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गुजरात हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, प्रवासी मजदूर की मौत पर रेलवे को फटकार, 8 लाख मुआवजा बरकरार

गुजरात हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, प्रवासी मजदूर की मौत पर रेलवे को फटकार, 8 लाख मुआवजा बरकरार

गुजरात हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में बंगाल के प्रवासी मजदूर की मौत के मामले में भारतीय रेलवे को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने साफ कहा कि यदि किसी यात्री के पास एक तरफ का वैध टिकट है और वह प्लेटफॉर्म बदलते समय हादसे का शिकार हो जाता है, तो केवल टिकट न मिलने या तकनीकी आधार पर मुआवजा रोका नहीं जा सकता।

यह मामला एक प्रवासी मजदूर की दर्दनाक मौत से जुड़ा था, जो यात्रा के दौरान प्लेटफॉर्म बदलते समय दुर्घटना का शिकार हो गया था। हादसे के बाद मृतक के परिजनों ने मुआवजे की मांग की थी। मामले में रेलवे की ओर से तर्क दिया गया कि यात्री के पास उचित टिकट संबंधी दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे, इसलिए मुआवजा नहीं दिया जाना चाहिए।

हालांकि हाई कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि यदि यात्री यात्रा प्रक्रिया के दौरान प्लेटफॉर्म बदल रहा था और उसके पास एक तरफ का टिकट था, तो उसे यात्री माना जाएगा। ऐसी स्थिति में रेलवे अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकता।

कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि रेलवे यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार संस्था है। तकनीकी कारणों का सहारा लेकर पीड़ित परिवार को राहत से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने निचली प्राधिकरण द्वारा दिए गए 8 लाख रुपये के मुआवजे को बरकरार रखा।

इस फैसले को यात्रियों के अधिकारों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह निर्णय भविष्य में ऐसे मामलों में मिसाल बन सकता है, जहां तकनीकी आधार पर मुआवजा रोकने की कोशिश की जाती है।

हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद रेलवे प्रशासन की जवाबदेही और यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।

Person Entitled To Compensation Who Suffers Injuries Or Death Anywhere  Within Precincts Of Railway Station: Gujarat High Court

Note: Content and images are for informational use only. For any concerns, contact us at info@rajasthaninews.com.

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