MP में रक्षक बना भक्षक: झबुआ पुलिस लाइन में 8 साल की मासूम से दरिंदगी, वर्दी पर लगा कलंक
- byAman Prajapat
- 12 January, 2026
मध्य प्रदेश से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने इंसानियत, सिस्टम और वर्दी—तीनों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। झबुआ जिले की पुलिस लाइन, जिसे सुरक्षा और भरोसे की सबसे मजबूत दीवार माना जाता है, वहीं एक 8 साल की मासूम बच्ची के साथ शर्मनाक हरकत की गई।
जिस जगह पर कानून की रखवाली होती है, उसी जगह कानून को कुचला गया। और यह बात जितनी सुनने में भारी है, हकीकत में उससे कहीं ज़्यादा डरावनी।
🔴 घटना क्या है?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, झबुआ पुलिस लाइन परिसर में रहने वाली 8 साल की बच्ची के साथ एक व्यक्ति ने अश्लील हरकत की। बच्ची इतनी छोटी थी कि उसे यह भी ठीक से समझ नहीं आया कि उसके साथ क्या गलत हुआ है। लेकिन मासूम की खामोशी ज्यादा देर टिक नहीं पाई—उसकी हालत और व्यवहार ने परिवार को सच का एहसास करा दिया।
यहीं से कहानी ने करवट ली।
🔴 परिवार का टूटता भरोसा
जब बच्ची ने हिम्मत करके पूरी बात बताई, तो परिवार के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। जिस पुलिस लाइन को वे सबसे सुरक्षित मानते थे, वही जगह उनकी बच्ची के लिए सबसे खतरनाक साबित हुई।
परिजनों ने तुरंत पुलिस अधिकारियों को सूचना दी। मामला सामने आते ही हड़कंप मच गया। सवाल सिर्फ एक अपराध का नहीं था—सवाल पूरे सिस्टम की साख का था।
🔴 आरोपी की गिरफ्तारी
पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तत्काल कार्रवाई की। आरोपी को हिरासत में लिया गया और पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया गया। उसके खिलाफ POCSO एक्ट समेत अन्य गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया है।
यह साफ कर दिया गया है कि आरोपी चाहे कोई भी हो, कानून से ऊपर नहीं है।
🔴 POCSO एक्ट के तहत कार्रवाई
इस मामले में बाल संरक्षण कानून यानी POCSO Act के तहत सख्त धाराएं लगाई गई हैं। कानून साफ कहता है—बच्चों के खिलाफ अपराध करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।
और यही होना भी चाहिए।
🔴 वर्दी पर लगा दाग
इस घटना ने एक बार फिर उस कड़वे सच को उजागर कर दिया है कि सिर्फ वर्दी पहन लेने से कोई रक्षक नहीं बन जाता। जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो समाज का भरोसा टूटता है।
यह मामला सिर्फ झबुआ का नहीं है। यह पूरे सिस्टम के लिए चेतावनी है।
🔴 प्रशासन की प्रतिक्रिया
पुलिस प्रशासन का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दोषी पाए जाने पर आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाएगी।
लेकिन जनता पूछ रही है—
क्या सिर्फ बयान काफी हैं? या अब सच में बदलाव आएगा?
🔴 समाज के लिए बड़ा सवाल
आज सवाल यह नहीं है कि आरोपी कौन था। सवाल यह है कि
बच्चों की सुरक्षा आखिर कहां है?
क्या हम सिर्फ घटना के बाद जागते रहेंगे?
क्या भरोसा सिर्फ कागज़ों तक सीमित रह गया है?
एक 8 साल की बच्ची की दुनिया इस घटना से हमेशा के लिए बदल गई। उसके ज़हन में बैठा डर किसी गिरफ्तारी से मिट नहीं सकता।

🔴 सच बोलना ज़रूरी है
इस तरह की खबरें पढ़ना आसान नहीं होता। लेकिन इन्हें दबाना और भूल जाना उससे भी बड़ा अपराध है। सच सामने आएगा तभी सिस्टम शर्मिंदा होगा, और शर्म आएगी तभी बदलाव होगा।
🔴 आखिरी बात
यह खबर सिर्फ एक अपराध की नहीं, एक चेतावनी की है।
अगर रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो समाज को खुद रक्षक बनना पड़ेगा।
आज झबुआ की उस मासूम के लिए इंसाफ की लड़ाई शुरू हुई है।
और यह लड़ाई सिर्फ उसकी नहीं—हम सबकी है।
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राजस्थान में अपराधों...
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