मुकुंदरा हिल्स में बाघ पुनर्वन्यीकरण पहल, 21 हेक्टेयर बड़े एनक्लोजर में शिफ्ट किया गया टाइगर
- bykrish rathore
- 25 February, 2026
राजस्थान के Mukundra Hills Tiger Reserve में बाघ संरक्षण और पुनर्वन्यीकरण (Rewilding) की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। एक बाघ को सफलतापूर्वक 21 हेक्टेयर के बड़े एनक्लोजर में स्थानांतरित किया गया है। यह प्रक्रिया वन विभाग की दीर्घकालिक योजना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य बाघों को प्राकृतिक वातावरण में दोबारा आत्मनिर्भर बनाना और उनकी स्वास्थ्य निगरानी को मजबूत करना है।
मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व राजस्थान के प्रमुख बाघ अभयारण्यों में से एक है। यहां बाघों की संख्या बढ़ाने और उनके लिए सुरक्षित आवास सुनिश्चित करने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं। हालिया स्थानांतरण उसी रणनीति का हिस्सा है, जिसमें बाघ को पहले नियंत्रित वातावरण में रखा जाता है और फिर धीरे-धीरे बड़े क्षेत्र में छोड़कर उसे प्राकृतिक शिकार और स्वतंत्र व्यवहार के लिए तैयार किया जाता है।
21 हेक्टेयर का यह नया एनक्लोजर पहले की तुलना में अधिक विस्तृत और प्राकृतिक परिस्थितियों से युक्त है। इसमें घास के मैदान, जल स्रोत और पर्याप्त हरियाली शामिल है, जिससे बाघ को अपने स्वाभाविक व्यवहार को अपनाने में मदद मिलती है। विशेषज्ञों के अनुसार, बड़े क्षेत्र में स्थानांतरण से बाघ की शारीरिक सक्रियता बढ़ती है और वह प्राकृतिक शिकार कौशल को बेहतर ढंग से विकसित कर पाता है।
इस पुनर्वन्यीकरण योजना के साथ-साथ बाघ के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी भी की जा रही है। वन्यजीव विशेषज्ञ जीपीएस कॉलर, कैमरा ट्रैप और नियमित मेडिकल जांच के माध्यम से उसकी गतिविधियों और स्वास्थ्य स्थिति पर नजर रख रहे हैं। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बाघ पूरी तरह स्वस्थ हो और भविष्य में खुले जंगल क्षेत्र में सफलतापूर्वक रह सके।
राजस्थान में बाघ संरक्षण पिछले कुछ वर्षों में प्राथमिकता का विषय रहा है। राज्य सरकार और वन विभाग मिलकर बाघों के लिए सुरक्षित कॉरिडोर, शिकार प्रबंधन और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने की दिशा में काम कर रहे हैं। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व को विशेष रूप से एक संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पुनर्वन्यीकरण कार्यक्रम बाघ संरक्षण की दीर्घकालिक रणनीति का अहम हिस्सा है। इससे न केवल बाघों की संख्या में वृद्धि होगी, बल्कि जैव विविधता और पर्यावरण संतुलन भी मजबूत होगा। बाघ पारिस्थितिकी तंत्र के शीर्ष शिकारी होते हैं, और उनकी उपस्थिति जंगल के स्वास्थ्य का संकेत मानी जाती है।
कुल मिलाकर, 21 हेक्टेयर बड़े एनक्लोजर में बाघ का सफल स्थानांतरण वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। यह पहल न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बन सकती है, जहां वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सतत निगरानी के माध्यम से वन्यजीव संरक्षण को नई दिशा दी जा रही है।

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