जयपुर में AI हनीट्रैप गैंग का भंडाफोड़, कारोबारी से ₹90 लाख की वसूली
- bykrish rathore
- 30 May, 2026
Jaipur में पुलिस ने एक अत्याधुनिक AI आधारित हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसने कथित तौर पर कई प्रभावशाली और संपन्न लोगों को निशाना बनाया। जांच के अनुसार, गिरोह ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक तकनीक का उपयोग कर पीड़ितों को जाल में फंसाया और फिर उनसे बड़ी रकम वसूली।
पुलिस के मुताबिक, इस गिरोह ने एक प्रमुख जयपुर व्यवसायी को निशाना बनाकर उससे लगभग ₹90 लाख की वसूली की। मामले की शिकायत मिलने के बाद साइबर और अपराध शाखा की संयुक्त जांच शुरू की गई, जिसके बाद आरोपियों तक पहुंचने में सफलता मिली।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग करता था। आरोपियों द्वारा कथित रूप से नकली वीडियो, परिवर्तित तस्वीरें और AI-जनित सामग्री तैयार की जाती थी, जिन्हें वास्तविक दिखाकर पीड़ितों पर दबाव बनाया जाता था।
विशेषज्ञों के अनुसार, डीपफेक तकनीक किसी व्यक्ति के चेहरे, आवाज़ या वीडियो को इस तरह बदल सकती है कि पहली नजर में वह वास्तविक प्रतीत हो। इसी कारण ऐसे साइबर अपराधों की पहचान और जांच पहले की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण हो गई है।
Jaipur पुलिस का कहना है कि गिरोह सुनियोजित तरीके से उच्च आय वर्ग और कॉर्पोरेट जगत से जुड़े लोगों को चुनता था। इसके बाद सोशल मीडिया, डिजिटल संचार और अन्य माध्यमों से संपर्क स्थापित कर उन्हें फंसाने की कोशिश की जाती थी।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने इस मामले को AI आधारित अपराधों के बढ़ते खतरे का महत्वपूर्ण उदाहरण बताया है। उनका कहना है कि जैसे-जैसे AI तकनीक अधिक सुलभ हो रही है, वैसे-वैसे उसके दुरुपयोग की संभावनाएं भी बढ़ रही हैं।
पुलिस ने लोगों को सावधान रहने की सलाह देते हुए कहा है कि किसी भी संदिग्ध वीडियो कॉल, ऑनलाइन संपर्क या ब्लैकमेलिंग प्रयास की स्थिति में तुरंत कानून प्रवर्तन एजेंसियों से संपर्क करें।
सोशल मीडिया पर भी इस मामले को लेकर व्यापक चर्चा हो रही है। कई लोगों ने चिंता जताई है कि डीपफेक तकनीक का दुरुपयोग व्यक्तिगत प्रतिष्ठा, गोपनीयता और वित्तीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकार के मामलों से निपटने के लिए साइबर कानूनों, डिजिटल फॉरेंसिक क्षमताओं और जनजागरूकता को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, AI और डीपफेक आधारित अपराधों के बढ़ते मामलों को देखते हुए भविष्य में और अधिक सख्त नियामक ढांचे तथा तकनीकी सुरक्षा उपायों की जरूरत पड़ सकती है।
निष्कर्ष रूप में, Jaipur में AI और डीपफेक तकनीक का उपयोग कर संचालित कथित हनीट्रैप गिरोह का भंडाफोड़ साइबर अपराधों के बदलते स्वरूप को उजागर करता है। कारोबारी से ₹90 लाख की वसूली का यह मामला डिजिटल युग में बढ़ती तकनीकी चुनौतियों और साइबर सतर्कता की आवश्यकता की याद दिलाता है।
Note: Content and images are for informational use only. For any concerns, contact us at info@rajasthaninews.com.
राजस्थान में अपराधों...
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