ISRO की बड़ी वापसी की तैयारी! 4 सितंबर को लॉन्च होगा EOS-5, GSLV F17 से अंतरिक्ष में भरेगा उड़ान
- bypari rathore
- 29 August, 2026
ISRO EOS-5 Launch: 4 सितंबर को होगी ISRO की बड़ी वापसी! GSLV F17 से अंतरिक्ष में जाएगा ‘Hawk’s Eye’
नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) एक अहम मिशन के साथ लॉन्च पैड पर वापसी की तैयारी कर रहा है। ISRO के चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन के मुताबिक, 4 सितंबर 2026 को GSLV F17 रॉकेट के जरिए EOS-5 अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट को अंतरिक्ष में भेजने का लक्ष्य रखा गया है। यह लॉन्च श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से होगा।
यह मिशन इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि ISRO लगातार दो PSLV मिशनों में आई परेशानियों के बाद दोबारा लॉन्च अभियान को गति देने की कोशिश कर रहा है। EOS-5 मिशन सफल रहता है तो इससे न सिर्फ भारत की Earth Observation क्षमता मजबूत होगी, बल्कि ISRO के अगले बड़े मिशनों के लिए भी भरोसा बढ़ेगा।
EOS-5 को क्यों कहा जा रहा है ‘Hawk’s Eye’?
EOS-5 को पहले GISAT-1A के नाम से जाना जाता था। यह सामान्य अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट्स से अलग क्षमता रखने वाला मिशन है।
सैटेलाइट को करीब 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई वाली जियोस्टेशनरी ऑर्बिट में स्थापित करने की योजना है। इस कक्षा की खासियत यह है कि सैटेलाइट पृथ्वी के एक खास क्षेत्र के ऊपर लगभग स्थिर स्थिति में रह सकता है और उसी इलाके की बार-बार निगरानी कर सकता है।
यही वजह है कि EOS-5 को भारत के लिए एक तरह की लगातार नजर रखने वाली अंतरिक्षीय आंख के तौर पर देखा जा रहा है।
देश पर लगातार नजर रखने में मिलेगी मदद
EOS-5 का सबसे बड़ा फायदा इसकी बार-बार और तेजी से इमेजिंग करने की क्षमता हो सकती है। इससे भारत के बड़े भूभाग और आसपास के क्षेत्रों की लगातार निगरानी में मदद मिलेगी।
इस तरह के डेटा का इस्तेमाल कई क्षेत्रों में किया जा सकता है, जैसे:
🌧️ बाढ़ और भारी बारिश की निगरानी
🌀 चक्रवात और मौसम संबंधी घटनाओं पर नजर
🔥 जंगलों में आग की पहचान
🌾 कृषि और फसल की निगरानी
🌊 तटीय इलाकों की निगरानी
🛰️ रणनीतिक और सुरक्षा संबंधी निगरानी
🚨 प्राकृतिक आपदाओं के दौरान तेजी से आकलन
इसका फायदा खास तौर पर उन परिस्थितियों में हो सकता है जहां जमीन पर स्थिति तेजी से बदल रही हो।
GSLV F17 की भी होगी बड़ी परीक्षा
EOS-5 को अंतरिक्ष तक पहुंचाने की जिम्मेदारी GSLV Mk II के F17 मिशन की होगी। ISRO के मुताबिक GSLV Mk II तीन चरणों वाला लॉन्च व्हीकल है, जिसमें स्वदेशी क्रायोजेनिक अपर स्टेज का इस्तेमाल किया जाता है।
इस मिशन की सफलता GSLV Mk II के लिए भी महत्वपूर्ण होगी। खास तौर पर इसलिए क्योंकि EOS-5 जैसे सैटेलाइट को जियोस्टेशनरी ट्रांसफर ऑर्बिट तक पहुंचाने के लिए लॉन्च व्हीकल की सटीकता और विश्वसनीयता बेहद जरूरी है।
ISRO के लिए यह लॉन्च इतना अहम क्यों?
पिछले कुछ समय में ISRO को लगातार दो PSLV मिशनों में झटकों का सामना करना पड़ा। जनवरी 2026 में PSLV-C62 मिशन में भी समस्या आई थी। इससे पहले मई 2025 में PSLV-C61 मिशन भी अपने लक्ष्य को पूरा नहीं कर पाया था।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि EOS-5 को PSLV नहीं बल्कि GSLV Mk II से लॉन्च किया जाएगा। यानी दोनों लॉन्च व्हीकल एक ही मिशन सिस्टम नहीं हैं।
इसीलिए EOS-5 मिशन की सफलता ISRO को एक अलग और महत्वपूर्ण लॉन्च प्लेटफॉर्म पर अपना भरोसा मजबूत करने का मौका भी देगी।
2021 की नाकाम कोशिश से भी जुड़ा है मिशन
EOS-5 मिशन की कहानी में 2021 का एक महत्वपूर्ण अध्याय भी है।
12 अगस्त 2021 को ISRO ने GSLV F10 के जरिए EOS-03 सैटेलाइट को लॉन्च करने की कोशिश की थी। मिशन सफलतापूर्वक पूरा नहीं हो पाया था और सैटेलाइट को निर्धारित कक्षा में स्थापित नहीं किया जा सका।
EOS-5 को उसी तरह की लगातार Earth Observation क्षमता को आगे बढ़ाने वाले महत्वपूर्ण मिशन के रूप में देखा जा रहा है।
अब ISRO के सामने बड़ा मिशन रोडमैप
EOS-5 लॉन्च सिर्फ एक मिशन नहीं है। ISRO आने वाले महीनों में कई बड़े अंतरिक्ष अभियानों की तैयारी कर रहा है।
ISRO चेयरमैन के अनुसार, मार्च 2027 तक एजेंसी कई लॉन्च करने की योजना पर काम कर रही है। इनमें Gaganyaan का G1 मिशन भी शामिल है, जो मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम से पहले होने वाला महत्वपूर्ण uncrewed mission होगा।
इसका मतलब है कि EOS-5 के बाद भी ISRO का लॉन्च कैलेंडर काफी व्यस्त रहने वाला है।
भारत की Space और Security क्षमता को क्या फायदा?
आज के दौर में सैटेलाइट सिर्फ मौसम या तस्वीरें लेने तक सीमित नहीं हैं। हाई-रिजॉल्यूशन और लगातार उपलब्ध होने वाला Earth Observation डेटा आपदा प्रबंधन, कृषि, इंफ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग और राष्ट्रीय सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
भारत जैसे बड़े और भौगोलिक रूप से विविध देश के लिए ऐसी क्षमता का महत्व और बढ़ जाता है।
EOS-5 की जियोस्टेशनरी स्थिति भारत के ऊपर लगातार निगरानी और तेजी से बदलने वाली परिस्थितियों की जानकारी उपलब्ध कराने में उपयोगी हो सकती है।
4 सितंबर को क्यों रहेगी पूरी दुनिया की नजर?
अगर निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार लॉन्च होता है तो 4 सितंबर की सुबह श्रीहरिकोटा से GSLV F17 की उड़ान ISRO के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हो सकती है।
मिशन की सफलता से भारत को एक नया Earth Observation asset मिलेगा और ISRO के लिए भी यह संदेश जाएगा कि लगातार चुनौतियों के बावजूद उसका बड़ा अंतरिक्ष कार्यक्रम तेजी से आगे बढ़ रहा है।
निष्कर्ष
EOS-5 मिशन भारत के लिए सिर्फ एक और सैटेलाइट लॉन्च नहीं है। यह Earth Observation, आपदा प्रबंधन, मौसम निगरानी और रणनीतिक क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम हो सकता है।
4 सितंबर को अगर GSLV F17 सफलतापूर्वक EOS-5 को उसकी निर्धारित कक्षा में स्थापित कर देता है, तो यह ISRO के लिए एक महत्वपूर्ण comeback mission साबित होगा और आने वाले Gaganyaan समेत कई बड़े मिशनों के लिए भी माहौल मजबूत करेगा।

Note: Content and images are for informational use only. For any concerns, contact us at info@rajasthaninews.com.
TSMC Optimistic Amid...
Related Post
Hot Categories
Recent News
Daily Newsletter
Get all the top stories from Blogs to keep track.


_1787582561.jpg)



_1788176771.jpg)
_1788175983.jpg)
_1788175475.jpg)
_1788175127.jpg)