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ICAR रिपोर्ट में बड़ा खुलासा: चावल के नमूनों में बढ़ा जहरीला आर्सेनिक स्तर

ICAR रिपोर्ट में बड़ा खुलासा: चावल के नमूनों में बढ़ा जहरीला आर्सेनिक स्तर

Indian Council of Agricultural Research (ICAR) की एक हालिया रिपोर्ट ने खाद्य सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। रिपोर्ट के अनुसार, क्षेत्रीय चावल के नमूनों में जहरीले भारी धातु आर्सेनिक (Arsenic) की मात्रा लगातार बढ़ती हुई पाई गई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि आर्सेनिक एक अत्यंत खतरनाक विषैला तत्व है, जो लंबे समय तक शरीर में पहुंचने पर गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है। यह प्रदूषित पानी, मिट्टी और कृषि प्रक्रियाओं के माध्यम से खाद्य श्रृंखला में प्रवेश कर सकता है।

रिपोर्ट में बताया गया कि विभिन्न क्षेत्रों से एकत्र किए गए चावल के नमूनों में आर्सेनिक की सांद्रता चिंताजनक स्तर तक पहुंचती दिखाई दे रही है। इससे खाद्य गुणवत्ता और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा दोनों को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

वैज्ञानिकों के अनुसार, लगातार आर्सेनिक युक्त भोजन का सेवन करने से कैंसर, त्वचा रोग, तंत्रिका तंत्र संबंधी समस्याएं, हृदय रोग और बच्चों में विकास संबंधी दिक्कतें हो सकती हैं।

Indian Council of Agricultural Research की रिपोर्ट ने इस बात पर भी जोर दिया कि कृषि भूमि, सिंचाई जल और औद्योगिक प्रदूषण के बीच संबंधों की गहराई से जांच की आवश्यकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भूजल में बढ़ता प्रदूषण और रासायनिक प्रभाव कई क्षेत्रों में खेती को प्रभावित कर रहे हैं। विशेष रूप से धान जैसी फसलों में भारी धातुओं का जमाव स्वास्थ्य जोखिम को और बढ़ा सकता है।

इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों और पर्यावरण वैज्ञानिकों ने निगरानी प्रणाली को और मजबूत करने की मांग की है। कई विशेषज्ञों ने नियमित परीक्षण, सुरक्षित सिंचाई व्यवस्था और किसानों को जागरूक करने पर जोर दिया है।

सोशल मीडिया पर भी यह रिपोर्ट चर्चा का विषय बन गई है। लोग खाद्य गुणवत्ता और रोजमर्रा के भोजन में छिपे संभावित स्वास्थ्य खतरों को लेकर चिंता व्यक्त कर रहे हैं।

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन, औद्योगिक अपशिष्ट और भूजल प्रदूषण जैसे कारक भविष्य में खाद्य सुरक्षा के लिए और बड़ी चुनौती बन सकते हैं।

विश्लेषकों के अनुसार, यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का रूप ले सकती है। इसलिए सरकार, वैज्ञानिक संस्थानों और कृषि क्षेत्र के बीच समन्वित कार्रवाई बेहद जरूरी मानी जा रही है।

फिलहाल वैज्ञानिक समुदाय विस्तृत अध्ययन और दीर्घकालिक निगरानी पर जोर दे रहा है ताकि प्रभावित क्षेत्रों की सही पहचान कर समाधान विकसित किए जा सकें।

निष्कर्ष रूप में, Indian Council of Agricultural Research की रिपोर्ट में चावल के नमूनों में बढ़ते आर्सेनिक स्तर का खुलासा खाद्य सुरक्षा के लिए गंभीर चेतावनी माना जा रहा है। यह मामला कृषि, पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य के बीच बढ़ते संबंधों और चुनौतियों को उजागर करता है।

Toxic metals found in all rice samples in study - UPI.com
ICAR रिपोर्ट में बड़ा खुलासा: चावल के नमूनों में बढ़ा जहरीला आर्सेनिक स्तर

 


 


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