, बड़ा नाम, बड़ा शोर। लेकिन इतिहास गवाह है—जो टिकता है, वो स्क्रीन पर टिकता है। वरुण धवन का “Friday ko pata chalega” कोई बचाव नहीं, बल्कि आत्मविश्वास की घोषणा है।
अब गेंद दर्शकों के पाले में है।
शुक्रवार आएगा, परदा उठेगा, और तब तय होगा—शोर जीता या सिनेमा।
क्योंकि आखिर में, फिल्में ट्वीट्स से नहीं, तालियों से याद रखी जाती हैं।
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