धन वर्षा और सिद्धि की लालसा में मासूम का अपहरण, 22 दिन तक बंधक बना कर रखा; 4 आरोपी गिरफ्तार
- byAman Prajapat
- 03 January, 2026
आस्था जब अंधी हो जाए, तो वह भक्ति नहीं रहती—वह अपराध बन जाती है।
और यही कड़वी सच्चाई एक बार फिर सामने आई है, जहां धन वर्षा और सिद्धि पाने की लालसा में इंसानियत को ताक पर रख दिया गया।
🧒 मासूम बना अंधविश्वास का शिकार
एक नन्हा बच्चा, जिसकी दुनिया स्कूल, खेल और सपनों से भरी होनी चाहिए थी, उसे कुछ लोगों ने अपनी तांत्रिक सोच और लालच का मोहरा बना लिया। धन प्राप्ति और अलौकिक शक्तियों की चाह में आरोपियों ने मासूम का अपहरण कर लिया।
⏳ 22 दिन का डर, दर्द और कैद
अपहरण के बाद बच्चे को पूरे 22 दिनों तक एक गुप्त स्थान पर बंधक बनाकर रखा गया।
इन 22 दिनों में बच्चे ने क्या-क्या सहा—यह सोचकर भी रूह कांप जाती है।
चार दीवारें, अजनबी चेहरे, डर का साया और घर की याद—एक मासूम के लिए ये किसी बुरे सपने से कम नहीं।
🔮 तंत्र-मंत्र और धन वर्षा का वहम
जांच में सामने आया कि आरोपी किसी तथाकथित तांत्रिक प्रक्रिया के जरिए धन वर्षा और सिद्धि हासिल करना चाहते थे।
आज के डिजिटल दौर में भी कुछ लोग सदियों पुरानी अंधी मान्यताओं में इतने डूबे हैं कि उन्हें अपराध भी पुण्य लगता है—और यही सबसे खतरनाक बात है।
साफ बोलें तो—
अगर मेहनत से पैसा नहीं मिल रहा, तो बच्चे की बलि से भी नहीं मिलेगा।
🚔 पुलिस की मुस्तैदी से टूटा अंधेरा
पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझते हुए लगातार सुराग जोड़े, कॉल डिटेल्स खंगालीं, और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी।
आखिरकार 22वें दिन पुलिस ने छापा मारकर बच्चे को सकुशल बरामद कर लिया।
इस कार्रवाई में 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनसे पूछताछ जारी है।
⚖️ कानून के शिकंजे में आरोपी
आरोपियों पर अपहरण, गैरकानूनी हिरासत और अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
कानून अपना काम करेगा—और करना भी चाहिए, ताकि ऐसी सोच रखने वालों को साफ संदेश जाए।
😔 समाज के लिए चेतावनी
ये मामला सिर्फ एक क्राइम न्यूज़ नहीं है—ये एक आईना है।
एक ऐसा आईना, जो दिखाता है कि शिक्षा, विज्ञान और समझ के बावजूद अंधविश्वास आज भी जिंदा है।
पुराने ज़माने में भी हमारे बुज़ुर्ग कहते थे—
“भगवान भी उसी का साथ देता है, जो खुद सही रास्ते पर चलता है।”
🧠 आस्था और अपराध में फर्क समझना ज़रूरी
आस्था इंसान को बेहतर बनाती है,
लेकिन जब वही आस्था किसी की आज़ादी, जान और बचपन छीन ले—तो वो धर्म नहीं, अपराध है।
Gen Z की भाषा में कहें तो—
ये सीधा-सीधा delusion है, और इसका इलाज सिर्फ कानून और जागरूकता है।

👨👩👦 परिवार की हालत
बच्चे की सुरक्षित वापसी के बाद परिवार ने राहत की सांस ली, लेकिन 22 दिन का ज़ख्म शायद ज़िंदगी भर न भरे।
माता-पिता की आंखों में आंसू थे, लेकिन पुलिस और प्रशासन के लिए शुक्रिया भी।
📢 आख़िरी बात—साफ और कड़वी
धन, सिद्धि, चमत्कार—इन सबके शॉर्टकट नहीं होते।
जो लोग मासूमों को मोहरा बनाते हैं, वे न धर्म जानते हैं, न इंसानियत।
समाज को अब तय करना होगा—
या तो हम विज्ञान और समझ चुनें, या फिर हर कुछ समय बाद ऐसे ही शर्मनाक किस्से पढ़ते रहें।
Note: Content and images are for informational use only. For any concerns, contact us at info@rajasthaninews.com.
राजस्थान में अपराधों...
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