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राजस्थान में अनोखी होली परंपराएं, कहीं लट्ठमार तो कहीं पत्थरमार

राजस्थान में अनोखी होली परंपराएं, कहीं लट्ठमार तो कहीं पत्थरमार

राजस्थान में अनोखी होली की परंपराएं: कहीं लट्ठमार तो कहीं अंगारों और पत्थरों से खेली जाती है होली

जयपुर।
राजस्थान अपनी रंग-बिरंगी संस्कृति और अनूठी परंपराओं के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। होली के अवसर पर भी प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में ऐसी परंपराएं देखने को मिलती हैं, जो इसे खास बनाती हैं। यहां रंगों के साथ-साथ लट्ठमार, कोड़ामार, पत्थरमार और अंगारों की होली भी खेली जाती है, जो स्थानीय संस्कृति और लोक विश्वासों को दर्शाती हैं।

उदयपुर जिले के मेनार गांव में बारूद वाली होली की परंपरा काफी प्रसिद्ध है। यहां ग्रामीण पारंपरिक तरीके से बारूद का इस्तेमाल कर होली का उत्सव मनाते हैं, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं।

वहीं अजमेर जिले के भिनाय क्षेत्र में कोड़ामार होली खेली जाती है, जिसमें लोग प्रतीकात्मक रूप से कोड़ों के साथ उत्सव मनाते हैं। इसी तरह दौसा जिले में डोलची होली की परंपरा है, जहां लोग एक-दूसरे पर पानी से भरी डोलचियां फेंकते हुए उत्सव का आनंद लेते हैं।

राजस्थान में होली का उत्सव केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कई स्थानों पर यह हफ्तों तक चलता है। इस दौरान गांव-गांव में फाग गीत गाए जाते हैं और चंग की थाप पर लोकनृत्य होते हैं। लोग आपसी भाईचारे और उत्साह के साथ इस पर्व को मनाते हैं।

इन अनोखी परंपराओं के कारण राजस्थान की होली देशभर में अलग पहचान रखती है और हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक भी इसे देखने के लिए यहां पहुंचते हैं।


Note: Content and images are for informational use only. For any concerns, contact us at info@rajasthaninews.com.

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