ज़हरीले तत्व के खतरे पर नेस्ले का बड़ा कदम: शिशु फ़ॉर्मूला दूध के कई बैच वैश्विक स्तर पर वापस, कंपनी बोली—भारत सुरक्षित
- byAman Prajapat
- 08 January, 2026
दुनिया की सबसे बड़ी खाद्य और पेय पदार्थ बनाने वाली कंपनियों में शामिल नेस्ले (Nestlé) एक बार फिर वैश्विक सुर्खियों में है। इस बार वजह स्वाद या ब्रांड नहीं, बल्कि शिशु फ़ॉर्मूला दूध से जुड़ा संभावित स्वास्थ्य खतरा है। कंपनी ने एहतियातन अपने कुछ इन्फैंट फ़ॉर्मूला बैचों को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार से वापस मंगाने (रिकॉल) का फैसला लिया है।
हालाँकि राहत की बात यह है कि नेस्ले इंडिया ने साफ शब्दों में कहा है कि भारत में बिकने वाले शिशु फ़ॉर्मूला उत्पाद इस रिकॉल से प्रभावित नहीं हैं और यहाँ उपलब्ध सभी प्रोडक्ट्स खाद्य सुरक्षा मानकों पर पूरी तरह खरे उतरते हैं।
🔍 क्या है पूरा मामला?
वैश्विक रिपोर्टों के अनुसार, कुछ देशों में बिक रहे नेस्ले के शिशु फ़ॉर्मूला दूध के चुनिंदा बैचों में एक अवांछित या संभावित रूप से ज़हरीले तत्व (toxin) की मौजूदगी की आशंका जताई गई। जैसे ही यह संकेत मिला, कंपनी ने “पहले सुरक्षा” (Safety First) के सिद्धांत पर चलते हुए तत्काल कदम उठाया।
नेस्ले का कहना है कि यह रिकॉल एहतियाती (Precautionary) है, यानी अभी तक किसी बड़े नुकसान या गंभीर स्वास्थ्य समस्या की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन शिशुओं की सुरक्षा को देखते हुए कोई जोखिम उठाना ठीक नहीं समझा गया।
🌍 किन देशों में रिकॉल?
कंपनी ने जिन बाज़ारों में यह उत्पाद वापस मंगाए हैं, वे मुख्य रूप से कुछ यूरोपीय, अमेरिकी और लैटिन अमेरिकी क्षेत्र बताए जा रहे हैं। हर देश में अलग-अलग बैच नंबर और उत्पादन तिथियों के आधार पर कार्रवाई की गई है।
नेस्ले ने स्थानीय प्रशासन और खाद्य सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर यह सुनिश्चित किया कि संदिग्ध बैच उपभोक्ताओं तक न पहुँचें।
🇮🇳 भारत को लेकर नेस्ले का क्या कहना है?
नेस्ले इंडिया ने स्थिति साफ करते हुए कहा:
भारत में बिकने वाले शिशु फ़ॉर्मूला उत्पाद अलग मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स में तैयार होते हैं
भारतीय उत्पादों पर FSSAI और अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के तहत सख्त परीक्षण होता है
किसी भी भारतीय बैच में कोई खतरा नहीं पाया गया है
इसलिए भारत में कोई रिकॉल नहीं किया गया है
कंपनी ने माता-पिता से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें।
👶 शिशु फ़ॉर्मूला इतना संवेदनशील क्यों?
शिशु फ़ॉर्मूला दूध सीधे तौर पर नवजात और छोटे बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ा होता है। इस उम्र में बच्चों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, इसलिए ज़रा-सा भी रासायनिक असंतुलन गंभीर परिणाम दे सकता है।
इसी कारण इस इंडस्ट्री में:
ज़ीरो-टॉलरेंस नीति अपनाई जाती है
बार-बार लैब टेस्टिंग होती है
और किसी भी संदेह पर तुरंत रिकॉल किया जाता है
नेस्ले का यह कदम इसी परंपरा का हिस्सा माना जा रहा है।

🧠 कंपनी की साख और पुराना अनुभव
नेस्ले कोई नया नाम नहीं है। दशकों से यह कंपनी बेबी फ़ूड, डेयरी और न्यूट्रिशन प्रोडक्ट्स में अग्रणी रही है। अतीत में भी जब-जब किसी उत्पाद को लेकर सवाल उठे, कंपनी ने खुलेपन और जिम्मेदारी के साथ प्रतिक्रिया दी है।
आलोचक कहते हैं कि बड़ी कंपनियों की जिम्मेदारी भी बड़ी होती है — और इस बार नेस्ले ने वही किया जो एक जिम्मेदार ब्रांड से उम्मीद की जाती है।
📢 उपभोक्ताओं के लिए सलाह
अगर आप भारत में नेस्ले का शिशु फ़ॉर्मूला इस्तेमाल कर रहे हैं, तो घबराने की ज़रूरत नहीं
पैक पर दिए गए बैच नंबर और निर्माण तिथि पर ध्यान रखें
किसी भी संदेह की स्थिति में नेस्ले कस्टमर केयर या डॉक्टर से संपर्क करें
सोशल मीडिया पर फैल रही अधूरी या भ्रामक सूचनाओं से बचें
✍️ निष्कर्ष
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह साबित किया है कि शिशु आहार में लापरवाही की कोई जगह नहीं। नेस्ले का वैश्विक रिकॉल भले ही चिंता पैदा करे, लेकिन भारत को लेकर कंपनी का स्पष्ट रुख माता-पिता के लिए राहत भरा संदेश है।
पुरानी कहावत है—“बच्चों की सेहत में ज़रा-सी चूक, पूरी उम्र का बोझ बन जाती है।”
और शायद इसी सोच के साथ नेस्ले ने समय रहते कदम उठाया।
Note: Content and images are for informational use only. For any concerns, contact us at info@rajasthaninews.com.
जयपुर मे सोने और चां...
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