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“10 महीने सरकार के प्रदूषण नियंत्रण उपायों का मूल्यांकन करने के लिए कम हैं” — प्रदूषण पर बोले BJP सांसद मनोज तिवारी

“10 महीने सरकार के प्रदूषण नियंत्रण उपायों का मूल्यांकन करने के लिए कम हैं” — प्रदूषण पर बोले BJP सांसद मनोज तिवारी

दिल्ली की हवा हो या देश की राजनीति—दोनों में शोर बहुत है, धैर्य कम। ऐसे में बीजेपी सांसद और मशहूर अभिनेता-गायक मनोज तिवारी का बयान एक ठहराव जैसा है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि किसी भी सरकार के प्रदूषण नियंत्रण उपायों का मूल्यांकन सिर्फ 10 महीनों में करना नाइंसाफी है

उनका ये बयान ऐसे वक्त आया है जब विपक्ष लगातार केंद्र सरकार पर पर्यावरण को लेकर सवाल दाग रहा है—कभी स्मॉग को लेकर, कभी AQI को लेकर, तो कभी नीतियों की नीयत पर।

मनोज तिवारी का कहना है कि पर्यावरण कोई स्विच नहीं है जिसे ऑन-ऑफ कर दिया जाए। ये सदियों का बिगड़ा हुआ संतुलन है, जिसे सुधारने में वक्त लगता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए कई दीर्घकालिक योजनाएं शुरू की हैं, जिनका असर धीरे-धीरे ज़मीन पर दिखेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि पिछली सरकारों ने वर्षों तक इस मुद्दे को नजरअंदाज किया और अब जब मौजूदा सरकार ठोस कदम उठा रही है, तो उसे समय से पहले कटघरे में खड़ा करना राजनीतिक जल्दबाज़ी के अलावा कुछ नहीं है।

🌱 सरकार के कदम क्या हैं?

मनोज तिवारी ने इशारों में कई योजनाओं की तरफ ध्यान दिलाया—

राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम

इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा

पराली जलाने पर नियंत्रण

औद्योगिक प्रदूषण पर सख्ती

हरित ऊर्जा की ओर झुकाव

उनका मानना है कि ये सभी कदम तुरंत चमत्कार नहीं करते, लेकिन लंबे समय में असर दिखाते हैं।

🏛️ राजनीतिक तकरार या पर्यावरण की चिंता?

मनोज तिवारी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदूषण जैसे गंभीर मुद्दे को भी राजनीतिक हथियार बना दिया गया है। उन्होंने कहा कि अगर सच में पर्यावरण की चिंता होती, तो सभी दल मिलकर समाधान पर बात करते, न कि बयानबाज़ी करते।

उनके शब्दों में—“पर्यावरण चुनावी पोस्टर नहीं है, ये आने वाली पीढ़ियों की सांस है।”
और सच कहें तो, इस लाइन में दम है।

Contempt case: SC asks BJP leader Manoj Tiwari to appear before it
“10 महीने सरकार के प्रदूषण नियंत्रण उपायों का मूल्यांकन करने के लिए कम हैं” — प्रदूषण पर बोले BJP सांसद मनोज तिवारी

🌍 जनता की भूमिका भी अहम

उन्होंने सिर्फ सरकार की नहीं, बल्कि आम जनता की जिम्मेदारी की भी बात की। साफ कहा—अगर लोग खुद नियम नहीं मानेंगे, तो कोई नीति सफल नहीं होगी।
कूड़ा जलाना, अनावश्यक वाहन चलाना, पेड़ों की कटाई—ये सब आदतें बदले बिना हालात नहीं सुधरेंगे।

🔍 विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

पर्यावरण विशेषज्ञ भी मानते हैं कि प्रदूषण नियंत्रण एक लंबी लड़ाई है। नीतियों का असर आंकड़ों में दिखने में समय लगता है। इसलिए 10 महीने का पैमाना वैज्ञानिक और व्यावहारिक दोनों ही दृष्टि से कमजोर माना जाता है।

✍️ निष्कर्ष

मनोज तिवारी का बयान सिर्फ एक राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि एक रियलिटी चेक है। प्रदूषण कोई इंस्टेंट नूडल्स नहीं है जो दो मिनट में तैयार हो जाए।
सरकार की नीतियों पर सवाल होना चाहिए—लेकिन समय और समझ के साथ

आज ज़रूरत है शोर कम करने की, और सांस लेने लायक भविष्य पर मिलकर काम करने की।
बाकी, हवा सब याद रखती है। 🌬️


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