पचपदरा रिफाइनरी विवाद: मोदी दौरे से पहले अशोक गहलोत का BJP पर 7 साल की देरी का आरोप
- bykrish rathore
- 09 April, 2026
राजस्थान में बाड़मेर स्थित पचपदरा रिफाइनरी को लेकर सियासी विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। नरेंद्र मोदी के 21 अप्रैल को प्रस्तावित दौरे से पहले, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। गहलोत का कहना है कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना में करीब 7 साल की देरी हुई, जिसके कारण इसकी लागत ₹37,000 करोड़ से बढ़कर लगभग ₹80,000 करोड़ तक पहुंच गई।
पचपदरा रिफाइनरी राजस्थान के सबसे बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट्स में से एक है, जिसे राज्य के आर्थिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस परियोजना से न केवल रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है, बल्कि पश्चिमी राजस्थान, खासकर मारवाड़ क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को भी नया बढ़ावा मिलेगा। हालांकि, इस प्रोजेक्ट को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है।
अशोक गहलोत ने आरोप लगाया कि उनकी सरकार के दौरान इस परियोजना की नींव रखी गई थी और इसे तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा था, लेकिन सरकार बदलने के बाद कार्य में धीमापन आया। उनके अनुसार, देरी के चलते न केवल परियोजना की लागत बढ़ी, बल्कि राज्य को संभावित आर्थिक लाभ भी देर से मिलेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अगर समय पर काम पूरा हो जाता, तो राजस्थान को पहले ही बड़े पैमाने पर निवेश और रोजगार का फायदा मिल सकता था।
वहीं, BJP सरकार इन आरोपों को खारिज करते हुए दावा कर रही है कि परियोजना को बेहतर तकनीक और विस्तारित क्षमता के साथ विकसित किया गया है, जिसके कारण लागत में वृद्धि हुई है। सरकार का कहना है कि यह निवेश भविष्य में राज्य के लिए अधिक लाभकारी साबित होगा और यह रिफाइनरी राजस्थान की अर्थव्यवस्था के लिए “लाइफलाइन” साबित होगी।
राजनीतिक विवाद के बीच, आम जनता की नजर इस बात पर है कि यह परियोजना कब पूरी तरह से शुरू होगी और इसका वास्तविक लाभ कब तक देखने को मिलेगा। बाड़मेर और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को उम्मीद है कि रिफाइनरी के चालू होने से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और क्षेत्र में बुनियादी ढांचे का विकास तेज होगा।
नरेंद्र मोदी का आगामी दौरा इस परियोजना के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। इस दौरान रिफाइनरी को राष्ट्र को समर्पित किया जा सकता है, जिससे यह मुद्दा और अधिक राजनीतिक और आर्थिक चर्चा का केंद्र बन गया है।
अंत में, पचपदरा रिफाइनरी केवल एक औद्योगिक परियोजना नहीं, बल्कि राजस्थान की विकास यात्रा का अहम हिस्सा है। हालांकि, इसकी देरी और लागत बढ़ोतरी को लेकर उठे सवाल यह दर्शाते हैं कि बड़े प्रोजेक्ट्स में समय और संसाधनों का प्रबंधन कितना महत्वपूर्ण होता है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह परियोजना राज्य की अर्थव्यवस्था को किस हद तक मजबूती देती है।

Note: Content and images are for informational use only. For any concerns, contact us at info@rajasthaninews.com.
जीणमाता मंदिर के पट...
Related Post
Hot Categories
Recent News
Daily Newsletter
Get all the top stories from Blogs to keep track.









