लगातार केमिकल हेयर स्ट्रेटनिंग से बढ़ सकता है बच्चेदानी के कैंसर का खतरा, ऑन्कोलॉजिस्ट की गंभीर चेतावनी
- byAman Prajapat
- 02 January, 2026
सीधे बाल आज के ज़माने में सिर्फ एक स्टाइल नहीं, बल्कि सोशल स्टेटस बन चुके हैं। इंस्टाग्राम रील्स हों, शादी-पार्टी हो या ऑफिस मीटिंग — हर जगह “परफेक्ट, स्लीक और शाइनी हेयर” का क्रेज़ है। लेकिन इसी चमक के पीछे एक स्याह सच्चाई छुपी है, जिसे अब डॉक्टर भी नज़रअंदाज़ नहीं कर रहे।
देश-विदेश के जाने-माने ऑन्कोलॉजिस्ट्स और मेडिकल रिसर्चर्स ने चेतावनी दी है कि बार-बार केमिकल हेयर स्ट्रेटनिंग कराने वाली महिलाओं में यूटराइन कैंसर यानी बच्चेदानी के कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। यह चेतावनी सिर्फ हवा-हवाई नहीं है, बल्कि हालिया वैज्ञानिक अध्ययनों और मेडिकल डेटा पर आधारित है।
⚠️ केमिकल स्ट्रेटनिंग आखिर है क्या?
हेयर स्ट्रेटनिंग की प्रक्रिया में ऐसे केमिकल्स का इस्तेमाल होता है जो बालों की प्राकृतिक संरचना को तोड़ देते हैं। इनमें मुख्य रूप से शामिल होते हैं:
फॉर्मल्डिहाइड
पैराबेन्स
फ्थेलेट्स
हार्मोन डिसरप्टिंग केमिकल्स
ये तत्व सिर्फ बालों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि स्कैल्प के जरिए शरीर में प्रवेश कर जाते हैं।
🧬 कैंसर से क्या कनेक्शन है?
ऑन्कोलॉजिस्ट्स के मुताबिक, ये केमिकल्स शरीर के हार्मोनल सिस्टम को बिगाड़ सकते हैं। बच्चेदानी सीधे हार्मोन्स पर निर्भर करती है। जब लंबे समय तक हार्मोनल असंतुलन बना रहता है, तो कैंसर सेल्स के विकसित होने की संभावना बढ़ जाती है।
एक वरिष्ठ कैंसर विशेषज्ञ के अनुसार:
“जो महिलाएं साल में कई बार केमिकल हेयर ट्रीटमेंट कराती हैं, उनमें यूटराइन कैंसर का रिस्क सामान्य महिलाओं की तुलना में कहीं ज़्यादा पाया गया है।”
📊 रिसर्च क्या कहती है?
अमेरिका और यूरोप में की गई कई मेडिकल स्टडीज़ में पाया गया है कि:
4–5 साल तक नियमित स्ट्रेटनिंग कराने वाली महिलाओं में कैंसर का खतरा 2 से 3 गुना तक बढ़ सकता है
खासतौर पर 30 से 55 वर्ष की महिलाएं ज्यादा संवेदनशील पाई गईं
जो महिलाएं पहले से हार्मोनल समस्याओं से जूझ रही हैं, उनके लिए खतरा और ज्यादा है
🚺 बच्चेदानी के कैंसर के शुरुआती लक्षण
सबसे खतरनाक बात ये है कि शुरुआती स्टेज में इसके लक्षण बहुत हल्के होते हैं:
अनियमित पीरियड्स
असामान्य ब्लीडिंग
पेट के निचले हिस्से में दर्द
थकान और कमजोरी
वजन अचानक कम होना
अक्सर महिलाएं इन्हें सामान्य समझकर टाल देती हैं, और यहीं से मामला बिगड़ता है।
💄 ब्यूटी इंडस्ट्री पर उठते सवाल
यह सवाल अब ज़ोर पकड़ रहा है कि क्या ब्यूटी इंडस्ट्री महिलाओं की सेहत से ज़्यादा मुनाफे को अहमियत दे रही है?
कई प्रोडक्ट्स पर “हर्बल” और “सेफ” लिखा होता है, लेकिन अंदर छुपे केमिकल्स की सच्चाई लेबल पर साफ नहीं बताई जाती।

🌿 क्या है सुरक्षित विकल्प?
डॉक्टर्स और हेल्थ एक्सपर्ट्स सलाह दे रहे हैं:
बार-बार केमिकल ट्रीटमेंट से बचें
नैचुरल हेयर केयर अपनाएं
बालों को जैसा है वैसा स्वीकार करें
ज़रूरत पड़े तो हीट-फ्री स्टाइलिंग चुनें
साल में कम से कम एक बार हेल्थ चेकअप ज़रूर कराएं
🧠 सोच बदलने का वक्त
पुराने ज़माने में महिलाएं अपने बालों को उनकी प्राकृतिक खूबसूरती के साथ अपनाती थीं। आज हम केमिकल्स से खुद को बदलने की होड़ में अपनी सेहत को दांव पर लगा रहे हैं।
सीधी बात — स्टाइल जरूरी है, लेकिन जान उससे भी ज़्यादा।
🛑 डॉक्टरों की अंतिम चेतावनी
ऑन्कोलॉजिस्ट्स साफ कह रहे हैं:
“खूबसूरती कुछ दिनों की होती है, लेकिन कैंसर जिंदगी भर का बोझ बन सकता है।”
अब फैसला हमारे हाथ में है —
केमिकल्स या सेहत?
Note: Content and images are for informational use only. For any concerns, contact us at info@rajasthaninews.com.
देखिए सुष्मिता सेन...
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