जयपुर में UGC नियमों के विरोध में बवाल, करणी सेना पर लाठीचार्ज, महिपाल सिंह मकराना का बड़ा बयान
- bypari rathore
- 04 August, 2026
जयपुर में UGC नियमों के विरोध में बवाल: करणी सेना की रैली पर पुलिस का लाठीचार्ज, महिपाल सिंह मकराना ने सरकार को दी चेतावनी
जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर सोमवार को उस समय तनाव का केंद्र बन गई, जब यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के 'Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026' के विरोध में निकाली गई श्री राजपूत करणी सेना की विशाल रैली पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव में बदल गई। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग, वाटर कैनन और हल्का बल प्रयोग किया। वहीं प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि उन पर लाठीचार्ज किया गया, जिसमें कई लोग घायल हुए।
क्या है पूरा मामला?
श्री राजपूत करणी सेना पिछले कई दिनों से UGC के नए इक्विटी नियमों का विरोध कर रही है। संगठन का आरोप है कि ये नियम सामाजिक समानता के नाम पर कुछ वर्गों के साथ भेदभाव कर सकते हैं। इसी मांग को लेकर सोमवार को जयपुर में एक बड़ी रैली आयोजित की गई, जिसका नेतृत्व करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने किया।
रैली की शुरुआत रावण गेट (कालवाड़ रोड) से हुई और प्रदर्शनकारियों का उद्देश्य जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपना था। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था के तहत कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की थी ताकि रैली तय मार्ग से ही आगे बढ़े।
कैसे बढ़ा विवाद?
पुलिस के अनुसार, स्थिति तब बिगड़ी जब प्रदर्शनकारियों का एक समूह निर्धारित मार्ग से हटकर भाजपा के प्रदेश कार्यालय की ओर बढ़ने लगा। पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, लेकिन कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड हटाकर आगे बढ़ने की कोशिश की। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की हुई और हालात तनावपूर्ण हो गए। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने पहले वाटर कैनन का इस्तेमाल किया और बाद में हल्का बल प्रयोग किया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मौके पर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कई प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठ गए, जबकि कुछ ने पुलिस कार्रवाई का विरोध करते हुए नारेबाजी की।
प्रदर्शनकारियों का आरोप
करणी सेना के नेताओं का आरोप है कि उनका प्रदर्शन शांतिपूर्ण था और पुलिस ने बिना पर्याप्त कारण के बल प्रयोग किया। संगठन का कहना है कि महिलाओं और युवाओं पर भी वाटर कैनन चलाया गया तथा लाठियां बरसाई गईं। प्रदर्शनकारियों ने इस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
महिपाल सिंह मकराना का बयान
करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने पुलिस कार्रवाई की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि आंदोलन लोकतांत्रिक तरीके से किया जा रहा था, लेकिन प्रदर्शनकारियों के साथ कठोर व्यवहार किया गया। मकराना ने कहा कि यदि मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। उन्होंने समर्थकों से संगठित रहने और आगे की रणनीति के लिए तैयार रहने की अपील भी की।
पुलिस का पक्ष
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रदर्शन की अनुमति तय मार्ग और शर्तों के साथ दी गई थी। अधिकारियों के अनुसार, जब कुछ प्रदर्शनकारी निर्धारित मार्ग छोड़कर दूसरी दिशा में बढ़ने लगे और बैरिकेड हटाने लगे, तब कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई। पुलिस का कहना है कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए न्यूनतम बल का उपयोग किया गया।
UGC नियमों को लेकर क्यों हो रहा है विरोध?
प्रदर्शन का मुख्य कारण UGC के प्रस्तावित Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026 हैं। करणी सेना और कुछ अन्य संगठनों का दावा है कि इन नियमों के कुछ प्रावधानों पर पुनर्विचार की आवश्यकता है। दूसरी ओर, UGC का उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में समान अवसर और समावेशी व्यवस्था को बढ़ावा देना बताया गया है। इस विषय पर अलग-अलग संगठनों और विशेषज्ञों की राय अलग-अलग है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
घटना के बाद प्रदेश की राजनीति में भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विपक्ष ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं, जबकि सरकार समर्थक नेताओं का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है। फिलहाल राज्य सरकार की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान का इंतजार है।
आगे क्या?
करणी सेना ने संकेत दिए हैं कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया तो प्रदेशभर में आंदोलन का विस्तार किया जा सकता है। प्रशासन भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है और भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की जा सकती है।
निष्कर्ष
जयपुर में हुई यह घटना केवल एक विरोध प्रदर्शन तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने UGC के नए नियमों, पुलिस कार्रवाई और लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार पर भी बहस छेड़ दी है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार, UGC और प्रदर्शनकारी संगठनों के बीच आगे क्या संवाद होता है और इस विवाद का समाधान किस दिशा में जाता है.

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