वैश्विक संकेतों की चमक में चांदी का रिकॉर्ड उछाल, फ्यूचर्स ट्रेड में ₹3 लाख प्रति किलो के पार
- byAman Prajapat
- 19 January, 2026
कभी दादी के संदूक में खनकती चांदी आज ग्लोबल ट्रेडिंग स्क्रीन पर आग उगल रही है। वक्त बदलता है, पर धातुओं की कहानी वही रहती है—जब दुनिया डगमगाती है, चांदी चमक उठती है। और इस बार चमक कुछ ज़्यादा ही तेज़ है।
फ्यूचर्स बाजार में चांदी ने ₹3 लाख प्रति किलो का ऐतिहासिक आंकड़ा पार कर लिया है। सीधा-सादा मतलब? जिसने सही वक्त पर भरोसा किया, उसके हाथ सोने… नहीं, चांदी से भी भारी हो गए।
🌍 वैश्विक संकेतों का असर
दुनिया की अर्थव्यवस्था इस वक्त एक अजीब मोड़ पर खड़ी है।
अमेरिका और यूरोप में ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता
डॉलर में उतार-चढ़ाव
भू-राजनीतिक तनाव
और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग
इन सबका सीधा असर पड़ा है कीमती धातुओं पर। सोना तो हमेशा से राजा रहा है, लेकिन इस बार चांदी ने बगावत कर दी। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चांदी की कीमतों में आई मजबूती ने भारतीय फ्यूचर्स बाजार को भी ऊपर की ओर धकेल दिया।
📈 फ्यूचर्स मार्केट में रिकॉर्ड
कमोडिटी एक्सचेंज में जैसे ही ट्रेडिंग शुरू हुई, चांदी ने बिना किसी झिझक के ₹3 लाख प्रति किलो का स्तर तोड़ दिया। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि बाजार की सोच का आईना है।
निवेशक अब सिर्फ रिटर्न नहीं, सुरक्षा भी चाहते हैं। और चांदी इस वक्त दोनों दे रही है।
💼 निवेशकों की बदली रणनीति
आज का निवेशक पुराने ज़माने वाला नहीं रहा।
इक्विटी में रिस्क ज़्यादा
क्रिप्टो में भरोसा कम
रियल एस्टेट में पूंजी फंसी हुई
ऐसे में चांदी एक संतुलित विकल्प बनकर उभरी है। कम कीमत से शुरू होकर अब ऊंचाइयों को छूना—ये कहानी निवेशकों को लुभा रही है।
🏭 औद्योगिक मांग भी बनी सहारा
चांदी सिर्फ गहनों तक सीमित नहीं है।
इलेक्ट्रिक व्हीकल
सोलर पैनल
इलेक्ट्रॉनिक्स
मेडिकल उपकरण
इन सभी में चांदी की मांग लगातार बढ़ रही है। यानी यह सिर्फ भावनाओं का खेल नहीं, ठोस मांग का असर भी है। जब इंडस्ट्री बोले, तो बाजार सुनता है।
🇮🇳 भारतीय बाजार पर प्रभाव
भारत में चांदी का सांस्कृतिक और आर्थिक दोनों महत्व है।
शादी-ब्याह से लेकर पूजा-पाठ तक, चांदी हर जगह है। लेकिन अब आम खरीदार थोड़ा रुककर सोच रहा है। ऊंची कीमतों के कारण रिटेल मांग पर असर दिख सकता है, लेकिन निवेश मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है।

🔮 आगे क्या?
बाजार के जानकार साफ कहते हैं—
अगर वैश्विक हालात ऐसे ही बने रहे, तो चांदी की कीमतों में और उछाल संभव है। हालांकि मुनाफावसूली के दौर भी आएंगे। बाजार सीधा ऊपर नहीं जाता, ये पुराना सच है।
लेकिन एक बात तय है—चांदी अब हल्की धातु नहीं रही, न कीमत में, न महत्व में।
✍️ निष्कर्ष
पुरानी कहावत है—“जो वक्त को पहचान ले, वही बाज़ी मार ले।”
चांदी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि जब दुनिया अनिश्चित हो, तब धातुएं बोलती हैं। ₹3 लाख प्रति किलो का आंकड़ा सिर्फ खबर नहीं, यह एक संकेत है—कि बाजार में कहानी अभी बाकी है।
सीधे शब्दों में कहें तो:
चांदी अभी थमी नहीं है, बस सांस ले रही है।
और जब अगली छलांग लगेगी, तो शोर और भी बड़ा होगा।
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जयपुर मे सोने और चां...
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