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छारी-ढांध आर्द्रभूमि को वैश्विक रामसर मानचित्र में शामिल किया गया, जैव विविधता को अंतरराष्ट्रीय मान्यता

छारी-ढांध आर्द्रभूमि को वैश्विक रामसर मानचित्र में शामिल किया गया, जैव विविधता को अंतरराष्ट्रीय मान्यता

छारी-ढांध आर्द्रभूमि को आधिकारिक रूप से वैश्विक रामसर मानचित्र में शामिल कर लिया गया है, जिससे इसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पारिस्थितिक और जैव विविधता संबंधी महत्ता को मान्यता मिली है। यह उपलब्धि न केवल क्षेत्र के लिए, बल्कि भारत के पर्यावरण संरक्षण प्रयासों के लिए भी एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

रामसर सम्मेलन (Ramsar Convention) एक अंतरराष्ट्रीय संधि है, जिसकी स्थापना 1971 में ईरान के रामसर शहर में हुई थी। इसका उद्देश्य विश्व की महत्वपूर्ण आर्द्रभूमियों (Wetlands) का संरक्षण और सतत उपयोग सुनिश्चित करना है। किसी भी आर्द्रभूमि को रामसर साइट का दर्जा तब दिया जाता है जब वह जैव विविधता, प्रवासी पक्षियों के आवास, पारिस्थितिक संतुलन और जल संरक्षण के दृष्टिकोण से वैश्विक महत्व रखती हो।

छारी-ढांध आर्द्रभूमि अपने समृद्ध पारिस्थितिक तंत्र के लिए जानी जाती है। यह क्षेत्र विभिन्न प्रकार के प्रवासी और स्थानीय पक्षियों, जलीय जीवों और दुर्लभ वनस्पतियों का प्राकृतिक आवास है। सर्दियों के मौसम में यहां बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी आते हैं, जो इसे पक्षी प्रेमियों और शोधकर्ताओं के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण बनाता है। इस क्षेत्र की जैव विविधता स्थानीय पारिस्थितिकी संतुलन को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है।

रामसर मानचित्र में शामिल होने से इस आर्द्रभूमि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संरक्षण की अतिरिक्त प्राथमिकता मिलेगी। इससे न केवल पर्यावरणीय जागरूकता बढ़ेगी, बल्कि सरकार और स्थानीय प्रशासन को संरक्षण के लिए अधिक संसाधन और तकनीकी सहयोग प्राप्त हो सकता है। यह दर्जा क्षेत्र में अनियंत्रित विकास, अतिक्रमण और प्रदूषण जैसी समस्याओं पर नियंत्रण लगाने में भी सहायक होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि आर्द्रभूमियां जल संरक्षण, बाढ़ नियंत्रण, भूजल पुनर्भरण और कार्बन अवशोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों के बीच इनका संरक्षण और भी आवश्यक हो गया है। छारी-ढांध जैसी आर्द्रभूमियों को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलना इस दिशा में एक सकारात्मक संकेत है।

इसके साथ ही, यह कदम स्थानीय समुदायों के लिए भी अवसर लेकर आ सकता है। पर्यावरणीय पर्यटन (ईको-टूरिज्म) को बढ़ावा मिल सकता है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को समर्थन मिलेगा। हालांकि, यह सुनिश्चित करना आवश्यक होगा कि पर्यटन गतिविधियां पर्यावरण संतुलन को प्रभावित न करें।

छारी-ढांध आर्द्रभूमि का रामसर मानचित्र में शामिल होना भारत की पर्यावरण संरक्षण प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह न केवल जैव विविधता की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, बल्कि वैश्विक स्तर पर सतत विकास और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के प्रयासों का भी हिस्सा है।

Chhari-Dhandh becomes Ramsar Site, attracting visitors from over 52  countries
छारी-ढांध आर्द्रभूमि को वैश्विक रामसर मानचित्र में शामिल किया गया, जैव विविधता को अंतरराष्ट्रीय मान्यता

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