नेपाल बाढ़: 45 मिनट का समय मिलने के बावजूद चीन पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?
- bySanjay
- 27 August, 2026
नेपाल बाढ़: 45 मिनट की चेतावनी पर चीन से सवाल

नेपाल और चीन की सीमा पर आई विनाशकारी बाढ़ के बाद अब सबसे बड़ा सवाल राहत और बचाव से ज्यादा समय रहते चेतावनी देने को लेकर उठ रहा है। 26 अगस्त को तिब्बत के केरुंग इलाके में अचानक भीषण बाढ़ और मलबे का सैलाब आया, जिसके बाद पानी नेपाल की भोटेकोशी नदी की ओर तेजी से बढ़ा। इस आपदा ने नेपाल के रसुवा और आसपास के इलाकों में भारी तबाही मचाई।

रिपोर्टों के अनुसार, तिब्बत के केरुंग काउंटी में करीब 10:30 बजे स्थानीय समय पर बाढ़ का असर दिखाई दिया, जबकि लगभग 45 मिनट बाद बाढ़ का पानी नेपाल की तरफ पहुंचा। यही 45 मिनट अब सवालों के घेरे में हैं। नेपाल में यह चर्चा तेज है कि अगर सीमा पार से समय रहते आधिकारिक चेतावनी जारी की जाती, तो क्या स्थानीय प्रशासन लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा सकता था?
नेपाल के अधिकारियों के मुताबिक, रसुवा के मुख्य जिला अधिकारी ने स्थानीय लोगों से बाढ़ आने की सूचना मिलने के बाद करीब 9 बजे संबंधित आपदा प्राधिकरण से संपर्क किया था। हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि चीन के पास आपदा की कितनी अग्रिम जानकारी थी और नेपाल को आधिकारिक चेतावनी देने के लिए वास्तव में कितना समय उपलब्ध था। इसलिए सीधे तौर पर चीन की “लापरवाही” को जिम्मेदार ठहराना अभी जल्दबाजी होगी।
दूसरी तरफ, चीन ने चेतावनी न देने के आरोपों को खारिज किया है। चीनी दूतावास ने इन दावों को गलत बताया और कहा कि आपदा भूकंप या भूकंप जैसी ग्लेशियर टूटने की घटना से जुड़ी थी। चीन का कहना है कि उसकी तरफ भी भारी नुकसान हुआ और उसने बड़े स्तर पर बचाव दल, सैन्यकर्मी और इंजीनियरिंग टीमें तैनात की हैं।
इस आपदा में नेपाल और तिब्बत दोनों तरफ भारी जान-माल का नुकसान हुआ है। बाढ़ और मलबे ने घरों, सड़कों, पुलों और बिजली से जुड़े ढांचे को नुकसान पहुंचाया। नेपाल में सैकड़ों लोगों की मौत और सैकड़ों लोगों के लापता होने की खबर है, जबकि चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी लोगों के लापता होने की सूचना दी गई है। आंकड़े लगातार अपडेट हो रहे हैं।
अब इस मामले का सबसे अहम मुद्दा सीमा पार शुरुआती चेतावनी प्रणाली बन गया है। भोटेकोशी नदी का जल तंत्र तिब्बत से जुड़ा है, इसलिए ऐसी आपदा में चीन और नेपाल के बीच तेज और भरोसेमंद सूचना साझा करना बेहद महत्वपूर्ण है। खासकर तब, जब बाढ़ के पानी को सीमा पार करने में लगभग 45 मिनट लगे हों।
मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि बाढ़ के बाद सीमा क्षेत्र में एक नई बैरियर झील बनने की खबर सामने आई है। चीन ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में इसमें और पानी जमा हो सकता है और इसके टूटने पर दोबारा अचानक बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है।
निष्कर्ष: 45 मिनट का अंतर निश्चित रूप से गंभीर सवाल खड़े करता है, लेकिन अभी यह कहना सही नहीं होगा कि चीन ने जानबूझकर नेपाल को चेतावनी नहीं दी। असली सवाल यह है कि उस समय चीन के पास कितनी विश्वसनीय जानकारी थी, क्या वह जानकारी नेपाल तक पहुंचाई गई और यदि नहीं पहुंचाई गई तो क्यों। आने वाली जांच इन सवालों का जवाब तय करेगी।
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