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गिद्ध बचेंगे तो प्रकृति बचेगी! खत्म होते गिद्धों को बचाने की मुहिम तेज

गिद्ध बचेंगे तो प्रकृति बचेगी! खत्म होते गिद्धों को बचाने की मुहिम तेज

गिद्ध बचेंगे तो प्रकृति बचेगी! खत्म होते गिद्धों को बचाने की मुहिम तेज, जानिए क्यों हैं इतने जरूरी

नई दिल्ली: गिद्धों को अक्सर सिर्फ मृत जानवरों को खाने वाले पक्षी के तौर पर देखा जाता है, लेकिन प्रकृति के संतुलन में इनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। International Vulture Awareness Day के मौके पर गिद्धों के संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवास को बचाने पर जोर दिया गया।

गिद्ध मृत पशुओं के शवों को तेजी से साफ करके पर्यावरण को स्वच्छ रखने में मदद करते हैं। यही वजह है कि इन्हें प्रकृति का Natural Scavenger यानी प्राकृतिक सफाईकर्मी भी कहा जाता है।

गिद्धों की संख्या कम होना क्यों चिंता की बात है?

पिछले कुछ दशकों में गिद्धों की आबादी में भारी गिरावट ने पर्यावरणविदों की चिंता बढ़ाई है। पशु चिकित्सा में इस्तेमाल होने वाली कुछ दवाओं, भोजन की कमी, आवास का नुकसान और मानवीय गतिविधियों को गिद्धों के लिए प्रमुख खतरे माना गया है।

गिद्धों की संख्या घटने से मृत पशुओं के शव लंबे समय तक खुले में पड़े रह सकते हैं। इससे दूसरे scavenger animals की संख्या बढ़ने और संक्रमण फैलने का खतरा भी पैदा हो सकता है।

संरक्षण के लिए क्या हो रहा है?

गिद्धों के संरक्षण के लिए भारत में Vulture Conservation and Breeding Centres, सुरक्षित आवास और निगरानी कार्यक्रमों पर काम किया जा रहा है। संरक्षण विशेषज्ञों का जोर ऐसे क्षेत्रों को सुरक्षित रखने पर है जहां गिद्ध भोजन और nesting sites के लिए निर्भर रहते हैं।

पर्यावरण संरक्षण का संदेश साफ है—गिद्धों को बचाना सिर्फ एक पक्षी को बचाना नहीं, बल्कि पूरे ecosystem को सुरक्षित रखना है।


Note: Content and images are for informational use only. For any concerns, contact us at info@rajasthaninews.com.

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