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गर्मी पड़ते ही बदल जाती है एफिल टावर की ऊंचाई! जानिए पेरिस की इस मशहूर इमारत के पीछे छिपा विज्ञान

गर्मी पड़ते ही बदल जाती है एफिल टावर की ऊंचाई! जानिए पेरिस की इस मशहूर इमारत के पीछे छिपा विज्ञान

गर्मियों में बदल जाती है एफिल टावर की ऊंचाई! पेरिस की इस मशहूर इमारत का अनोखा वैज्ञानिक रहस्य जानकर चौंक जाएंगे

पेरिस। दुनिया की सबसे मशहूर इमारतों में शामिल एफिल टावर अपनी खूबसूरती और शानदार बनावट के लिए जाना जाता है। हर साल लाखों पर्यटक इसे देखने के लिए फ्रांस की राजधानी पेरिस पहुंचते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह विशाल टावर मौसम के साथ थोड़ा-बहुत आकार भी बदलता है? गर्मी बढ़ने पर इसकी धातु फैलती है, जबकि ठंड पड़ने पर सिकुड़ती है। यह कोई जादू या इंजीनियरिंग की खराबी नहीं, बल्कि विज्ञान का एक प्राकृतिक नियम है।

एफिल टावर की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, इसकी लोहे की संरचना तापमान में बदलाव के कारण गर्मियों में कुछ मिलीमीटर तक फैल सकती है और सर्दियों में फिर सिकुड़ सकती है। यह बदलाव इतना छोटा होता है कि आम पर्यटक इसे अपनी आंखों से महसूस नहीं कर पाते। फिर भी, दुनिया के सबसे पहचाने जाने वाले स्मारकों में से एक का मौसम के अनुसार बदलना विज्ञान की दिलचस्प मिसाल है।

आखिर गर्मी में क्यों बढ़ जाती है एफिल टावर की ऊंचाई?

इस सवाल का जवाब भौतिक विज्ञान के एक सिद्धांत में छिपा है, जिसे तापीय प्रसार (Thermal Expansion) कहा जाता है। जब किसी धातु का तापमान बढ़ता है, तो उसकी लंबाई और आयतन में थोड़ा विस्तार हो सकता है। तापमान कम होने पर इसके उलट धातु सिकुड़ने लगती है।

एफिल टावर की संरचना लोहे से बनी है। गर्मियों में सूर्य की गर्मी से इसका तापमान बढ़ता है, जिससे धातु फैलती है। इस फैलाव के कारण टावर के आकार और ऊंचाई में मामूली बदलाव आता है। सर्दियों में तापमान गिरने पर यही प्रक्रिया उलट जाती है।

इसका मतलब है कि एफिल टावर की ऊंचाई हर मौसम में बिल्कुल एक जैसी नहीं रहती। हालांकि, इस बदलाव को बहुत बड़ा बताना भी सही नहीं होगा। टावर की आधिकारिक जानकारी मौसमी बदलाव को कुछ मिलीमीटर के स्तर पर बताती है।

क्या गर्मियों में टावर कई सेंटीमीटर ऊंचा हो जाता है?

इंटरनेट पर कई जगह दावा किया जाता है कि गर्मियों में एफिल टावर 12 से 15 सेंटीमीटर तक ऊंचा हो जाता है। लेकिन इस दावे को समझते समय एक महत्वपूर्ण अंतर जानना जरूरी है।

एफिल टावर की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, तापमान बढ़ने से इसकी ऊंचाई में कुछ मिलीमीटर का बदलाव हो सकता है। वहीं, धूप के कारण टावर के एक हिस्से का दूसरे हिस्सों से अधिक गर्म होना इसकी संरचना को थोड़ा झुका सकता है। साफ मौसम में इसके शीर्ष का स्थान दिनभर में लगभग 15 सेंटीमीटर व्यास वाले एक गोलाकार रास्ते के आसपास बदल सकता है।

यही 15 सेंटीमीटर वाला आंकड़ा ऊंचाई बढ़ने के दावे से अलग है। इसका संबंध मुख्य रूप से सूरज की असमान गर्मी के कारण टावर के शीर्ष की स्थिति में होने वाले बदलाव से है, न कि इतनी ही मात्रा में उसकी ऊंचाई बढ़ने से।

इसलिए सही जानकारी यह है कि गर्मी में टावर की धातु फैलती है और उसकी ऊंचाई में छोटा बदलाव आता है, जबकि धूप के कारण उसके शीर्ष की दिशा और स्थिति में भी हल्का परिवर्तन हो सकता है।

सूरज की रोशनी से टावर थोड़ा झुक भी सकता है

एफिल टावर से जुड़ा एक और रोचक वैज्ञानिक तथ्य यह है कि सूरज की गर्मी इसकी चारों दिशाओं पर हमेशा समान रूप से नहीं पड़ती। दिन के दौरान टावर का एक हिस्सा सीधे सूर्य के सामने होता है, जबकि बाकी हिस्से अपेक्षाकृत कम गर्म हो सकते हैं।

जब एक तरफ की धातु अधिक गर्म होती है, तो वह दूसरी तरफ की तुलना में थोड़ा ज्यादा फैल सकती है। इससे पूरी संरचना के संतुलन में बहुत मामूली बदलाव आता है और टावर का शीर्ष सूर्य की दिशा से थोड़ा हटकर झुक सकता है।

जैसे-जैसे सूरज आसमान में आगे बढ़ता है, टावर के अलग-अलग हिस्सों पर पड़ने वाली गर्मी भी बदलती है। इसी कारण उसके शीर्ष की स्थिति में दिनभर हलचल हो सकती है।

यह बदलाव सामान्य प्राकृतिक प्रक्रिया है। इसे देखकर यह निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए कि टावर कमजोर हो रहा है या उसकी संरचना में कोई खराबी आ गई है।

1889 में बना था एफिल टावर, अब 330 मीटर है ऊंचाई

एफिल टावर का उद्घाटन 31 मार्च 1889 को हुआ था। इसे फ्रांस में आयोजित विश्व मेले के लिए बनाया गया था। उस समय यह दुनिया की सबसे ऊंची मानव निर्मित संरचना थी और इसकी ऊंचाई लगभग 312 मीटर थी।

बाद के वर्षों में रेडियो और टेलीविजन प्रसारण के लिए इसके शीर्ष पर एंटेना लगाए गए। समय के साथ इसकी आधिकारिक ऊंचाई बढ़ती गई। 15 मार्च 2022 को नया छह मीटर ऊंचा रेडियो एंटेना लगाए जाने के बाद इसकी कुल ऊंचाई 330 मीटर हो गई।

यहां एक दिलचस्प अंतर समझना जरूरी है। एंटेना लगाए जाने से टावर की दर्ज ऊंचाई में वास्तविक और स्थायी बदलाव आया, जबकि गर्मी और ठंड के कारण होने वाला बदलाव अस्थायी होता है। तापमान सामान्य होने पर धातु फिर अपने आकार के करीब लौट आती है।

क्या तापमान बदलने से टावर को नुकसान पहुंचता है?

आम तौर पर तापमान में बदलाव के कारण होने वाला प्राकृतिक फैलाव और सिकुड़ना किसी धातु संरचना के व्यवहार का सामान्य हिस्सा है। बड़ी इमारतों और पुलों को डिजाइन करते समय इंजीनियर तापमान में बदलाव के प्रभाव को ध्यान में रखते हैं।

एफिल टावर की संरचना भी मौसम, हवा, ठंड और गर्मी जैसी परिस्थितियों को ध्यान में रखकर बनाई गई है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, तापमान से होने वाले छोटे बदलावों का टावर की मजबूती पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

हालांकि, किसी भी बड़ी धातु संरचना को लंबे समय तक सुरक्षित बनाए रखने के लिए नियमित रखरखाव जरूरी होता है। एफिल टावर की लोहे की संरचना को जंग से बचाने के लिए समय-समय पर रंगाई भी की जाती है।

एफिल टावर से मिलता है विज्ञान का बड़ा सबक

एफिल टावर की यह विशेषता बताती है कि विज्ञान केवल प्रयोगशालाओं या किताबों तक सीमित नहीं है। तापीय प्रसार जैसा सिद्धांत हमारे आसपास की वस्तुओं से लेकर विशाल इमारतों तक में काम करता है।

धातुओं का गर्मी में फैलना और ठंड में सिकुड़ना इंजीनियरिंग की दुनिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पुलों, रेल पटरियों और अन्य संरचनाओं के डिजाइन में तापमान के कारण होने वाले बदलावों को ध्यान में रखना जरूरी होता है।

एफिल टावर इस सिद्धांत का एक बेहद प्रसिद्ध उदाहरण है। इसकी विशालता के बावजूद यह आसपास के तापमान और सूर्य की गर्मी के प्रति प्रतिक्रिया करता है।

निष्कर्ष: मौसम के साथ बदलता है दुनिया का मशहूर टावर

पेरिस का एफिल टावर केवल एक ऐतिहासिक स्मारक नहीं, बल्कि इंजीनियरिंग और विज्ञान का शानदार उदाहरण भी है। गर्मी में इसकी लोहे की संरचना फैलती है और ठंड में सिकुड़ती है। इस वजह से इसकी ऊंचाई में मामूली बदलाव होता है। सूर्य की असमान गर्मी से इसके शीर्ष की स्थिति में भी हल्का परिवर्तन आ सकता है।

सबसे जरूरी बात यह है कि 15 सेंटीमीटर के आसपास होने वाला शीर्ष का दैनिक बदलाव और ऊंचाई में होने वाला मौसमी बदलाव एक ही चीज नहीं हैं। दोनों के पीछे विज्ञान है, लेकिन उन्हें एक-दूसरे के स्थान पर बताना गलत होगा।

यही कारण है कि एफिल टावर की कहानी अजब-गजब होने के साथ-साथ विज्ञान को समझने का भी एक शानदार अवसर देती है।


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