प्रयागराज के 4 प्राचीन शिव मंदिरों का होगा कायाकल्प, ₹5.74 करोड़ से बदलेगी तस्वीर; श्रद्धालुओं को मिलेंगी बेहतर सुविधाएं
- bySanjay
- 10 October, 2026
प्रयागराज के चार प्राचीन शिव मंदिरों का होगा कायाकल्प, ₹5.74 करोड़ से बढ़ेंगी श्रद्धालुओं की सुविधाएं

प्रयागराज, उत्तर प्रदेश। धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार प्रयागराज के चार प्राचीन शिव मंदिरों का विकास और सौंदर्यीकरण करा रही है। इन परियोजनाओं पर कुल ₹5.74 करोड़ खर्च किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य संगम के अलावा प्रयागराज के दूसरे ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों को भी पहचान दिलाना और श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। यह जानकारी 6 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्टों में सामने आई थी। <Cite refs={["turn428771search3","turn428771search2"]}/>
किन चार मंदिरों का होगा विकास?
योजना के तहत प्रयागराज जिले के चार मंदिरों को शामिल किया गया है। इनमें जसरा स्थित पथरबंधी महादेवालय, प्राचीन भोलेगिरि मंदिर, बोलन महादेव मंदिर और घीनपुर स्थित प्राचीन शिवाला मंदिर शामिल हैं।
परियोजनाओं के लिए बताई गई राशि इस प्रकार है:
पथरबंधी महादेवालय, जसरा: ₹1.94 करोड़
भोलेगिरि मंदिर: ₹1.87 करोड़
बोलन महादेव मंदिर: ₹97.61 लाख
शिवाला मंदिर, घीनपुर: ₹94.39 लाख
इन चारों परियोजनाओं की कुल राशि ₹5.73 करोड़ से थोड़ी अधिक है, जिसे रिपोर्टों में लगभग ₹5.74 करोड़ बताया गया है। <Cite refs={["turn428771search3","turn428771search4"]}/>
मंदिर परिसरों में क्या-क्या सुविधाएं विकसित होंगी?
योजना के तहत मंदिर परिसरों को श्रद्धालुओं के लिए अधिक सुविधाजनक बनाने पर ध्यान दिया जा रहा है। उपलब्ध रिपोर्टों में बहुउद्देशीय हॉल, यात्री शेड, स्वागत द्वार, पाथवे, प्लेटफॉर्म और बैठने के लिए आरसीसी बेंच जैसी सुविधाओं का उल्लेख है।
इसके साथ ही सजावटी लाइटिंग, हरियाली और दिशासूचक बोर्ड जैसी व्यवस्थाओं से मंदिर परिसरों में आवागमन आसान बनाने की योजना है। कुछ स्थलों पर हॉल का नवीनीकरण, म्यूरल वर्क और शिवलिंग के लिए बलुआ पत्थर के मेहराब बनाने जैसे कार्य भी शामिल बताए गए हैं। <Cite refs={["turn428771search0","turn428771search3"]}/>
हालांकि, सभी सुविधाएं प्रत्येक मंदिर में समान रूप से विकसित होंगी, ऐसा उपलब्ध विवरण से स्पष्ट नहीं होता। प्रत्येक स्थल पर होने वाले काम की वास्तविक स्थिति संबंधित परियोजना के स्वीकृत दस्तावेजों और निर्माण प्रगति से ही स्पष्ट होगी।
धार्मिक पर्यटन को मिलेगा नया विस्तार
प्रयागराज को त्रिवेणी संगम और बड़े धार्मिक आयोजनों के लिए जाना जाता है। लेकिन जिले में कई ऐसे पुराने मंदिर भी हैं, जिनका धार्मिक और स्थानीय सांस्कृतिक महत्व है। इन मंदिरों का विकास होने से श्रद्धालुओं को संगम के अतिरिक्त दूसरे धार्मिक स्थलों तक जाने का अवसर मिल सकता है।
बेहतर रास्ते, बैठने की जगह, प्रकाश व्यवस्था और यात्री सुविधाएं बुजुर्गों, परिवारों तथा दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए उपयोगी हो सकती हैं। इससे स्थानीय दुकानदारों, छोटे कारोबारियों और आसपास की पर्यटन सेवाओं को भी संभावित लाभ मिल सकता है। हालांकि, पर्यटकों की संख्या या स्थानीय आय में कितनी बढ़ोतरी होगी, इसका कोई पुष्ट आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
सरकार का उद्देश्य क्या है?
उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार, प्राचीन धार्मिक स्थलों की पारंपरिक पहचान को बनाए रखते हुए उन्हें आधुनिक पर्यटक सुविधाओं से जोड़ने पर ध्यान दिया जा रहा है। सरकार की मंशा इन कम चर्चित धार्मिक स्थलों को भी पर्यटन मानचित्र पर प्रमुखता दिलाने की है। <Cite refs={["turn428771search0","turn428771search3"]}/>
निष्कर्ष
प्रयागराज के चार प्राचीन शिव मंदिरों के विकास के लिए ₹5.74 करोड़ की परियोजना धार्मिक पर्यटन को विस्तार देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यदि निर्धारित कार्य समय पर और गुणवत्ता के साथ पूरे होते हैं, तो श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकती हैं और इन ऐतिहासिक मंदिरों की पहचान व्यापक हो सकती है। परियोजनाओं की प्रगति और सुविधाओं के वास्तविक रूप से उपलब्ध होने की स्थिति पर आगे नजर रहेगी।
Note: Content and images are for informational use only. For any concerns, contact us at info@rajasthaninews.com.
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