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Border Security: सीमा से 50 KM तक सोलर-विंड प्रोजेक्ट्स पर कड़ी निगरानी, नए सुरक्षा नियम जारी

Border Security: सीमा से 50 KM तक सोलर-विंड प्रोजेक्ट्स पर कड़ी निगरानी, नए सुरक्षा नियम जारी

Border Security: सीमा से 50 KM तक सोलर-विंड प्रोजेक्ट्स पर कड़ी निगरानी, सरकार ने जारी किए नए नियम

नई दिल्ली: देश के सीमावर्ती इलाकों में अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं को लेकर केंद्र सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त किया है। LoC, LAC और अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे क्षेत्रों में सोलर, विंड और हाइब्रिड एनर्जी प्रोजेक्ट्स के लिए नए सुरक्षा प्रावधान लागू किए गए हैं।

नए नियमों के तहत सीमा से लगे संवेदनशील इलाकों में किसी भी नई अक्षय ऊर्जा परियोजना को शुरू करने से पहले सुरक्षा पहलुओं का विशेष ध्यान रखना होगा। सरकार का उद्देश्य ऊर्जा परियोजनाओं के विकास के साथ-साथ देश की रणनीतिक और राष्ट्रीय सुरक्षा को भी सुनिश्चित करना है।

सीमा से 1 KM के दायरे में सख्ती

नए प्रावधानों के अनुसार, सीमा से 1 किलोमीटर के दायरे में नए सोलर, विंड या हाइब्रिड एनर्जी प्रोजेक्ट्स की गतिविधियों पर रोक का प्रावधान रखा गया है।

इस क्षेत्र को सुरक्षा की दृष्टि से अत्यधिक संवेदनशील माना जा रहा है। ऐसे इलाकों में किसी भी तरह के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर या ऊर्जा प्रोजेक्ट से पहले सुरक्षा एजेंसियों की मंजूरी महत्वपूर्ण होगी।

50 KM तक का इलाका संवेदनशील

सरकार ने सीमा से 50 किलोमीटर तक के क्षेत्र को भी संवेदनशील जोन के तौर पर चिन्हित किया है। इस क्षेत्र में अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं की योजना और निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा।

इसका मतलब है कि सीमा के नजदीक बड़े पैमाने पर सोलर और विंड प्रोजेक्ट लगाने वाली कंपनियों को अब सुरक्षा संबंधी नियमों और आवश्यक मंजूरियों का विशेष ध्यान रखना होगा।

सोलर और विंड प्रोजेक्ट्स पर क्यों बढ़ी निगरानी?

सीमावर्ती क्षेत्रों में बड़े सोलर पार्क, विंड टर्बाइन, ट्रांसमिशन लाइन और अन्य ऊर्जा ढांचा कई किलोमीटर तक फैला हो सकता है। ऐसे इंफ्रास्ट्रक्चर का रणनीतिक इलाकों में निर्माण सुरक्षा और निगरानी से जुड़े सवाल खड़े कर सकता है।

इसी वजह से सरकार ने ऊर्जा जरूरतों और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने के लिए नए नियमों पर जोर दिया है।

Renewable Energy सेक्टर पर क्या असर होगा?

भारत तेजी से सौर और पवन ऊर्जा क्षमता बढ़ा रहा है। सीमावर्ती राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों में भी अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं की संभावनाएं मौजूद हैं।

नए सुरक्षा नियमों से संवेदनशील इलाकों में कुछ परियोजनाओं की मंजूरी और निर्माण प्रक्रिया अधिक सावधानी के साथ करनी पड़ सकती है। वहीं, सामान्य क्षेत्रों में अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं के विस्तार पर इसका सीधा असर जरूरी नहीं है।

राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ ऊर्जा विकास पर फोकस

सरकार के सामने एक तरफ स्वच्छ ऊर्जा क्षमता बढ़ाने और दूसरी तरफ रणनीतिक क्षेत्रों की सुरक्षा बनाए रखने की चुनौती है। नए नियम इसी संतुलन को ध्यान में रखते हुए तैयार किए गए हैं।

सीमावर्ती क्षेत्रों में किसी भी ऊर्जा परियोजना को आगे बढ़ाने से पहले सुरक्षा जोखिमों का आकलन किया जाएगा। इससे संवेदनशील इलाकों में महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

नोट: किसी परियोजना की वास्तविक अनुमति उसके स्थान, परियोजना के प्रकार और संबंधित सुरक्षा/प्रशासनिक मंजूरियों पर निर्भर करेगी।

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