जयपुर की हवा पर दिवाली का खतरा! मानसरोवर-सितापुरा में AQI 200 पार, पटाखों के धुएं से बढ़ सकती है परेशानी
- bySanjay
- 05 November, 2026
जयपुर। गुलाबी नगरी जयपुर में दिवाली से पहले वायु प्रदूषण को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। साल 2026 के शुरुआती महीनों से लेकर मानसून तक शहर की हवा में कई बार सुधार देखने को मिला, लेकिन अब सर्दी की शुरुआत और दिवाली के नजदीक आने के साथ प्रदूषण का स्तर फिर बढ़ने लगा है। 5 नवंबर को सामने आए वायु गुणवत्ता के आंकड़ों ने शहर के अलग-अलग इलाकों में हवा की स्थिति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। खास बात यह है कि जयपुर के सभी क्षेत्रों में प्रदूषण का स्तर एक जैसा नहीं है। कुछ स्थानों पर हवा अपेक्षाकृत साफ रही, जबकि कई इलाकों में वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी तक पहुंच गई।
मानसरोवर, सीतापुरा और शास्त्री नगर में AQI 200 के पार

भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) के जयपुर एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम के 5 नवंबर शाम 5 बजे के आंकड़ों के अनुसार, मानसरोवर सेक्टर-12 में AQI 234 दर्ज किया गया। रीको सीतापुरा में यह 237 और शास्त्री नगर में 216 रहा। पुलिस कमिश्नरेट क्षेत्र में AQI 172, सेक्टर-2 मुरलीपुरा में 130 और आदर्श नगर में 73 दर्ज किया गया।
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि शहर के अलग-अलग हिस्सों में हवा की गुणवत्ता में अंतर है। जहां आदर्श नगर में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही, वहीं मानसरोवर, सीतापुरा और शास्त्री नगर में वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में दर्ज हुई। ऐसे में किसी एक इलाके के आंकड़े के आधार पर पूरे जयपुर की हवा को साफ या प्रदूषित बताना उचित नहीं होगा।
सालभर के आंकड़ों में राहत, लेकिन दिवाली से पहले फिर बढ़ी चिंता
उपलब्ध सालाना आंकड़ों के अनुसार, 1 जनवरी से 3 नवंबर 2026 के बीच जयपुर का AQI किसी भी दिन बहुत खराब या गंभीर श्रेणी तक नहीं पहुंचा। मानसून के महीनों में शहर की हवा की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही। जुलाई और अगस्त में कई दिनों तक AQI संतोषजनक श्रेणी में दर्ज किया गया।
हालांकि, साल के शुरुआती महीनों में प्रदूषण की स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं रही। जनवरी में छह दिन AQI 200 के पार गया और 7 जनवरी को अधिकतम स्तर 257 दर्ज किया गया था। सितंबर में भी कुछ दिनों तक हवा खराब श्रेणी में पहुंची। अब नवंबर की शुरुआत में कई निगरानी केंद्रों पर AQI 200 से ऊपर दर्ज होना बताता है कि मौसम और स्थानीय गतिविधियों के साथ हवा की गुणवत्ता में तेजी से बदलाव हो सकता है।
दिवाली पर पटाखों का धुआं बढ़ा सकता है प्रदूषण
दिवाली के दौरान पटाखों से निकलने वाला धुआं और सूक्ष्म कण हवा में प्रदूषण बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा सड़क यातायात, निर्माण गतिविधियां और धूल भी शहरी वायु प्रदूषण में योगदान देते हैं। ठंड के मौसम में हवा की गति कम होने और वातावरण में प्रदूषकों के फैलाव की स्थिति कमजोर पड़ने पर प्रदूषण लंबे समय तक बना रह सकता है।
विशेष चिंता PM2.5 और PM10 जैसे सूक्ष्म कणों को लेकर है। ये कण सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकते हैं और खासकर बच्चों, बुजुर्गों तथा पहले से सांस संबंधी परेशानी वाले लोगों के लिए दिक्कत पैदा कर सकते हैं।
प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने शुरू की विशेष निगरानी
दिवाली के दौरान प्रदूषण की स्थिति पर नजर रखने के लिए राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने विशेष निगरानी की व्यवस्था की है। मंडल की ओर से जयपुर समेत राज्य के कई शहरों में वायु गुणवत्ता की नियमित जांच की जा रही है।
जयपुर में 15 वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों को विशेष रूप से सक्रिय रखने की योजना बताई गई है। इसके तहत नौ मैनुअल और छह लगातार निगरानी करने वाले केंद्र शामिल हैं। इसके अतिरिक्त नवंबर के पहले पखवाड़े में PM10 और PM2.5 में मौजूद कुछ भारी धातुओं की जांच भी की जा रही है।
दिवाली के दौरान ध्वनि प्रदूषण पर नजर रखने के लिए जयपुर के सात स्थानों पर भी निगरानी की व्यवस्था की गई है। इनमें गांधीनगर, मानसरोवर, सिविल लाइंस, राजा पार्क, वीकेआई और सीतापुरा जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
AQI के छह स्तरों में समझें हवा की स्थिति
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों के अनुसार वायु गुणवत्ता सूचकांक को छह श्रेणियों में बांटा गया है:
0 से 50: अच्छा
51 से 100: संतोषजनक
101 से 200: मध्यम
201 से 300: खराब
301 से 400: बहुत खराब
401 से 500: गंभीर
AQI का आंकड़ा जितना अधिक होता है, हवा में प्रदूषण का स्तर और उससे स्वास्थ्य पर पड़ने वाला संभावित प्रभाव उतना ही अधिक हो सकता है।
साफ हवा के लिए नागरिकों की भागीदारी भी जरूरी
दिवाली के दौरान प्रदूषण को कम रखने के लिए नागरिकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। अनावश्यक वाहन उपयोग कम करना, कचरा नहीं जलाना, धूल फैलाने वाली गतिविधियों पर नियंत्रण रखना और पर्यावरण के अनुकूल उत्सव मनाना शहर की हवा को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकता है।
जयपुर में फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती यह है कि दिवाली के आसपास प्रदूषण का स्तर किस दिशा में जाता है। निगरानी केंद्रों के आंकड़े आने वाले दिनों में स्थिति को और स्पष्ट करेंगे। शहरवासियों के लिए जरूरी है कि वे अपने क्षेत्र की ताजा AQI स्थिति पर नजर रखें और हवा की गुणवत्ता खराब होने पर अनावश्यक रूप से लंबे समय तक खुले वातावरण में रहने से बचें।
निष्कर्ष: जयपुर की हवा ने मानसून के दौरान राहत जरूर दी, लेकिन दिवाली से पहले कई इलाकों में AQI का 200 पार पहुंचना चिंता का विषय है। आने वाले दिनों में पटाखों के धुएं, वाहनों और मौसम की परिस्थितियों का संयुक्त असर शहर की वायु गुणवत्ता के लिए अहम रहेगा।
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"इको-फ्रेंडली इनोवेश...
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