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भारत को चांदी प्रसंस्करण बढ़ाने और आयात स्रोतों में विविधता लाने की जरूरत: GTRI की चेतावनी

भारत को चांदी प्रसंस्करण बढ़ाने और आयात स्रोतों में विविधता लाने की जरूरत: GTRI की चेतावनी

भारत की अर्थव्यवस्था सदियों से धातुओं के साथ आगे बढ़ी है—सोना, तांबा, लोहा और अब चांदी
वही चांदी, जो कभी केवल आभूषणों तक सीमित थी, आज सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, मेडिकल डिवाइसेज़ और इलेक्ट्रिक वाहनों की रीढ़ बन चुकी है।

इसी बदलते परिदृश्य में ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) ने एक सीधी, बिना लाग-लपेट की चेतावनी दी है—
👉 भारत को चांदी के प्रसंस्करण (Silver Processing) को तेज़ करना होगा और आयात के स्रोतों में विविधता लानी होगी, वरना भविष्य की रणनीतिक जरूरतें खतरे में पड़ सकती हैं।

🔍 भारत की चांदी पर बढ़ती निर्भरता

भारत दुनिया के सबसे बड़े चांदी उपभोक्ताओं में शामिल है।
लेकिन कड़वी सच्चाई ये है कि—

घरेलू उत्पादन बेहद सीमित है

उद्योग तेजी से बढ़ रहा है

आयात पर निर्भरता लगातार बढ़ रही है

आज भारत अपनी ज़रूरत की चांदी का बड़ा हिस्सा कुछ गिने-चुने देशों से मंगाता है।
ये रणनीति short term में चल सकती है, लेकिन long term में ये सीधा रिस्क है।

GTRI साफ कहता है:

“एक ही टोकरी में सारे अंडे रखना व्यापारिक आत्महत्या के बराबर है।”

⚙️ Silver Processing क्यों है गेम-चेंजर?

भारत अभी ज़्यादातर कच्ची या अर्ध-प्रसंस्कृत चांदी आयात करता है।
मतलब—

वैल्यू एडिशन बाहर होता है

रोजगार बाहर बनते हैं

टेक्नोलॉजी बाहर रहती है

अगर भारत में ही—

रिफाइनिंग

एलॉय प्रोसेसिंग

इंडस्ट्रियल ग्रेड सिल्वर मैन्युफैक्चरिंग

शुरू हो जाए, तो:

✔ आयात बिल घटेगा
✔ मेक इन इंडिया को बूस्ट मिलेगा
✔ रणनीतिक आत्मनिर्भरता बनेगी

पुराने ज़माने में भारत कारीगरी के लिए जाना जाता था—अब वक्त है उसी विरासत को आधुनिक टेक्नोलॉजी से जोड़ने का।

🌞 सौर ऊर्जा और चांदी: अटूट रिश्ता

ग्रीन एनर्जी का सपना चांदी के बिना अधूरा है।

सोलर पैनल

फोटोवोल्टिक सेल

हाई-कंडक्टिविटी कॉम्पोनेंट

इन सबमें चांदी अनिवार्य है।
भारत जब नेट-ज़ीरो और ऊर्जा संक्रमण की बात करता है, तो उसे समझना होगा कि—

चांदी सिर्फ धातु नहीं, रणनीतिक संसाधन है।

🌍 आयात विविधीकरण क्यों ज़रूरी है?

GTRI के अनुसार:

भू-राजनीतिक तनाव

सप्लाई चेन डिसरप्शन

कीमतों में अचानक उछाल

ये सब खतरे तब बढ़ जाते हैं जब आयात सीमित देशों पर टिका हो।

समाधान साफ है—

नए देशों से व्यापार समझौते

लॉन्ग-टर्म सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट

स्ट्रैटेजिक रिज़र्व की योजना

ये पुराने जमाने की ट्रेड पॉलिसी नहीं, बल्कि आज की जियो-इकोनॉमिक सच्चाई है।

Diversify IT exports, reduce import duty, GTRI suggests - The Economic Times
भारत को चांदी प्रसंस्करण बढ़ाने और आयात स्रोतों में विविधता लाने की जरूरत: GTRI की चेतावनी

🏭 घरेलू उद्योगों के लिए सुनहरा मौका

अगर सरकार सही नीति लाए—

टैक्स इंसेंटिव

प्रोसेसिंग यूनिट्स के लिए सब्सिडी

रिसर्च और टेक्नोलॉजी सपोर्ट

तो भारत:

एशिया का सिल्वर प्रोसेसिंग हब बन सकता है

रोजगार पैदा कर सकता है

निर्यातक देश बन सकता है

सीधा-सीधा कहें तो—
👉 चांदी भारत के लिए अगला स्टील या तेल हो सकता है।

🧠 नीति निर्धारकों के लिए साफ संदेश

GTRI की रिपोर्ट कोई हवा में तीर नहीं है।
ये एक चेतावनी है, एक रोडमैप है।

अगर अभी कदम नहीं उठाए गए, तो:

आयात लागत बढ़ेगी

रणनीतिक निर्भरता गहरी होगी

ग्रीन ट्रांजिशन धीमा पड़ेगा

और अगर अभी सही फैसले लिए गए, तो—

भारत सिर्फ उपभोक्ता नहीं, नियंत्रक बनेगा।

निष्कर्ष

भारत एक मोड़ पर खड़ा है।
एक तरफ पुरानी आयात-आधारित सोच,
दूसरी तरफ आत्मनिर्भर, प्रोसेसिंग-फोकस्ड भविष्य।

चांदी की चमक सिर्फ आभूषणों में नहीं,
बल्कि नीति, उद्योग और दूरदर्शिता में होनी चाहिए।

अब फैसला भारत को करना है—
खरीदार बनना है या खिलाड़ी।


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