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खजाने के बंटवारे का फॉर्मूला बदला: हिंदी राज्यों को झटका, दक्षिण भारत को फायदा

खजाने के बंटवारे का फॉर्मूला बदला: हिंदी राज्यों को झटका, दक्षिण भारत को फायदा

खजाने के बंटवारे का फॉर्मूला बदला: हिंदी राज्यों को बड़ा झटका, दक्षिण भारत पर केंद्र की मेहरबानी

Union Budget 2026 में केंद्र सरकार ने राज्यों को मिलने वाले टैक्स राजस्व के वितरण का तरीका बदल दिया है। 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों को लागू करते हुए इस बार टैक्स बंटवारे में बड़ा फेरबदल किया गया है। इसका सीधा असर देश के हिंदी भाषी राज्यों और दक्षिण भारत के राज्यों पर पड़ा है।

दक्षिण भारत को क्यों मिला फायदा?

नए फॉर्मूले के तहत कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की हिस्सेदारी बढ़ाई गई है। इन राज्यों का तर्क लंबे समय से रहा है कि वे केंद्र सरकार को ज्यादा टैक्स देते हैं, लेकिन बदले में उन्हें अपेक्षाकृत कम धनराशि मिलती थी।

हिंदी पट्टी की हिस्सेदारी में कटौती

वहीं उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान जैसे बड़े हिंदी भाषी राज्यों की टैक्स हिस्सेदारी में कमी की गई है। इन राज्यों की जनसंख्या अधिक है और विकास संबंधी जरूरतें भी ज्यादा हैं, ऐसे में इस फैसले को लेकर चिंता जताई जा रही है।

नया फॉर्मूला क्या कहता है?

सूत्रों के मुताबिक, इस बार:

टैक्स योगदान को ज्यादा महत्व

आर्थिक प्रदर्शन और राजस्व संग्रह को प्राथमिकता

वित्तीय अनुशासन को बड़ा पैमाना

बनाया गया है। जनसंख्या आधारित वेटेज को पहले की तुलना में कम किया गया है।

राजनीतिक घमासान तेज

बजट के बाद कई हिंदी राज्यों के नेताओं ने इस बदलाव को अनुचित बताया है, जबकि दक्षिणी राज्यों ने इसे संतुलित और न्यायपूर्ण फैसला करार दिया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बना रह सकता है।

विशेषज्ञों की राय

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यह बदलाव:

राज्यों को बेहतर टैक्स कलेक्शन के लिए प्रेरित करेगा

केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों को नया आकार देगा

और राजकोषीय संघवाद की दिशा तय करेगा


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