जैसलमेर में 9 साल के बच्चे में मिला दुर्लभ “स्टोन मैन सिंड्रोम”, शरीर के टिश्यू बन रहे हैं हड्डी
- bykrish rathore
- 13 March, 2026
राजस्थान के जैसलमेर जिले में एक बेहद दुर्लभ और गंभीर बीमारी का मामला सामने आया है। यहां 9 साल के एक बच्चे को स्टोन मैन सिंड्रोम नामक दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी से पीड़ित पाया गया है। इस बीमारी को चिकित्सा भाषा में फाइब्रोडिस्प्लेसिया ओसिफिकन्स प्रोग्रेसिवा (FOP) कहा जाता है। यह बीमारी इतनी दुर्लभ है कि दुनिया भर में इसके बहुत ही कम मामले दर्ज किए गए हैं।
डॉक्टरों के अनुसार इस बीमारी में शरीर के सॉफ्ट टिश्यू जैसे मांसपेशियां, लिगामेंट और टेंडन धीरे-धीरे हड्डियों में बदलने लगते हैं। समय के साथ-साथ यह प्रक्रिया शरीर की गतिविधियों को सीमित कर देती है और मरीज के लिए सामान्य रूप से चलना-फिरना भी मुश्किल हो जाता है।
बताया जा रहा है कि बच्चे के शरीर में असामान्य सूजन और कठोरता की शिकायत के बाद उसे जांच के लिए डॉक्टरों के पास ले जाया गया। विस्तृत मेडिकल जांच और विशेषज्ञों की राय के बाद पता चला कि वह FOP (Fibrodysplasia Ossificans Progressiva) नामक बीमारी से पीड़ित है।
चिकित्सकों ने स्थानीय स्वास्थ्यकर्मियों और डॉक्टरों को विशेष रूप से सावधान रहने की सलाह दी है। इस बीमारी में किसी भी प्रकार की सर्जरी, इंजेक्शन या आक्रामक इलाज स्थिति को और ज्यादा खराब कर सकता है। ऐसे उपचार शरीर में नई हड्डियों के बनने की प्रक्रिया को तेज कर सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल इस बीमारी का कोई स्थायी इलाज उपलब्ध नहीं है। हालांकि सही देखभाल, सावधानी और नियमित मेडिकल मॉनिटरिंग से मरीज की स्थिति को कुछ हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। इस बीमारी के मरीजों को चोट, मांसपेशियों पर दबाव और अनावश्यक मेडिकल प्रक्रियाओं से बचाने की सलाह दी जाती है।
स्टोन मैन सिंड्रोम को दुनिया की सबसे दुर्लभ आनुवंशिक बीमारियों में से एक माना जाता है। कई रिपोर्टों के अनुसार दुनिया में इसके लगभग 20 लाख लोगों में से केवल एक व्यक्ति को यह बीमारी होती है। इसलिए ऐसे मामलों की पहचान और सही प्रबंधन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
जैसलमेर में सामने आया यह मामला स्वास्थ्य विभाग के लिए भी चिंता का विषय बन गया है। स्थानीय डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को इस बीमारी के बारे में जानकारी दी जा रही है ताकि मरीज को किसी भी प्रकार के गलत उपचार से बचाया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि दुर्लभ बीमारियों के प्रति जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है। इससे समय पर सही निदान और सावधानी बरतकर मरीज की जीवन गुणवत्ता को बेहतर बनाया जा सकता है।
अगर समय रहते सही मेडिकल सलाह और देखभाल मिलती रहे, तो ऐसे मरीजों को बेहतर जीवन जीने में मदद मिल सकती है।

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40 के बाद शर्ट से बा...
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