Follow Us:

Stay updated with the latest news, stories, and insights that matter — fast, accurate, and unbiased. Powered by facts, driven by you.

दिल्ली में प्रदूषण से जंग: सड़कों पर ‘स्मॉग-ईटिंग’ कोटिंग का ट्रायल शुरू

दिल्ली में प्रदूषण से जंग: सड़कों पर ‘स्मॉग-ईटिंग’ कोटिंग का ट्रायल शुरू

भारत की राजधानी नई दिल्ली लंबे समय से वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या से जूझ रही है। हर साल सर्दियों के मौसम में स्मॉग का स्तर खतरनाक सीमा तक पहुंच जाता है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। इस चुनौती से निपटने के लिए अब दिल्ली सरकार ने IIT मद्रास के साथ मिलकर एक नई तकनीक का परीक्षण शुरू किया है, जिसे “स्मॉग-ईटिंग” फोटोकैटलिटिक कोटिंग कहा जा रहा है।

यह तकनीक सड़कों की सतह पर एक विशेष प्रकार की कोटिंग लगाने पर आधारित है, जो सूर्य के प्रकाश के संपर्क में आने पर सक्रिय हो जाती है। इस कोटिंग में मौजूद फोटोकैटलिस्ट (आमतौर पर टाइटेनियम डाइऑक्साइड) हवा में मौजूद हानिकारक प्रदूषकों जैसे नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) और अन्य विषैले कणों को तोड़ने का काम करता है। इस प्रक्रिया को फोटोकैटलिसिस कहा जाता है, जिसमें प्रकाश की ऊर्जा का उपयोग करके रासायनिक प्रतिक्रियाएं होती हैं और प्रदूषक कम हानिकारक पदार्थों में बदल जाते हैं।

IIT मद्रास के वैज्ञानिकों के अनुसार, यदि यह ट्रायल सफल रहता है, तो यह तकनीक शहरी प्रदूषण को नियंत्रित करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। खासकर उन क्षेत्रों में जहां ट्रैफिक अधिक होता है और प्रदूषण का स्तर लगातार ऊंचा रहता है, वहां यह कोटिंग काफी प्रभावी साबित हो सकती है।

दिल्ली सरकार ने इस पहल को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया है, जिसमें शहर की कुछ चुनिंदा सड़कों पर इस कोटिंग को लगाया गया है। विशेषज्ञ लगातार इसकी प्रभावशीलता का मूल्यांकन कर रहे हैं, जिसमें हवा की गुणवत्ता में सुधार, प्रदूषकों के स्तर में कमी और दीर्घकालिक टिकाऊपन जैसे पहलुओं को शामिल किया गया है।

हालांकि, इस तकनीक के साथ कुछ चुनौतियां भी जुड़ी हुई हैं। जैसे कि इसकी लागत, रखरखाव, और बड़े पैमाने पर इसे लागू करने की व्यवहारिकता। इसके अलावा, यह भी देखा जाएगा कि अलग-अलग मौसम परिस्थितियों में यह कोटिंग कितनी प्रभावी रहती है। फिर भी, यह पहल एक सकारात्मक कदम मानी जा रही है, जो पारंपरिक उपायों से आगे बढ़कर नई तकनीकों को अपनाने की दिशा में संकेत देती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि वायु प्रदूषण जैसी जटिल समस्या का समाधान केवल एक उपाय से संभव नहीं है। इसके लिए बहु-आयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता है, जिसमें स्वच्छ ऊर्जा, बेहतर सार्वजनिक परिवहन, औद्योगिक नियंत्रण और ऐसी नवीन तकनीकों का समावेश हो।

अंत में, “स्मॉग-ईटिंग” कोटिंग का यह ट्रायल न केवल नई दिल्ली के लिए बल्कि अन्य प्रदूषित शहरों के लिए भी एक उम्मीद की किरण बन सकता है। यदि यह सफल होता है, तो भविष्य में भारत के कई शहरों में इस तकनीक का उपयोग किया जा सकता है, जिससे स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा सकेगा।

Delhi funds IIT Madras project on 'smog-eating' photocatalytic tech |  Asianet Newsable
दिल्ली में प्रदूषण से जंग: सड़कों पर ‘स्मॉग-ईटिंग’ कोटिंग का ट्रायल शुरू

Note: Content and images are for informational use only. For any concerns, contact us at info@rajasthaninews.com.

Share: