अंकिता भंडारी हत्याकांड से जोड़ने वाले वीडियो पर BJP नेता का आक्रोश, सरकार से हटाने की मांग
- byAman Prajapat
- 26 December, 2025
अंकिता भंडारी हत्याकांड—एक ऐसा नाम जिसने उत्तराखंड की शांत वादियों में सियासी भूचाल ला दिया। समय बीत गया, लेकिन सवाल अब भी हवा में तैर रहे हैं। इसी बीच एक नया विवाद सामने आया है, जिसने राजनीति और सोशल मीडिया—दोनों को फिर से आमने-सामने खड़ा कर दिया है।
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एक वरिष्ठ नेता ने सरकार से तीखी अपील की है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे उस वीडियो को तुरंत हटाया जाए, जिसमें कथित तौर पर उन्हें अंकिता भंडारी हत्याकांड से जोड़कर दिखाया गया है। नेता का कहना है कि यह वीडियो न सिर्फ़ भ्रामक है, बल्कि उनकी छवि को जानबूझकर नुकसान पहुँचाने की साज़िश भी है।
🔥 “यह सच नहीं, यह साज़िश है”
BJP नेता ने साफ शब्दों में कहा कि वीडियो में लगाए गए आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं। उनका दावा है कि वीडियो को इस तरह एडिट किया गया है कि देखने वाले को लगे मानो उनका इस जघन्य अपराध से कोई सीधा या परोक्ष संबंध हो।
सीधी बात—यह आरोप झूठा है, और झूठ चाहे जितना वायरल हो जाए, सच नहीं बनता।
📱 सोशल मीडिया: न्याय का मंच या अफ़वाहों का बाज़ार?
नेता ने सोशल मीडिया की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आजकल बिना पुष्टि के कंटेंट वायरल कर दिया जाता है, और फिर वही कंटेंट किसी की सालों की मेहनत से बनी छवि को चंद मिनटों में राख कर देता है।
उनका तर्क है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मतलब यह नहीं कि कोई भी किसी पर भी, कुछ भी थोप दे।
⚖️ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
BJP नेता ने यह भी संकेत दिया कि अगर वीडियो को जल्द नहीं हटाया गया, तो वे कानूनी रास्ता अपनाने से पीछे नहीं हटेंगे। मानहानि का मामला दर्ज करने से लेकर साइबर कानूनों के तहत कार्रवाई—सभी विकल्प खुले हैं।
उनका कहना है कि यह सिर्फ़ उनका व्यक्तिगत मामला नहीं, बल्कि लोकतंत्र और न्याय व्यवस्था की साख से जुड़ा सवाल है।
🏛️ सरकार से सीधी मांग
नेता ने राज्य और केंद्र सरकार दोनों से आग्रह किया है कि
वीडियो की तुरंत जांच कराई जाए
भ्रामक और आपत्तिजनक कंटेंट हटाया जाए
ऐसे कंटेंट बनाने और फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई हो
उनके शब्दों में, “अगर आज चुप रहे, तो कल कोई भी किसी को भी अपराधी बना देगा।”

🌑 अंकिता भंडारी मामला और राजनीति
अंकिता भंडारी हत्याकांड पहले ही संवेदनशील विषय है। ऐसे में इस मामले से जुड़े किसी भी तरह के राजनीतिक आरोप, बिना ठोस सबूतों के, समाज में भ्रम और गुस्सा पैदा करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में जिम्मेदारी और संयम सबसे ज़रूरी है।
🧠 जनता के लिए सवाल
आज सवाल सिर्फ़ यह नहीं कि वीडियो सही है या गलत। असली सवाल यह है—
क्या हम बिना सोचे-समझे हर वायरल वीडियो पर यकीन कर लेते हैं?
क्या सच अब जांच से नहीं, शेयर बटन से तय होगा?
✍️ निष्कर्ष
BJP नेता का यह कदम एक बार फिर इस बहस को ज़िंदा करता है कि सोशल मीडिया की आज़ादी की सीमा कहाँ तक होनी चाहिए। आरोप लगाना आसान है, लेकिन सच साबित करना मुश्किल—और इसी मुश्किल रास्ते से न्याय निकलता है।
पुराने ज़माने में कहा जाता था, “काग़ज़ बोले तो अदालत सुने।”
आज वीडियो बोलता है, और पूरी दुनिया सुन लेती है—बिना रुके, बिना सोचे।
अब देखना यह है कि सरकार इस अपील पर क्या कदम उठाती है, और क्या सच, शोर से ऊपर उठ पाएगा।
Note: Content and images are for informational use only. For any concerns, contact us at info@rajasthaninews.com.
जीणमाता मंदिर के पट...
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