Follow Us:

Stay updated with the latest news, stories, and insights that matter — fast, accurate, and unbiased. Powered by facts, driven by you.

समुद्र में समा सकती है मुंबई? बढ़ता जलस्तर बना बड़ा खतरा, UN की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता

समुद्र में समा सकती है मुंबई? बढ़ता जलस्तर बना बड़ा खतरा, UN की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता

Sea Level Rise: क्या सच में समुद्र में समा सकती है मुंबई? बढ़ते जलस्तर ने बढ़ाई चिंता, जानें कितना बड़ा है खतरा

नई दिल्ली। मुंबई की पहचान सिर्फ देश की आर्थिक राजधानी के तौर पर नहीं है, बल्कि यह समुद्र के किनारे बसा दुनिया के बड़े महानगरों में से एक है। ऐसे में समुद्र के बढ़ते जलस्तर और बदलते मौसम ने शहर के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ा दी है। हालिया संयुक्त राष्ट्र (UN) रिपोर्ट में मुंबई और कोलकाता समेत दक्षिण एशिया के कई निचले इलाकों में रहने वाली आबादी को समुद्र के बढ़ते जलस्तर से गंभीर खतरे की चेतावनी दी गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण एशिया के निचले डेल्टा क्षेत्रों में 1.4 करोड़ से ज्यादा लोग तत्काल विस्थापन के जोखिम में हैं। इसमें भारत के मुंबई और कोलकाता तथा बांग्लादेश की राजधानी ढाका जैसे शहर शामिल हैं। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि पूरी मुंबई किसी निश्चित तारीख को समुद्र में डूब जाएगी। खतरा मुख्य रूप से निचले इलाकों में बार-बार बाढ़, स्थायी जलभराव, तटीय कटाव और लोगों के विस्थापन का है।

समुद्र का जलस्तर आखिर बढ़ क्यों रहा है?

समुद्र के बढ़ते जलस्तर के पीछे जलवायु परिवर्तन की कई प्रक्रियाएं काम कर रही हैं। ग्लोबल वार्मिंग के कारण पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है, जिससे ग्लेशियर और बर्फ की बड़ी चादरें पिघल रही हैं।

इसके अलावा समुद्र का पानी गर्म होने पर फैलता है। इसे Thermal Expansion कहा जाता है। यानी समुद्र के पानी की मात्रा में बर्फ पिघलने से बढ़ोतरी के साथ-साथ गर्म पानी के फैलने से भी समुद्र का स्तर ऊपर जाता है। UN ने अपनी हालिया रिपोर्ट में इन दोनों प्रक्रियाओं को समुद्र के बढ़ते स्तर की प्रमुख वजहों में शामिल किया है।

मुंबई के लिए खतरा ज्यादा क्यों?

मुंबई का बड़ा हिस्सा समुद्र के बेहद करीब और अपेक्षाकृत निचले भूभाग में स्थित है। शहर में भारी बारिश और हाई टाइड एक साथ आने पर पहले से ही जलभराव की समस्या गंभीर हो जाती है।

भविष्य में समुद्र का औसत स्तर और ऊपर जाता है तो हाई टाइड और समुद्री तूफानों के दौरान पानी के शहर के निचले इलाकों में पहुंचने का खतरा बढ़ सकता है। विशेषज्ञ अध्ययनों में भी समुद्र के स्तर में मामूली बढ़ोतरी को मुंबई जैसे निचले और घनी आबादी वाले शहरों में बारिश से होने वाली बाढ़ के जोखिम से जोड़ा गया है।

सिर्फ मुंबई नहीं, कोलकाता और ढाका भी खतरे में

UN की रिपोर्ट ने दक्षिण एशिया के कई तटीय और डेल्टा क्षेत्रों को लेकर चिंता जताई है। मुंबई, कोलकाता और ढाका जैसे शहरों में समुद्र के बढ़ते स्तर का सबसे बड़ा असर लोगों के घरों, रोजगार और बुनियादी ढांचे पर पड़ सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण एशिया में आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मानवीय विस्थापन एक बड़ी चुनौती बन सकता है। समुद्र के बढ़ते स्तर के कारण कुछ इलाकों में रहने लायक जमीन कम हो सकती है और लोगों को दूसरे क्षेत्रों में जाना पड़ सकता है।

2024 में समुद्र का स्तर कितनी तेजी से बढ़ा?

UN की हालिया रिपोर्ट के अनुसार 2024 में वैश्विक समुद्र स्तर में करीब 5.9 मिलीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई, जो रिकॉर्ड स्तर की वार्षिक वृद्धि में शामिल है। रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि समुद्र का स्तर अब सिर्फ भविष्य की समस्या नहीं है, बल्कि इसका असर वर्तमान में भी दिखाई दे रहा है।

यह बढ़ोतरी एक साल में छोटी दिखाई दे सकती है, लेकिन दशकों तक लगातार जारी रहने पर इसका प्रभाव काफी बड़ा हो सकता है।

बढ़ता समुद्र सिर्फ बाढ़ नहीं लाएगा

समुद्र का बढ़ता जलस्तर सिर्फ तटीय बाढ़ का खतरा नहीं बढ़ाता। इससे शहरों की कई जरूरी व्यवस्थाएं प्रभावित हो सकती हैं।

🚇 Transport पर असर

तटीय इलाकों में सड़क, रेलवे और अन्य परिवहन नेटवर्क बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं।

💧 पानी की समस्या

समुद्री पानी के जमीन के अंदर प्रवेश करने से कुछ क्षेत्रों में भूजल की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।

🏠 घर और संपत्ति

निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के मकान और जमीन बाढ़ तथा तटीय कटाव के ज्यादा जोखिम में आ सकते हैं।

🏥 स्वास्थ्य पर असर

लंबे समय तक जलभराव और खराब होती जल-स्वच्छता व्यवस्था से स्वास्थ्य संबंधी खतरे बढ़ सकते हैं।

UN ने भी चेताया है कि समुद्र के बढ़ते स्तर का असर infrastructure, transport, energy, water और sanitation systems पर पड़ सकता है।

क्या 2050 तक मुंबई डूब जाएगी?

यह सवाल सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है, लेकिन इसका जवाब सीधे “हां” नहीं है

कुछ पुराने अध्ययनों और मॉडलिंग में 2050 के आसपास मुंबई के कई निचले हिस्सों में बाढ़ और जलभराव के बढ़ते खतरे का अनुमान लगाया गया है। लेकिन इसका अर्थ पूरी मुंबई के समुद्र में डूब जाने से नहीं है।

एक अध्ययन के अनुसार समुद्र स्तर बढ़ने की स्थिति में मुंबई की बड़ी संख्या में इमारतें और सड़कें जोखिम में आ सकती हैं, खासकर जब समुद्र का बढ़ा स्तर हाई टाइड जैसी घटनाओं के साथ जुड़ता है।

इसलिए ज्यादा सटीक बात यह है कि मुंबई के कुछ निचले और तटीय हिस्सों में भविष्य में बाढ़ और स्थायी जलभराव का जोखिम बढ़ सकता है।

मुंबई को बचाने के लिए क्या करना होगा?

जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को पूरी तरह खत्म करना आसान नहीं है, लेकिन शहर को उसके लिए तैयार किया जा सकता है।

इसके लिए तटीय इलाकों की बेहतर मैपिंग, मजबूत ड्रेनेज सिस्टम, बाढ़ प्रबंधन, मैंग्रोव और प्राकृतिक तटीय सुरक्षा का संरक्षण तथा नए निर्माण की बेहतर प्लानिंग जरूरी होगी।

इसके साथ ही दुनिया भर में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम करना भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि समुद्र के स्तर में लंबी अवधि की वृद्धि का मूल कारण ग्लोबल वार्मिंग है।

सबसे बड़ा खतरा किसे होगा?

समुद्र के बढ़ते जलस्तर का असर सभी लोगों पर एक जैसा नहीं पड़ेगा। सबसे ज्यादा जोखिम उन लोगों को हो सकता है जो निचले तटीय इलाकों में रहते हैं और जिनके पास सुरक्षित स्थान पर जाने या घर को सुरक्षित बनाने के सीमित संसाधन हैं।

इसीलिए UN ने समुद्र के बढ़ते स्तर को सिर्फ पर्यावरण की समस्या नहीं, बल्कि मानवीय, आर्थिक और सामाजिक चुनौती के रूप में देखने की जरूरत बताई है।

निष्कर्ष

समुद्र का बढ़ता जलस्तर मुंबई के लिए निश्चित रूप से गंभीर चुनौती है, लेकिन “मुंबई 2050 में पूरी तरह समुद्र में समा जाएगी” कहना उपलब्ध वैज्ञानिक जानकारी को जरूरत से ज्यादा सरल बना देना होगा।

असल चिंता मुंबई के निचले और तटीय हिस्सों में बढ़ती coastal flooding, erosion और permanent inundation की है। हालिया UN रिपोर्ट ने दक्षिण एशिया में 1.4 करोड़ से ज्यादा लोगों के तत्काल विस्थापन जोखिम की चेतावनी देकर इस खतरे की गंभीरता फिर सामने रखी है।

नजदीक आ रहा है समंदर, मुंबई-कोलकाता के लाखों घर डूबेंगे: UN - Mumbai and  Kolkata rising sea level united nations warns ntcppl - AajTak
क्या डूब जाएगी मुंबई? 🌊
UN की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता

अब चुनौती यह है कि मुंबई जैसे शहरों को भविष्य के बढ़ते समुद्री खतरे के लिए समय रहते तैयार किया जाए। अगर जलवायु अनुकूलन, तटीय सुरक्षा और शहरी नियोजन पर अभी से गंभीरता से काम किया जाता है, तो आने वाले दशकों में नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।


Note: Content and images are for informational use only. For any concerns, contact us at info@rajasthaninews.com.

Share: