ईरान का बड़ा प्लान! युद्ध दोबारा भड़का तो समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबलों पर हमला कर सकता है तेहरान, Reuters का खुलासा
- bySanjay
- 24 October, 2026
ईरान का बड़ा प्लान! युद्ध छिड़ा तो समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबलों पर मंडरा सकता है खतरा

नई दिल्ली, 24 अक्टूबर 2026। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ने की स्थिति में इसका असर केवल सैन्य ठिकानों और तेल आपूर्ति तक सीमित नहीं रह सकता। Reuters की 23 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने अमेरिका और इजरायल की ओर से दोबारा सैन्य हमले किए जाने की स्थिति में खाड़ी क्षेत्र में समुद्र के नीचे बिछी संचार केबलों को निशाना बनाने की विस्तृत योजना तैयार की है। इन केबलों के जरिए अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट डेटा, डिजिटल संचार और विभिन्न ऑनलाइन सेवाओं का बड़ा हिस्सा एक देश से दूसरे देश तक पहुंचता है।
Reuters ने दो वरिष्ठ ईरानी सुरक्षा अधिकारियों के हवाले से यह जानकारी दी है। अधिकारियों ने अपनी पहचान सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर बताया कि संभावित हमले की स्थिति में ईरान इन केबलों को निशाना बनाने के साथ उनकी मरम्मत में भी बाधा डालने की कोशिश कर सकता है, ताकि संचार सेवाओं में रुकावट लंबे समय तक बनी रहे। हालांकि, रिपोर्ट में संभावित कार्रवाई की सटीक जगह या तरीका नहीं बताया गया है। फिलहाल यह एक संभावित युद्ध योजना से जुड़ी रिपोर्ट है, समुद्री इंटरनेट नेटवर्क पर किसी नए हमले की पुष्टि नहीं।
इंटरनेट के लिए समुद्र के नीचे बिछी केबलें क्यों हैं इतनी अहम?
आज इंटरनेट का इस्तेमाल मोबाइल पर वीडियो देखने, संदेश भेजने या सोशल मीडिया चलाने तक सीमित नहीं है। अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग, ऑनलाइन कारोबार, कंपनियों के सर्वर, क्लाउड सेवाएं और डेटा केंद्र भी दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के बीच तेज और भरोसेमंद संचार पर निर्भर करते हैं।
इस वैश्विक नेटवर्क की रीढ़ समुद्र के नीचे बिछी फाइबर-ऑप्टिक केबलें हैं। इनमें बेहद पतले कांच के रेशों के माध्यम से प्रकाश संकेतों के जरिए डेटा भेजा जाता है। अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) के मुताबिक, दुनिया के लगभग 99 प्रतिशत अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट ट्रैफिक का परिवहन समुद्री केबलों के माध्यम से होता है।
इसका अर्थ यह नहीं है कि हर समुद्री केबल कटने पर पूरी दुनिया का इंटरनेट बंद हो जाएगा। वैश्विक नेटवर्क में अनेक केबलें, वैकल्पिक मार्ग और दूसरे संचार माध्यम मौजूद हैं। लेकिन किसी महत्वपूर्ण क्षेत्र में एक साथ कई केबलें प्रभावित होने पर उपलब्ध वैकल्पिक क्षमता कम पड़ सकती है और सेवाओं की गति तथा विश्वसनीयता पर असर पड़ सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर क्यों है दुनिया की नजर?
होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और आगे अरब सागर से जोड़ता है। यह क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए पहले से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। अब समुद्र के नीचे मौजूद संचार नेटवर्क को लेकर सामने आई चेतावनियों ने इसके रणनीतिक महत्व का एक और पहलू उजागर किया है।
Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के अधिकारी यदोल्लाह जवानी ने भी चेतावनी दी थी कि ईरान के बुनियादी ढांचे पर हमला होने की स्थिति में होर्मुज के नीचे मौजूद प्रमुख इंटरनेट केबलें निशाना बन सकती हैं।
हालांकि, इस क्षेत्र से होकर गुजरने वाली केबलों पर हमला होने का संभावित वैश्विक प्रभाव समझने के लिए एक अहम आंकड़ा भी ध्यान में रखना होगा। दूरसंचार शोध फर्म TeleGeography के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाली अंतरराष्ट्रीय बैंडविड्थ वैश्विक क्षमता के एक प्रतिशत से भी कम है। इसलिए यहां केबलों को नुकसान पहुंचने का असर पूरे विश्व में एक जैसा नहीं होगा। खाड़ी क्षेत्र में इसका प्रभाव अधिक गंभीर हो सकता है, जबकि अन्य क्षेत्रों में वैकल्पिक मार्ग मदद कर सकते हैं।
इंटरनेट केबलों को नुकसान हुआ तो क्या-क्या प्रभावित हो सकता है?
यदि किसी संघर्ष के दौरान महत्वपूर्ण समुद्री केबलें क्षतिग्रस्त होती हैं, तो दूरसंचार कंपनियों को डेटा ट्रैफिक दूसरे रास्तों से भेजना पड़ सकता है। इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि कितनी केबलें प्रभावित हुईं, वैकल्पिक नेटवर्क में कितनी क्षमता उपलब्ध है और प्रभावित क्षेत्र की इंटरनेट सेवाएं दूसरे मार्गों से कितनी आसानी से जुड़ सकती हैं।
संभावित प्रभावों में ये बातें शामिल हैं:
इंटरनेट की गति: कुछ क्षेत्रों में डेटा ट्रैफिक बढ़ने से इंटरनेट धीमा हो सकता है या कनेक्शन की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
ऑनलाइन भुगतान और बैंकिंग: अंतरराष्ट्रीय डिजिटल लेनदेन और वित्तीय सेवाओं में देरी या अस्थायी बाधाएं आ सकती हैं।
क्लाउड सेवाएं: दूरस्थ सर्वर पर निर्भर कंपनियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म को कनेक्टिविटी संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
ई-कॉमर्स और कारोबारी कामकाज: ऑनलाइन ऑर्डर, डिजिटल संचार और अंतरराष्ट्रीय कारोबार प्रभावित हो सकते हैं।
सेवाओं की बहाली: यदि कई केबलें एक साथ क्षतिग्रस्त हों, तो नेटवर्क को सामान्य स्थिति में लौटने में अधिक समय लग सकता है।
ये संभावित प्रभाव हैं, किसी निश्चित भविष्यवाणी का दावा नहीं। हर सेवा पर असर उसके नेटवर्क की बनावट और उपलब्ध वैकल्पिक कनेक्शन पर निर्भर करेगा।
सबसे बड़ी चुनौती होगी मरम्मत और नेटवर्क बहाल करना
समुद्र के नीचे बिछी केबल को ठीक करना सामान्य दूरसंचार उपकरण की मरम्मत जैसा आसान काम नहीं है। इसके लिए विशेष जहाजों, प्रशिक्षित तकनीकी कर्मचारियों और समुद्र के भीतर क्षतिग्रस्त हिस्से तक पहुंचने की जरूरत होती है।
युद्ध या सैन्य तनाव के दौरान मरम्मत करने वाले जहाजों की आवाजाही सुरक्षा कारणों से मुश्किल हो सकती है। बीमा खर्च बढ़ने, समुद्री क्षेत्र में काम करने की अनुमति मिलने में देरी और अन्य सुरक्षा जोखिमों के कारण मरम्मत का काम और लंबा खिंच सकता है।
Reuters की रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने बताया कि केबल की मरम्मत का समय नुकसान की प्रकृति, जहाजों की उपलब्धता और समुद्री क्षेत्र तक पहुंच जैसे कई कारकों पर निर्भर करता है। इसलिए किसी बड़े नुकसान की स्थिति में केवल केबल बदलना ही चुनौती नहीं होगा, बल्कि तकनीकी टीमों को सुरक्षित तरीके से घटनास्थल तक पहुंचाना भी महत्वपूर्ण होगा। <
क्या पूरी दुनिया का इंटरनेट बंद हो सकता है?
इस सवाल का जवाब है—सिर्फ होर्मुज क्षेत्र की कुछ केबलें प्रभावित होने से पूरी दुनिया का इंटरनेट बंद हो जाना तय नहीं है।
वैश्विक इंटरनेट कई अलग-अलग समुद्री और स्थलीय नेटवर्कों से मिलकर बना है। एक मार्ग पर खराबी आने पर ऑपरेटर कई मामलों में डेटा को दूसरे मार्ग से भेज सकते हैं। इस व्यवस्था को वैकल्पिक रूटिंग कहा जाता है।
लेकिन यदि कई महत्वपूर्ण केबलें एक साथ क्षतिग्रस्त हो जाएं, तो वैकल्पिक नेटवर्क पर दबाव बढ़ सकता है। इसका असर विशेष रूप से उन क्षेत्रों में अधिक हो सकता है जो सीमित अंतरराष्ट्रीय कनेक्शनों पर निर्भर हैं। इसलिए असली खतरा पूरी दुनिया का इंटरनेट एक साथ बंद होने से अधिक कुछ क्षेत्रों में इंटरनेट की गुणवत्ता, गति और डिजिटल सेवाओं के प्रभावित होने का है।
लाल सागर का रास्ता भी क्यों महत्वपूर्ण है?
Reuters की रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि लाल सागर से गुजरने वाले संचार मार्गों का महत्व व्यापक है। यह क्षेत्र यूरोप, पूर्वी अफ्रीका और एशिया के बीच डेटा यातायात के लिए महत्वपूर्ण कड़ी है।
TeleGeography के आंकड़ों के मुताबिक, लाल सागर के रास्ते जाने वाली क्षमता वैश्विक अंतरराष्ट्रीय मांग का लगभग तीन प्रतिशत और क्षेत्रों के बीच होने वाले ट्रैफिक का लगभग दस प्रतिशत हिस्सा है। इसलिए वहां बड़े स्तर पर केबलों को नुकसान पहुंचने की स्थिति में प्रभाव होर्मुज की तुलना में व्यापक हो सकता है।
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि ईरान ने लाल सागर में केबलों को निशाना बनाने की ऐसी किसी योजना की सार्वजनिक घोषणा नहीं की है। इस विषय पर किसी भी दावे को संभावित खतरे और पुष्टि की गई कार्रवाई के बीच अंतर रखते हुए समझना जरूरी है।
क्या इस धमकी के पीछे अमेरिका पर दबाव बनाने की रणनीति है?
विशेषज्ञों के आकलन के अनुसार, समुद्री केबलों और डिजिटल बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की चेतावनी का उद्देश्य संभावित युद्ध की कीमत बढ़ाना भी हो सकता है। खाड़ी के कई देश तेल और गैस के साथ-साथ डेटा केंद्रों, क्लाउड सेवाओं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े कारोबार में निवेश कर रहे हैं।
यदि क्षेत्रीय संघर्ष से डिजिटल बुनियादी ढांचे को खतरा पैदा होता है, तो इसका असर सरकारों, दूरसंचार कंपनियों और प्रौद्योगिकी क्षेत्र की बड़ी कंपनियों के निवेश तथा कारोबारी योजनाओं पर पड़ सकता है।
Reuters से बातचीत में Middle East Institute के ईरान कार्यक्रम के निदेशक एलेक्स वतांका ने कहा कि ऐसी धमकियों से अमेरिका की नीतियों के कारण क्षेत्रीय निवेश पर पड़ने वाले जोखिम को लेकर खाड़ी देशों और कंपनियों में चिंता बढ़ सकती है। यह विशेषज्ञ का आकलन है; इसे ईरान की घोषित योजना के पीछे आधिकारिक रूप से प्रमाणित एकमात्र उद्देश्य नहीं माना जाना चाहिए।
भारत पर क्या पड़ सकता है असर?
भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट कनेक्टिविटी व्यापार, बैंकिंग, डिजिटल सेवाओं और आईटी उद्योग के लिए महत्वपूर्ण है। भारतीय नेटवर्क विदेशी सर्वरों, क्लाउड प्लेटफॉर्म और अंतरराष्ट्रीय डेटा कनेक्शनों पर निर्भर करते हैं।
यदि खाड़ी क्षेत्र में समुद्री केबलों को नुकसान पहुंचता है, तो भारत पर संभावित असर इस बात से तय होगा कि कौन-से कनेक्शन प्रभावित होते हैं और भारतीय दूरसंचार कंपनियां डेटा को किन वैकल्पिक मार्गों से भेज सकती हैं। किसी एक क्षेत्र की केबलों को नुकसान पहुंचने का अर्थ यह नहीं कि भारत में सभी इंटरनेट सेवाएं बंद हो जाएंगी।
इस समय उपलब्ध रिपोर्ट में भारत में इंटरनेट बंद होने या भारतीय उपयोगकर्ताओं पर किसी निश्चित असर की पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए देश में बड़े पैमाने पर इंटरनेट ठप होने का दावा करना अभी उचित नहीं होगा।
आगे क्या होगा?
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तनाव कूटनीतिक बातचीत से कम होता है या सैन्य टकराव की नई स्थिति पैदा होती है। समुद्री इंटरनेट केबलों को लेकर सामने आई चेतावनी ने यह दिखाया है कि आधुनिक युद्ध का संभावित असर सैन्य और ऊर्जा क्षेत्रों से आगे बढ़कर डिजिटल अर्थव्यवस्था तक पहुंच सकता है।
हालांकि, ईरानी अधिकारियों के बयानों और Reuters की रिपोर्ट को संभावित योजना के रूप में ही देखा जाना चाहिए। जब तक किसी वास्तविक हमले या केबल क्षति की स्वतंत्र पुष्टि नहीं होती, तब तक इंटरनेट बंद होने की निश्चित भविष्यवाणी करना भ्रामक होगा।
निष्कर्ष: ईरान की कथित योजना ने खाड़ी क्षेत्र के समुद्री इंटरनेट नेटवर्क की सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा की है। होर्मुज में केबलों पर हमला होने से क्षेत्रीय इंटरनेट, ऑनलाइन भुगतान और क्लाउड सेवाओं पर असर पड़ सकता है, लेकिन पूरी दुनिया का इंटरनेट बंद हो जाना तय नहीं है। संभावित नुकसान का स्तर केबलों की संख्या, वैकल्पिक नेटवर्क और मरम्मत की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
Note: Content and images are for informational use only. For any concerns, contact us at info@rajasthaninews.com.
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