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भारत-इज़रायल व्यापार: अब रुपये-शेकेल में होगा लेनदेन, डॉलर पर निर्भरता होगी कम

भारत-इज़रायल व्यापार: अब रुपये-शेकेल में होगा लेनदेन, डॉलर पर निर्भरता होगी कम

भारत-इजरायल व्यापार में बदलाव: अब डॉलर की जगह रुपये में होगा लेनदेन
2026 के आरंभ में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने घोषणा की कि वह भारत और इजरायल के बीच रुपये में व्यापारिक लेनदेन को बढ़ावा देने की दिशा में तेजी से कदम उठा रहा है। यह कदम डॉलर पर निर्भरता कम करने और भारतीय रुपये के अंतर्राष्ट्रीयकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति है।

जनवरी 2026 में भारत और इजरायल ने अपने द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों में एक ऐतिहासिक बदलाव की शुरुआत की है। दोनों देश अब रक्षा और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में व्यापार के लिए अमेरिकी डॉलर के स्थान पर स्थानीय मुद्राओं (भारतीय रुपया और इजरायली शेकेल) का उपयोग शुरू कर रहे हैं।

इस नई व्यवस्था का नेतृत्व भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) कर रहा है, जो इजरायल में कार्यरत एकमात्र भारतीय बैंक है। एसबीआई की तेल अवीव शाखा 2007 से संचालित है और यह इजरायली कंपनियों को ट्रेड फाइनेंस व बैंक गारंटी जैसी सेवाएं प्रदान करती है।

व्यापारिक संबंधों की वर्तमान स्थिति
पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों में उतार-चढ़ाव देखा गया है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में कुल द्विपक्षीय व्यापार 3.62 अरब अमेरिकी डॉलर दर्ज किया गया। इस अवधि में भारत से इजरायल को निर्यात में काफी गिरावट आई, जो 52% घटकर 2.14 अरब डॉलर रह गया।

व्यापार का स्वरूप मुख्य रूप से हीरे और कीमती पत्थरों, पेट्रोलियम उत्पादों, रसायनों और उच्च तकनीक वाले उत्पादों पर केंद्रित रहा है। हालांकि, हाल के वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक मशीनरी, संचार प्रणालियों और चिकित्सा उपकरणों के क्षेत्र में भी व्यापार बढ़ा है।

रुपये में व्यापार का तंत्र और लाभ
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा अनुमोदित इस नई व्यवस्था के तहत 'स्पेशल रुपया वोस्ट्रो अकाउंट' (SRVA) के माध्यम से लेनदेन किया जाएगा। इससे इजरायली कंपनियां सीधे रुपये में भुगतान कर सकेंगी और प्राप्त कर सकेंंगी।

इस परिवर्तन के प्रमुख लाभ
विनिमय दर जोखिम में कमी: डॉलर में लेनदेन करने पर उत्पन्न होने वाले विनिमय दर के जोखिम से भारतीय और इजरायली कंपनियों को मुक्ति मिलेगी।

लेनदेन लागत में कमी: डॉलर रूपांतरण से जुड़ी फीस समाप्त होने से लेनदेन की कुल लागत घटेगी।

व्यापार सुगमता: स्थानीय मुद्राओं में व्यापार से दोनों देशों के छोटे और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को लाभ मिलेगा।

मुद्रा स्थिरता: यह कदम भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेगा और डॉलर के वैश्विक प्रभुत्व को चुनौती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

अन्य सहयोग के क्षेत्र
मुक्त व्यापार समझौता (FTA) वार्ता: जनवरी 2026 में इजरायली व्यापार वार्ताकार भारत में FTA के पूर्व-वार्ता दौर के लिए आएंगे। इन वार्ताओं का उद्देश्य FTA का ढांचा तय करना और प्रवेश द्वार संबंधी मुद्दों पर चर्चा करना है।

मत्स्य पालन और जलीय कृषि: दोनों देशों ने इस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए एक संयुक्त मंत्रिस्तरीय इरादे की घोषणा पर हस्ताक्षर किए हैं। इसमें उन्नत प्रौद्योगिकियों, संयुक्त अनुसंधान एवं विकास और क्षमता निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

कृषि और जल प्रौद्योगिकी: भारत में 43 इंडो-इजरायल उत्कृष्टता केंद्र (CoE) स्थापित किए गए हैं, जिनमें से 35 पूरी तरह कार्यशील हैं। इनका उद्देश्य इजरायल की कृषि प्रौद्योगिकियों को भारतीय किसानों तक पहुंचाना है।

भविष्य की संभावनाएं
विशेषज्ञों का मानना है कि रुपये में व्यापार की यह पहल न केवल भारत-इजरायल व्यापार संबंधों के लिए एक मील का पत्थर है, बल्कि भारत के वैश्विक व्यापार में डॉलर पर निर्भरता कम करने के व्यापक विजन को भी मजबूती देती है। जैसे-जैसे दोनों देश प्रौद्योगिकी, कृषि और रक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ा रहे हैं, यह वित्तीय सेतु भविष्य के अरबों डॉलर के व्यापार के लिए एक मजबूत आधार तैयार करेगा।

प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता (FTA) और रुपये में व्यापार की सुविधा का संयोजन दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को नई गति प्रदान करने की क्षमता रखता है। इससे न केवल व्यापार की मात्रा बढ़ने की उम्मीद है, बल्कि व्यापारिक संबंधों की गुणवत्ता में भी सुधार होगा।


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