Follow Us:

Stay updated with the latest news, stories, and insights that matter — fast, accurate, and unbiased. Powered by facts, driven by you.

संयुक्त राष्ट्र ने अक्टूबर को बनाया ‘Life on Land’ का महीना, जैव विविधता और जंगलों के संरक्षण पर जोर

संयुक्त राष्ट्र ने अक्टूबर को बनाया ‘Life on Land’ का महीना, जैव विविधता और जंगलों के संरक्षण पर जोर

संयुक्त राष्ट्र ने अक्टूबर में ‘Life on Land’ को दी प्राथमिकता, जैव विविधता और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र पर बढ़ा फोकस

संयुक्त राष्ट्र। अक्टूबर 2026 में संयुक्त राष्ट्र ने अपने Sustainable Development Goals (SDGs) के तहत Goal 15 – Life on Land को विशेष प्राथमिकता दी है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य धरती पर मौजूद स्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र, जंगलों, जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को लेकर वैश्विक स्तर पर जागरूकता और कार्रवाई को बढ़ावा देना है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र मानव जीवन, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक गतिविधियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।

क्या है ‘Life on Land’ यानी SDG-15?

‘Life on Land’ संयुक्त राष्ट्र के 17 Sustainable Development Goals में 15वां लक्ष्य है। इसका उद्देश्य धरती पर मौजूद प्राकृतिक जीवन और पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा करना है।

इसमें जंगलों का संरक्षण, खराब हो चुकी भूमि को बहाल करना, मरुस्थलीकरण को रोकना, जैव विविधता की रक्षा करना और प्राकृतिक आवासों को सुरक्षित रखना शामिल है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार मानव समाज का अस्तित्व स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र पर निर्भर करता है।

अक्टूबर में क्यों महत्वपूर्ण है यह मुद्दा?

संयुक्त राष्ट्र की अक्टूबर 2026 की पहल ऐसे समय पर सामने आई है जब UN Biodiversity Conference COP17 भी आयोजित होने जा रही है। यह सम्मेलन 19 से 30 अक्टूबर 2026 तक आर्मेनिया के येरेवान में होगा।

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार COP17, Kunming-Montreal Global Biodiversity Framework के तहत देशों की प्रगति की पहली वैश्विक समीक्षा का महत्वपूर्ण अवसर होगा। इसका उद्देश्य 2030 तक प्रकृति के नुकसान को रोकने और उसे पलटने से जुड़े वैश्विक प्रयासों की स्थिति का आकलन करना है।

जंगलों और जैव विविधता पर विशेष ध्यान

Goal 15 के तहत जंगलों को बचाना सबसे महत्वपूर्ण विषयों में शामिल है। जंगल केवल पेड़-पौधों का समूह नहीं हैं, बल्कि वे पानी के चक्र को नियंत्रित करने, कार्बन को संग्रहीत करने और जलवायु संबंधी चरम परिस्थितियों से समुदायों की रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

संयुक्त राष्ट्र के अक्टूबर के अपडेट के मुताबिक, दुनिया के आधे से ज्यादा जंगल अब दीर्घकालिक प्रबंधन योजनाओं के दायरे में हैं। वहीं, प्रमुख जैव विविधता क्षेत्रों की सुरक्षा में भी विस्तार हुआ है।

फिर भी बड़ी चुनौतियां कायम

प्रगति के बावजूद दुनिया के सामने जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़ी गंभीर चुनौतियां बनी हुई हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार 48,600 से अधिक प्रजातियां विलुप्ति के खतरे का सामना कर रही हैं और वैश्विक स्तर पर विलुप्ति का जोखिम अभी भी बढ़ रहा है।

भूमि का क्षरण भी एक बड़ी चुनौती है। संयुक्त राष्ट्र के Goal 15 संबंधी आंकड़ों के अनुसार 2015 से 2019 के बीच हर वर्ष कम से कम 10 करोड़ हेक्टेयर स्वस्थ और उत्पादक भूमि के क्षरण की स्थिति सामने आई थी। इससे दुनिया के करोड़ों लोगों की आजीविका और जीवन प्रभावित होता है।

भारत में भी जैव विविधता पर जोर

भारत में भी संयुक्त राष्ट्र की ओर से जैव विविधता को लेकर गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। UN Information Centre New Delhi ने अक्टूबर की शुरुआत में ‘Show Us Your India’ नाम से जैव विविधता फोटोग्राफी प्रतियोगिता के विजेताओं की घोषणा की।

इस प्रतियोगिता में भारत की वन्यजीव और प्राकृतिक विविधता को तस्वीरों के जरिए सामने लाया गया। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार इस अभियान में 600 से ज्यादा प्रविष्टियां प्राप्त हुईं।

प्रकृति संरक्षण का सीधा संबंध मानव जीवन से

‘Life on Land’ का उद्देश्य केवल वन्यजीवों और जंगलों को बचाना नहीं है। स्वस्थ भूमि और पारिस्थितिकी तंत्र का सीधा संबंध भोजन, पानी, कृषि, जलवायु और मानव स्वास्थ्य से है।

यदि जंगलों का नुकसान बढ़ता है या प्राकृतिक आवास लगातार खत्म होते हैं, तो इसका प्रभाव केवल वन्यजीवों तक सीमित नहीं रहता। इससे जल संसाधन, कृषि और स्थानीय समुदायों की आजीविका भी प्रभावित हो सकती है।

इसी वजह से संयुक्त राष्ट्र ने Goal 15 को सतत विकास के व्यापक एजेंडे का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है।

अक्टूबर में वैश्विक स्तर पर बढ़ेगा फोकस

अक्टूबर 2026 में Life on Land को प्राथमिकता देने और COP17 के आयोजन के कारण जैव विविधता, जंगलों और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय चर्चा और तेज होने की उम्मीद है।

संयुक्त राष्ट्र का संदेश स्पष्ट है कि आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता। स्वस्थ प्राकृतिक संसाधन और मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र लंबे समय में समाज और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए जरूरी हैं।

इस तरह अक्टूबर 2026 में ‘Life on Land’ को केंद्र में रखकर संयुक्त राष्ट्र ने दुनिया का ध्यान जंगलों, जैव विविधता, भूमि संरक्षण और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र की ओर खींचा है। आने वाले वर्षों में 2030 के सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिए इन क्षेत्रों में ठोस कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।


Note: Content and images are for informational use only. For any concerns, contact us at info@rajasthaninews.com.

Share: