राजस्थान के 611 सरकारी स्कूलों के पास अपना भवन नहीं! 2,047 में शौचालय और 1,049 में पानी की सुविधा गायब
- bySanjay
- 29 August, 2026
राजस्थान के 611 सरकारी स्कूलों के पास अपना भवन नहीं! 2,047 स्कूलों में शौचालय और 1,049 में पीने का पानी नहीं

राजस्थान में सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं को लेकर सामने आए आंकड़ों ने शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। राज्य सरकार ने विधानसभा में जानकारी दी है कि प्रदेश के 611 सरकारी स्कूलों के पास अपना खुद का भवन नहीं है। इनमें 10 बालिका विद्यालय भी शामिल हैं। यह आंकड़े 2025-26 के UDISE डेटा के आधार पर विधानसभा में पेश किए गए हैं।
611 स्कूल बिना अपने भवन के
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के सवाल के जवाब में सरकार की ओर से बताया गया कि राजस्थान में 611 सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जिनके पास अपना भवन नहीं है। इनमें से कुछ जगहों पर बच्चों को अस्थायी व्यवस्थाओं में पढ़ाई करनी पड़ रही है।
राजधानी जयपुर में ही 38 सरकारी स्कूल भवन के बिना संचालित हो रहे हैं। वहीं झालावाड़ जिले के अकलेरा ब्लॉक में सबसे ज्यादा 23 ऐसे स्कूल बताए गए हैं। इसके बाद खानपुर में 16 और झालरापाटन में 11 स्कूल भवनविहीन हैं।
सिर्फ भवन की समस्या नहीं
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक समस्या केवल स्कूल भवन तक सीमित नहीं है। प्रदेश में अपने भवन वाले 2,047 सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए शौचालय की सुविधा नहीं है, जबकि 1,049 स्कूलों में पीने के पानी की सुविधा उपलब्ध नहीं है।
शौचालय की कमी के मामले में बांसवाड़ा सबसे ऊपर है, जहां 188 स्कूलों में यह सुविधा नहीं बताई गई है। इसके बाद डूंगरपुर में 124 और उदयपुर में 98 स्कूल हैं। वहीं पीने के पानी की सुविधा के मामले में दौसा में 96 स्कूल सबसे ज्यादा प्रभावित बताए गए हैं।
झालावाड़ और जयपुर पर खास नजर
भवनविहीन स्कूलों में झालावाड़ का अकलेरा ब्लॉक सबसे ऊपर है। यहां 23 स्कूलों के पास अपना भवन नहीं है। खानपुर में 16 और झालरापाटन में 11 स्कूल इस सूची में हैं।
दूसरी तरफ, राजधानी जयपुर में भी 38 स्कूलों का अपना भवन नहीं होना सवाल खड़े करता है कि प्रदेश के शहरी इलाकों में भी सरकारी शिक्षा के लिए जरूरी आधारभूत ढांचा अभी पूरी तरह मजबूत नहीं हो पाया है।
अस्थायी जगहों पर पढ़ाई का मुद्दा
इस मामले ने तब और ज्यादा तूल पकड़ा जब जयपुर के बगरू इलाके के एक सरकारी स्कूल को लेकर ऐसी रिपोर्ट सामने आई कि स्कूल की पुरानी इमारत को असुरक्षित घोषित किए जाने के बाद बच्चों को अस्थायी जगह पर पढ़ाया जा रहा था। इसी तरह स्कूलों की जमीनी स्थिति को लेकर निरीक्षण और राजनीतिक विवाद भी सामने आया।
सरकार और विपक्ष आमने-सामने
विधानसभा में सामने आए आंकड़ों के बाद राजस्थान की शिक्षा व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। राज्य की BJP सरकार ने स्कूलों की खराब स्थिति के लिए पिछली कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। वहीं विपक्ष सरकार से मौजूदा स्कूलों की स्थिति सुधारने और बच्चों को बेहतर सुविधाएं देने की मांग कर रहा है।
सरकार की ओर से स्कूलों की मरम्मत और बुनियादी ढांचे को सुधारने के लिए फंड उपलब्ध कराने की बात भी सामने आई है। अब बड़ा सवाल यही है कि 611 भवनविहीन स्कूलों और हजारों स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी को कब तक दूर किया जाएगा।
Note: Content and images are for informational use only. For any concerns, contact us at info@rajasthaninews.com.
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