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Reliance Group ने सुभाष चंद्रा के आरोपों को बताया ‘बेबुनियाद’, मीडिया ब्रांड्स पर सफाई

Reliance Group ने सुभाष चंद्रा के आरोपों को बताया ‘बेबुनियाद’, मीडिया ब्रांड्स पर सफाई

Reliance vs Subhash Chandra: सुभाष चंद्रा के आरोपों पर रिलायंस का पलटवार, कहा- ‘बेबुनियाद हैं आरोप’

नई दिल्ली। Essel Group के चेयरमैन और Zee के संस्थापक सुभाष चंद्रा के आरोपों को लेकर कॉरपोरेट और मीडिया जगत में विवाद बढ़ गया है। सुभाष चंद्रा की ओर से रिलायंस ग्रुप से जुड़े मीडिया संस्थानों पर गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद अब रिलायंस ग्रुप ने आधिकारिक बयान जारी कर इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। रिलायंस ने कहा कि उसके मीडिया ब्रांड्स का इस्तेमाल कभी किसी व्यक्ति या संस्था पर हमला करने के लिए नहीं किया गया और भविष्य में भी ऐसा नहीं किया जाएगा।

रिलायंस ने क्या कहा?

रिलायंस ग्रुप के प्रवक्ता ने शुक्रवार को जारी बयान में सुभाष चंद्रा की ओर से मीडिया संस्थानों को लेकर लगाए गए आरोपों और संकेतों को ‘बेबुनियाद’ बताया।

ग्रुप ने स्पष्ट किया कि उसके मीडिया ब्रांड्स का इस्तेमाल किसी व्यक्ति को निशाना बनाने या उसके खिलाफ अभियान चलाने के लिए नहीं किया गया है।

रिलायंस ने अपने बयान में कहा कि उसके मीडिया ब्रांड्स ने कभी किसी पर हमला करने का काम नहीं किया और न ही भविष्य में ऐसा किया जाएगा।

सुभाष चंद्रा ने क्या आरोप लगाए?

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब सुभाष चंद्रा अपने व्यक्तिगत insolvency proceedings और Essel Group की देनदारियों को लेकर सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रख रहे हैं।

चंद्रा ने हालिया बयान में अपने ऊपर बताए जा रहे ₹22,006 करोड़ के दावों को लेकर भी सफाई दी है। उनका कहना है कि उनके खिलाफ वास्तविक personal insolvency claims लगभग ₹3,992 करोड़ के हैं, जबकि ₹22,006 करोड़ का आंकड़ा अलग-अलग दावों से जुड़ा है।

उन्होंने यह भी कहा कि Essel Group की एक समय कुल देनदारियां करीब ₹45,000 करोड़ थीं, जिनमें से लगभग ₹43,000 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है। चंद्रा ने लोगों से सोशल मीडिया और अन्य जगहों पर उनके बारे में चल रही जानकारी को बिना सत्यापन के स्वीकार नहीं करने की अपील की है।

NCLT का फैसला भी बना विवाद की वजह

सुभाष चंद्रा से जुड़ा insolvency मामला भी इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में है। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक NCLT ने उनकी repayment plan को मंजूरी दी है। रिपोर्टों में करीब ₹22,006 करोड़ के claims के मुकाबले लगभग ₹6.25–6.5 करोड़ के भुगतान का उल्लेख किया गया है।

इस फैसले को लेकर कुछ वित्तीय लेनदारों ने आपत्ति जताई है। HDFC Bank ने भी फैसले को चुनौती देने के लिए कानूनी विकल्पों पर विचार करने की बात कही है।

हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि ₹22,006 करोड़ का आंकड़ा सीधे तौर पर ‘बैंक लोन’ या ‘लोन राइट-ऑफ’ के बराबर नहीं माना जाना चाहिए। अलग-अलग रिपोर्टों में claims, personal guarantees और वास्तविक outstanding liabilities के बीच अंतर बताया गया है।

रिलायंस ने सुभाष चंद्रा के लिए क्या कहा?

आरोपों को खारिज करने के बावजूद रिलायंस ग्रुप ने सुभाष चंद्रा के प्रति सम्मान का भाव भी व्यक्त किया है।

कंपनी के बयान में उन्हें एक कारोबारी और उद्यमी के रूप में सम्मान देने की बात कही गई और उनके भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी गईं।

इससे साफ है कि रिलायंस का जवाब मुख्य रूप से मीडिया संस्थानों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को खारिज करने पर केंद्रित है।

विवाद क्यों बढ़ा?

मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सुभाष चंद्रा लंबे समय तक भारतीय मीडिया और टेलीविजन उद्योग के प्रमुख कारोबारी चेहरों में रहे हैं। वहीं रिलायंस भी देश के बड़े कॉरपोरेट समूहों में शामिल है और मीडिया क्षेत्र में उसकी मौजूदगी बढ़ी है।

ऐसे में दोनों पक्षों के बीच सार्वजनिक बयानबाजी ने मीडिया इंडस्ट्री और कॉरपोरेट जगत का ध्यान खींचा है।

आगे क्या हो सकता है?

फिलहाल दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे सामने आए हैं। रिलायंस ने मीडिया संस्थानों से जुड़े आरोपों को स्पष्ट रूप से खारिज किया है, जबकि सुभाष चंद्रा ने अपने खिलाफ चल रही insolvency और वित्तीय दावों को लेकर अपना पक्ष रखा है।

वहीं NCLT के repayment plan को लेकर वित्तीय लेनदारों की संभावित कानूनी चुनौती इस मामले को आगे भी चर्चा में रख सकती है।

निष्कर्ष

सुभाष चंद्रा और रिलायंस ग्रुप के बीच सामने आया यह विवाद फिलहाल आरोप बनाम खंडन की स्थिति में है। रिलायंस ने सुभाष चंद्रा के मीडिया संबंधी आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए अपने मीडिया ब्रांड्स के इस्तेमाल को लेकर साफ सफाई दी है। दूसरी ओर, चंद्रा अपने वित्तीय और insolvency मामले में सामने आ रही रकम और दावों को लेकर अपना पक्ष रख रहे हैं।

अब इस पूरे मामले में आगे होने वाली कानूनी और कॉरपोरेट कार्रवाई पर नजर रहेगी।

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