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UN के मंच पर अब्बास की आवाज, लेकिन खुद नहीं पहुंचे! अमेरिका के वीजा इनकार के बाद वीडियो से दिया संदेश

UN के मंच पर अब्बास की आवाज, लेकिन खुद नहीं पहुंचे! अमेरिका के वीजा इनकार के बाद वीडियो से दिया संदेश

UN के मंच पर अब्बास की आवाज… लेकिन खुद अब्बास नहीं पहुंचे! अमेरिका के वीजा इनकार के बाद वीडियो से दिया बड़ा संदेश

न्यूयॉर्क/रामल्लाह:
संयुक्त राष्ट्र महासभा का मंच… दुनिया भर के नेता मौजूद… कैमरे चालू… और इसी बीच एक ऐसा संबोधन शुरू हुआ, जिसने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास UN के मंच पर खुद मौजूद नहीं थे, लेकिन उनकी आवाज दुनिया के नेताओं तक जरूर पहुंची।

अमेरिका की ओर से वीजा नहीं मिलने के बाद अब्बास ने रामल्लाह से रिकॉर्ड किए गए वीडियो के जरिए संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित किया। यह लगातार दूसरा साल है जब वह अमेरिकी वीजा न मिलने के कारण न्यूयॉर्क पहुंचकर व्यक्तिगत रूप से UN महासभा को संबोधित नहीं कर सके।

🎥 कुर्सी खाली रही, लेकिन भाषण दुनिया ने सुना

कल्पना कीजिए—दुनिया की सबसे बड़ी कूटनीतिक बैठकों में से एक और वहां किसी राष्ट्राध्यक्ष की मौजूदगी सिर्फ एक स्क्रीन के जरिए हो।

अब्बास का संबोधन पहले से रिकॉर्ड किया गया था और UN महासभा में इसे वीडियो के माध्यम से प्रसारित किया गया। इसके लिए महासभा ने एक प्रस्ताव के जरिए फिलिस्तीनी अधिकारियों को वीडियो लिंक से बैठक में हिस्सा लेने की अनुमति दी थी।

यानी अमेरिका की धरती पर अब्बास की मौजूदगी नहीं हुई, लेकिन UN के मंच पर उनका संदेश जरूर पहुंचा।

🇵🇸 गाजा और वेस्ट बैंक का मुद्दा बना भाषण का केंद्र

अपने संबोधन में अब्बास ने फिलिस्तीनियों की स्थिति, गाजा और वेस्ट बैंक से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से फिलिस्तीनी लोगों के लिए कार्रवाई और समर्थन की अपील की।

उनका संदेश सिर्फ गाजा तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने फिलिस्तीन के भविष्य और क्षेत्र में राजनीतिक समाधान को लेकर भी अपना पक्ष रखा।

🕊️ फिर दोहराया Two-State Solution

अब्बास ने दो-राष्ट्र समाधान यानी Two-State Solution के समर्थन को दोहराया। इसके तहत इजरायल और फिलिस्तीन को अलग-अलग राज्यों के रूप में स्थापित करने की अवधारणा शामिल है।

यह मुद्दा लंबे समय से इजरायल-फिलिस्तीन विवाद की अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का प्रमुख हिस्सा रहा है।

🇺🇸 आखिर अमेरिका ने वीजा क्यों रोका?

अब कहानी का सबसे अहम हिस्सा यहीं से शुरू होता है।

अमेरिकी अधिकारियों ने फिलिस्तीनी अधिकारियों पर लगाए गए प्रतिबंधों और फिलिस्तीनी नेतृत्व की अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों से जुड़े अपने रुख का हवाला दिया है। दूसरी ओर, फिलिस्तीनी पक्ष ने अमेरिका के इस फैसले पर आपत्ति जताई है।

यही वजह है कि अब्बास का UN संबोधन इस बार सिर्फ एक भाषण नहीं रहा, बल्कि अमेरिका और फिलिस्तीनी नेतृत्व के बीच जारी कूटनीतिक मतभेदों का भी प्रतीक बन गया।

🇮🇱 इजरायली प्रतिनिधिमंडल की सीटें भी चर्चा में

अब्बास के वीडियो संबोधन के दौरान UN महासभा में इजरायली प्रतिनिधिमंडल की सीटें खाली रहने की भी रिपोर्ट सामने आई। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का संबोधन बाद में निर्धारित था।

इस पूरे घटनाक्रम ने UN महासभा के मंच को एक बार फिर इजरायल-फिलिस्तीन विवाद की कूटनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया।

🌍 अमेरिका ने दरवाजा रोका, UN ने स्क्रीन खोल दी

इस पूरे घटनाक्रम की सबसे दिलचस्प तस्वीर यही रही—अब्बास अमेरिका नहीं पहुंच पाए, लेकिन उनकी आवाज UN तक पहुंच गई।

एक तरफ वीजा प्रतिबंध, दूसरी तरफ UN की वीडियो संबोधन की अनुमति… और बीच में गाजा, वेस्ट बैंक और फिलिस्तीन के भविष्य का सवाल।

अब्बास के इस संबोधन ने एक बार फिर यह दिखाया कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कभी-कभी नेता की मौजूदगी से ज्यादा उसके संदेश की मौजूदगी मायने रखती है।

फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में अमेरिका, इजरायल और फिलिस्तीनी नेतृत्व के बीच कूटनीतिक स्तर पर क्या रुख सामने आता है और UN में उठाए गए मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय किस तरह प्रतिक्रिया देता है।

नोट: वीजा विवाद को लेकर अमेरिकी और फिलिस्तीनी पक्ष की व्याख्याएं अलग-अलग हैं। इसलिए संबंधित दावों को उन्हीं पक्षों के सार्वजनिक रुख के रूप में समझना चाहिए


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