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AI की बढ़ती ताकत बनी नई मुसीबत! Data Centres खा रहे हैं भारी बिजली-पानी, दुनिया में बढ़ी चिंता

AI की बढ़ती ताकत बनी नई मुसीबत! Data Centres खा रहे हैं भारी बिजली-पानी, दुनिया में बढ़ी चिंता

AI का बढ़ता इस्तेमाल बना नई चिंता! Data Centres के लिए चाहिए भारी बिजली और पानी, दुनिया में उठ रहे सवाल

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। ChatGPT जैसे AI सिस्टम से लेकर AI-powered कंपनियों और सेवाओं तक, इसके पीछे बड़ी संख्या में Data Centres काम करते हैं। लेकिन इन डेटा सेंटरों की बढ़ती जरूरत अब बिजली और पानी की खपत को लेकर दुनियाभर में बहस का कारण बन रही है।

AI मॉडल को चलाने और उन्हें ट्रेन करने के लिए बड़ी संख्या में हाई-पावर कंप्यूटर और सर्वर की जरूरत होती है। इन मशीनों को लगातार चलाने के लिए भारी मात्रा में बिजली खर्च होती है। साथ ही सर्वर को गर्म होने से बचाने के लिए कई Data Centres में Cooling Systems का इस्तेमाल किया जाता है, जिनमें पानी की जरूरत भी हो सकती है।

यही वजह है कि कुछ इलाकों में नए Data Centres को लेकर स्थानीय लोगों और पर्यावरण समूहों की चिंताएं सामने आई हैं। सवाल यह उठ रहा है कि AI की तेज रफ्तार के साथ बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करते हुए पानी और बिजली जैसे प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव कैसे कम किया जाए।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में AI और Data Centre infrastructure की मांग और बढ़ सकती है। ऐसे में कंपनियों के लिए Renewable Energy, ज्यादा efficient chips और कम पानी इस्तेमाल करने वाली cooling technology पर काम करना महत्वपूर्ण होगा।

हालांकि AI को सिर्फ पर्यावरणीय चुनौती के रूप में देखना सही नहीं होगा। बेहतर तकनीक, ऊर्जा-कुशल Data Centres और Renewable Energy के इस्तेमाल से इसके environmental impact को कम करने की कोशिश भी की जा रही है।

यानी AI की असली चुनौती सिर्फ यह नहीं है कि वह कितना स्मार्ट बन रहा है, बल्कि यह भी है कि उसे चलाने के लिए कितनी ऊर्जा और संसाधनों की जरूरत पड़ेगी।


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