राजस्थान में TB स्क्रीनिंग से बड़ी तस्वीर सामने आई, 22.8 लाख की जांच में 2.8 लाख मामले मिले
- bySanjay
- 12 September, 2026
राजस्थान में TB स्क्रीनिंग से बड़ी तस्वीर सामने आई, 22.8 लाख लोगों की जांच में 2.8 लाख मामले मिले
राजस्थान में टीबी यानी ट्यूबरकुलोसिस (TB) को लेकर चलाए गए व्यापक स्क्रीनिंग अभियान में बड़ी संख्या में मामलों की पहचान हुई है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 7 दिसंबर 2024 से 23 अगस्त 2026 के बीच राज्य में करीब 22.8 लाख लोगों की TB स्क्रीनिंग की गई। इनमें लगभग 2.8 लाख लोगों में TB की पुष्टि हुई। यह आंकड़ा करीब 12 प्रतिशत पॉजिटिविटी रेट के बराबर है।
कमजोर और हाई-रिस्क समूहों पर रहा खास फोकस
स्क्रीनिंग अभियान का मुख्य उद्देश्य ऐसे मरीजों की पहचान करना था, जिनमें बीमारी के लक्षण स्पष्ट नहीं थे या जो स्वास्थ्य सेवाओं तक आसानी से नहीं पहुंच पा रहे थे। इसके तहत स्वास्थ्य टीमों ने खास तौर पर HIV/AIDS से प्रभावित लोगों, डायबिटीज मरीजों, 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों, कुपोषित लोगों, धूम्रपान करने वालों, शराब का सेवन करने वाले लोगों, प्रवासी मजदूरों, आदिवासी समुदायों और पहले TB से प्रभावित रह चुके लोगों पर ध्यान दिया।
कई स्थानों पर घर-घर जाकर स्क्रीनिंग के साथ-साथ ऐसे क्षेत्रों में भी अभियान चलाया गया जहां संक्रमण का जोखिम ज्यादा माना जाता है। इनमें निर्माण स्थल, खनन क्षेत्र, शहरी झुग्गियां और अन्य संवेदनशील आबादी वाले क्षेत्र शामिल रहे।
12 फीसदी पॉजिटिविटी रेट ने बढ़ाई चिंता
22.8 लाख लोगों की जांच में 2.8 लाख TB मामलों की पहचान होना बताता है कि लक्षित हाई-रिस्क आबादी में बीमारी का पता लगाने के लिए सक्रिय स्क्रीनिंग कितनी महत्वपूर्ण है। राजस्थान की TB पॉजिटिविटी दर इस अवधि में करीब 12 प्रतिशत रही और राज्य इस मामले में राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों की सूची में 12वें स्थान पर रहा।
तुलना के तौर पर, इसी रिपोर्ट में दिल्ली की पॉजिटिविटी दर करीब 42 प्रतिशत, बिहार की 33 प्रतिशत और पंजाब की 29 प्रतिशत बताई गई है।
बीमारी के छिपे मामलों की पहचान पर जोर
TB उन्मूलन के प्रयासों में केवल अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों की जांच के बजाय ऐसे लोगों तक पहुंचना भी महत्वपूर्ण है जिनमें बीमारी मौजूद हो सकती है लेकिन वे इलाज के लिए स्वास्थ्य केंद्र नहीं पहुंच रहे। इसी वजह से सरकार की रणनीति में सक्रिय केस-फाइंडिंग और शुरुआती पहचान को महत्व दिया जा रहा है।
केंद्र सरकार के अनुसार, दिसंबर 2024 में शुरू हुए TB Mukt Bharat अभियान के तहत देशभर में कमजोर आबादी की बड़े स्तर पर स्क्रीनिंग की गई है और नई तकनीकों, AI-सक्षम एक्स-रे तथा अन्य जांच सुविधाओं का इस्तेमाल बढ़ाया गया है।
समय पर जांच और इलाज क्यों जरूरी?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए इस तरह की स्क्रीनिंग का महत्व इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि TB की शुरुआती पहचान होने पर मरीज को समय पर उपचार उपलब्ध कराया जा सकता है। साथ ही, संक्रमित व्यक्ति की पहचान होने से उसके संपर्क में आने वाले लोगों की जांच और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में भी कदम उठाए जा सकते हैं।
राजस्थान में स्वास्थ्य विभाग TB की रोकथाम, जांच और उपचार से जुड़ी गतिविधियों को राष्ट्रीय कार्यक्रमों के तहत आगे बढ़ा रहा है। राज्य के स्वास्थ्य विभाग की वेबसाइट पर भी TB से जुड़े कार्यक्रमों और जिला स्तर की स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी उपलब्ध है।
अभियान से क्या संकेत मिलता है?
राजस्थान में सामने आया यह आंकड़ा एक तरफ TB के छिपे मामलों की पहचान में स्क्रीनिंग अभियान की भूमिका दिखाता है, तो दूसरी तरफ यह भी बताता है कि हाई-रिस्क आबादी तक लगातार स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना जरूरी है। विशेषज्ञों के मुताबिक, केवल बीमारी की पहचान ही पर्याप्त नहीं है; समय पर इलाज शुरू होना, इलाज पूरा करना और मरीजों को आवश्यक पोषण एवं सामाजिक सहायता मिलना भी TB नियंत्रण के लिए अहम है।
देश में TB के खिलाफ अभियान के दौरान उपचार और केस-डिटेक्शन को मजबूत करने के लिए नई तकनीकों का इस्तेमाल भी बढ़ाया जा रहा है। केंद्र सरकार के अनुसार, भारत में 2024 तक TB की वार्षिक incidence दर में 2015 की तुलना में 21 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई थी।
राजस्थान में 22.8 लाख लोगों की स्क्रीनिंग और करीब 2.8 लाख मामलों की पहचान का आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे राज्य में सक्रिय स्क्रीनिंग, शुरुआती पहचान और समय पर उपचार की जरूरत एक बार फिर सामने आती है।
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