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माघ मेला स्नान विवाद पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का बयान, बोले– ‘मां गंगा से मिलने को परमिशन नहीं चाहिए’

माघ मेला स्नान विवाद पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का बयान, बोले– ‘मां गंगा से मिलने को परमिशन नहीं चाहिए’

माघ मेला स्नान विवाद: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का तीखा बयान, बोले– ‘क्या मां गंगा से मिलने के लिए परमिशन लेंगे?’

प्रयागराज। प्रयागराज में माघ मेला स्नान को लेकर जारी विवाद पर ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने एक बार फिर कड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्नान को लेकर लगाए जा रहे प्रतिबंधों और प्रशासनिक नियमों पर सवाल उठाते हुए कहा कि मां गंगा से मिलने के लिए किसी से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए।

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, “यह हमारी सनातन परंपरा है। गंगा स्नान आस्था और विश्वास का विषय है। क्या कोई अपनी मां से मिलने के लिए परमिशन लेता है? यह क्षमा नहीं किया जा सकता।” उन्होंने कहा कि धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले निर्णय स्वीकार्य नहीं हैं।

उन्होंने आगे कहा कि माघ मेला केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा हुआ पर्व है। ऐसे में प्रशासन को चाहिए कि वह श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान करे और सनातन परंपराओं में अनावश्यक हस्तक्षेप न करे।

शंकराचार्य के इस बयान के बाद धार्मिक संगठनों और साधु-संतों के बीच चर्चा तेज हो गई है। कई संगठनों ने उनके बयान का समर्थन करते हुए कहा है कि गंगा स्नान पर किसी भी प्रकार की रोक या अनुमति व्यवस्था अनुचित है।

वहीं प्रशासन की ओर से अब तक इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन माघ मेला को लेकर सुरक्षा और व्यवस्था के मद्देनज़र नियमों का हवाला दिया जा रहा है।

माघ मेला स्नान विवाद पर शंकराचार्य का यह बयान एक बार फिर आस्था और प्रशासनिक नियमों के बीच संतुलन को लेकर बहस को तेज करता दिख रहा है।


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