NCR में एक और फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, डायरेक्टर समेत 13 गिरफ्तार, विदेशी नागरिकों को ऐसे बनाते थे ठगी का शिकार
- byAman Prajapat
- 06 January, 2026
NCR की धरती एक बार फिर शर्मसार हुई है। चमकती इमारतों, कांच के ऑफिस और “कॉरपोरेट कल्चर” के पीछे चल रहा एक और फर्जी कॉल सेंटर पुलिस की रेड में बेनकाब हो गया। इस बार भी कहानी वही पुरानी, लेकिन अंदाज़ और जाल पहले से ज्यादा खतरनाक।
पुलिस ने डायरेक्टर समेत 13 आरोपियों को मौके से गिरफ्तार किया है। ये लोग खुद को मल्टीनेशनल कंपनी का टेक्निकल सपोर्ट स्टाफ बताकर विदेशी नागरिकों को निशाना बनाते थे। कॉल आती थी अमेरिका, कनाडा और यूरोप के लोगों के पास, आवाज़ में कॉन्फिडेंस, स्क्रिप्ट में डर और आखिर में — बैंक अकाउंट खाली।
🎭 बाहर से ऑफिस, अंदर से अपराध
जिस बिल्डिंग में यह कॉल सेंटर चल रहा था, बाहर से देखकर कोई अंदाज़ा नहीं लगा सकता था कि अंदर साइबर ठगी का पूरा कारखाना चल रहा है। रिसेप्शन, केबिन, हेडफोन, लैपटॉप, व्हाइटबोर्ड — सब कुछ बिल्कुल प्रोफेशनल।
लेकिन असल में यह नकली टेक सपोर्ट कंपनी थी, जिसका मकसद सिर्फ एक था —
👉 लोगों को डराना और उनसे पैसे ऐंठना।
☎️ ऐसे फंसाते थे शिकार
गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में जो खुलासे हुए, वो रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं। ठगी का पूरा प्रोसेस बिल्कुल स्क्रिप्टेड था:
पहले विदेशी नागरिकों को ईमेल या पॉप-अप भेजा जाता
मैसेज में लिखा होता — “Your system has been hacked”
डर के मारे जैसे ही पीड़ित कॉल करता
सामने बैठा एजेंट खुद को Microsoft या Apple का अधिकारी बताता
फिर सिस्टम में वायरस, डेटा चोरी और बैंक फ्रॉड का डर दिखाया जाता
समाधान के नाम पर रिमोट एक्सेस लिया जाता
और आखिर में — डॉलर में पेमेंट
ये कोई छोटा-मोटा खेल नहीं था। हर कॉल, हर शब्द, हर डर — सब ट्रेनिंग का हिस्सा था।
🧠 डायरेक्टर ही मास्टरमाइंड
इस पूरे गिरोह का सरगना कोई और नहीं बल्कि कॉल सेंटर का डायरेक्टर था। वही लोगों की भर्ती करता, स्क्रिप्ट बनवाता और पैसे का बंटवारा तय करता।
एजेंट्स को बाकायदा सिखाया जाता था:
कैसे आवाज़ में भरोसा पैदा करना है
कब गुस्सा दिखाना है
कब सहानुभूति जतानी है
साफ शब्दों में कहें तो — इमोशन से खेला जाता था।
🌍 विदेशी नागरिक क्यों होते हैं टारगेट?
इस सवाल का जवाब भी उतना ही कड़वा है।
विदेशी नागरिकों को इसलिए चुना जाता है क्योंकि:
वे भारतीय कानून तक आसानी से नहीं पहुँच पाते
उन्हें स्थानीय पुलिस सिस्टम की जानकारी नहीं होती
कई बार शर्म के मारे शिकायत भी नहीं करते
यही वजह है कि NCR जैसे इलाकों में ऐसे कॉल सेंटर बार-बार उग आते हैं, जैसे बरसात में कुकुरमुत्ते।
💻 पुलिस को कैसे लगी भनक?
साइबर सेल को कई दिनों से विदेशी एजेंसियों से इनपुट मिल रहा था। कॉल ट्रेसिंग, IP एड्रेस और फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन की जांच के बाद आखिरकार पुलिस ने रेड मारी।
रेड के दौरान:
कई लैपटॉप
हार्ड डिस्क
फर्जी स्क्रिप्ट
विदेशी नंबरों की लिस्ट
और बैंक डिटेल्स बरामद की गईं
मौके पर मौजूद सभी 13 लोगों को हिरासत में लिया गया।

⚖️ अब आगे क्या?
पुलिस के मुताबिक आरोपियों पर:
आईटी एक्ट
धोखाधड़ी
आपराधिक साजिश
जैसी गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया है।
जांच अभी जारी है और आशंका है कि इस नेटवर्क से और भी कॉल सेंटर जुड़े हो सकते हैं।
🪞 समाज के लिए आईना
ये मामला सिर्फ पुलिस कार्रवाई की खबर नहीं है, बल्कि समाज के लिए आईना है।
जहाँ एक तरफ युवा नौकरी की तलाश में भटक रहा है, वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग आसान पैसे के लालच में अपराध का हिस्सा बन रहे हैं।
सच यही है —
👉 कॉल सेंटर नहीं, यह डिजिटल लूट का अड्डा था।
👉 सूट-बूट में बैठे लोग, लेकिन हाथ खून से सने।
📢 आख़िरी बात
NCR में यह पहला मामला नहीं है और शायद आख़िरी भी नहीं। लेकिन हर बार की तरह, कानून की पकड़ देर-सवेर इन तक पहुँच ही जाती है।
आज 13 गिरफ्तार हुए हैं, कल शायद 30 होंगे।
पर सवाल वही रहेगा —
क्या लालच की ये फैक्ट्री कभी बंद होगी?
जब तक जवाब “नहीं” है, तब तक ऐसी खबरें आती रहेंगी।
कड़वी हैं, लेकिन सच हैं।
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राजस्थान में अपराधों...
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