Opinion: दुआ कीजिए आपके ‘युवराज’ पर मुसीबत न आए, क्योंकि नोएडा प्रशासन को ठंड लग रही है
- bypari rathore
- 19 January, 2026
: दुआ कीजिए आपके ‘युवराज’ पर कोई मुसीबत न आए, क्योंकि नोएडा प्रशासन को ठंड लग रही है
युवराज ने रात करीब 12 बजे अपने पिता को फोन किया था—
“पापा, मैं नाले में गिर गया हूं… मुझे बचा लो।”
एक पिता जिस हालत में था, उसी हालत में भागा। मौके पर पहुंचा तो देखा—युवराज नाले में बहते पानी के बीच गाड़ी की छत पर लेटा हुआ था। वह लगातार चिल्ला रहा था—हेल्प, हेल्प…
पुलिस आई। दमकल की टीमें आईं। एसडीआरएफ को बुलाया गया। लेकिन रेस्क्यू के नाम पर जो हुआ, वह किसी सिस्टम की विफलता नहीं बल्कि उसकी बेहिसी का उदाहरण है।
रस्सियां फेंकी जाती रहीं, लेकिन रस्सी वहां तक पहुंची ही नहीं। हाइड्रोलिक सपोर्ट लगाया गया, फिर भी नाकाफी। बोट नहीं थी। बड़ी क्रेन नहीं मंगाई गई। दमकल विभाग की क्रेन केवल 40 फीट तक पहुंच सकी। कर्मचारी उसी पर चढ़कर रस्सी फेंकते रहे और उधर युवराज पानी में समाता चला गया।
पानी ठंडा था। नाले में झाड़ियां थीं। सरिया लगा होने का डर था।
और हमारे “बहादुर” बचावकर्मी अपनी जान बचाने की सोच में थे।
यह किसी एक पिता की लाचारी नहीं है—
यह हमारे थक चुके, डरपोक और गैर-जिम्मेदार सिस्टम का शर्मनाक चेहरा है।
अगर इतने लोग मिलकर रस्सी पकड़कर किसी एक को नीचे उतारते, तो युवराज को बचाया जा सकता था। कम से कम कोशिश तो दिखती। यहां तो प्रशासन को ही ठंड लग रही थी।
बाद में एसडीआरएफ की ओर से कहा गया—
“दृश्यता कम थी, दिखाई नहीं दे रहा था।”
तो सवाल सीधा है—
अगर अंधेरे, ठंडे पानी और जोखिम में काम नहीं कर सकते, तो ऐसे बचावकर्मी किस काम के?
जिन्हें अपनी जान की पड़ी है, वे दूसरों की सुरक्षा क्या करेंगे?
ऐसे कर्मियों को या तो आधुनिक संसाधन दिए जाएं, या फिर इस्तीफा देकर चूड़ियां पहन लेनी चाहिए।
क्योंकि अगला फोन किसी और ‘युवराज’ का हो सकता है।

और तब भी शायद प्रशासन को ठंड ही लग रही होगी।
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