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सोनम वांगचुक मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, CJI से PIL मानने की मांग

सोनम वांगचुक मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, CJI से PIL मानने की मांग

सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाने का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, CJI से जनहित याचिका मानने की मांग

नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को उनके अनशन के 21वें दिन दिल्ली के जंतर-मंतर से हटाकर अस्पताल ले जाने के मामले ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप की मांग की गई है। अधिवक्ता नरेंद्र मिश्रा ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को पत्र लिखकर इस मामले को जनहित याचिका (PIL) के रूप में दर्ज करने का अनुरोध किया है।

CJI को लिखे पत्र में क्या मांग की गई?

पत्र में कहा गया है कि सोनम वांगचुक और जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे अन्य लोगों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट हस्तक्षेप करे। साथ ही प्रदर्शन स्थल पर आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने और शांतिपूर्ण विरोध जारी रखने की अनुमति सुनिश्चित करने की भी मांग की गई है।

21वें दिन अस्पताल ले जाया गया

सोनम वांगचुक अनिश्चितकालीन अनशन पर थे। उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए दिल्ली पुलिस उन्हें जंतर-मंतर से हटाकर सफदरजंग अस्पताल ले गई। पुलिस का कहना है कि यह कदम दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देशों और डॉक्टरों की सलाह के आधार पर उठाया गया। वहीं वांगचुक के समर्थकों ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।

दिल्ली हाईकोर्ट ने क्या कहा था?

दिल्ली हाईकोर्ट ने पहले सरकार को निर्देश दिया था कि वांगचुक के स्वास्थ्य की नियमित मेडिकल मॉनिटरिंग की जाए और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जाए। हालांकि अदालत ने उन्हें जंतर-मंतर से हटाने का स्पष्ट आदेश नहीं दिया था।

अब सुप्रीम कोर्ट की ओर टिकी नजर

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मुख्य न्यायाधीश इस पत्र को जनहित याचिका के रूप में स्वीकार करते हैं या नहीं। यदि ऐसा होता है तो मामले की सुनवाई के दौरान प्रदर्शन के अधिकार, स्वास्थ्य सुरक्षा और प्रशासनिक कार्रवाई जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट का रुख सामने आ सकता है।

निष्कर्ष

सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाए जाने का मामला अब न्यायिक स्तर पर पहुंच गया है। आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट का फैसला इस मामले की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को उनके अनशन के 21वें दिन दिल्ली के जंतर-मंतर से हटाकर अस्पताल ले जाने के मामले ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप की मांग की गई है। अधिवक्ता नरेंद्र मिश्रा ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को पत्र लिखकर इस मामले को जनहित याचिका (PIL) के रूप में दर्ज करने का अनुरोध किया है।

CJI को लिखे पत्र में क्या मांग की गई?

पत्र में कहा गया है कि सोनम वांगचुक और जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे अन्य लोगों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट हस्तक्षेप करे। साथ ही प्रदर्शन स्थल पर आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने और शांतिपूर्ण विरोध जारी रखने की अनुमति सुनिश्चित करने की भी मांग की गई है।

21वें दिन अस्पताल ले जाया गया

सोनम वांगचुक अनिश्चितकालीन अनशन पर थे। उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए दिल्ली पुलिस उन्हें जंतर-मंतर से हटाकर सफदरजंग अस्पताल ले गई। पुलिस का कहना है कि यह कदम दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देशों और डॉक्टरों की सलाह के आधार पर उठाया गया। वहीं वांगचुक के समर्थकों ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।

दिल्ली हाईकोर्ट ने क्या कहा था?

दिल्ली हाईकोर्ट ने पहले सरकार को निर्देश दिया था कि वांगचुक के स्वास्थ्य की नियमित मेडिकल मॉनिटरिंग की जाए और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जाए। हालांकि अदालत ने उन्हें जंतर-मंतर से हटाने का स्पष्ट आदेश नहीं दिया था।

अब सुप्रीम कोर्ट की ओर टिकी नजर

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मुख्य न्यायाधीश इस पत्र को जनहित याचिका के रूप में स्वीकार करते हैं या नहीं। यदि ऐसा होता है तो मामले की सुनवाई के दौरान प्रदर्शन के अधिकार, स्वास्थ्य सुरक्षा और प्रशासनिक कार्रवाई जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट का रुख सामने आ सकता है।

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सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाने का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट

निष्कर्ष

सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाए जाने का मामला अब न्यायिक स्तर पर पहुंच गया है। आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट का फैसला इस मामले की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।


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