इजरायल दौरे पर प्रधानमंत्री मोदी, केनेस्सेट प्लेनम को संबोधित करने वाले पहले भारतीय पीएम बनेंगे
- bykrish rathore
- 25 February, 2026
भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi इजरायल के आधिकारिक दौरे पर हैं, जहां वह Israel की संसद Knesset के प्लेनम को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बनेंगे। यह ऐतिहासिक क्षण भारत-इजरायल संबंधों में एक नए अध्याय का प्रतीक माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा रणनीतिक, आर्थिक और रक्षा सहयोग को और मजबूत करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच रक्षा, कृषि, जल प्रबंधन, साइबर सुरक्षा और स्टार्ट-अप इकोसिस्टम जैसे क्षेत्रों में सहयोग तेजी से बढ़ा है। भारत और इजरायल के संबंध 1992 में पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित होने के बाद से निरंतर मजबूत होते रहे हैं, लेकिन हाल के वर्षों में इन रिश्तों में अभूतपूर्व गति देखी गई है।
केनेस्सेट प्लेनम को संबोधित करना किसी भी विदेशी नेता के लिए विशेष सम्मान की बात होती है। मोदी का यह संबोधन न केवल द्विपक्षीय संबंधों की मजबूती को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती कूटनीतिक भूमिका को भी रेखांकित करता है। अपने भाषण में प्रधानमंत्री के व्यापार, रक्षा सहयोग, तकनीकी नवाचार और आतंकवाद विरोधी सहयोग जैसे मुद्दों पर जोर देने की संभावना है।
हालांकि, यह दौरा भू-राजनीतिक दृष्टि से भी चर्चा में है। गाजा की स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गहन बहस जारी है। कई वैश्विक शक्तियां क्षेत्र में शांति और स्थिरता की अपील कर रही हैं। ऐसे समय में मोदी की यह यात्रा संतुलित कूटनीति की परीक्षा के रूप में भी देखी जा रही है। भारत पारंपरिक रूप से पश्चिम एशिया में संतुलित नीति अपनाता रहा है, जहां वह इजरायल के साथ मजबूत संबंध बनाए रखते हुए फिलिस्तीन के समर्थन की अपनी ऐतिहासिक स्थिति को भी दोहराता रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा भारत की ‘मल्टी-अलाइनमेंट’ कूटनीति का उदाहरण है, जिसमें देश विभिन्न वैश्विक शक्तियों के साथ अपने हितों के अनुरूप संबंध बनाए रखता है। इजरायल के साथ बढ़ता रक्षा और तकनीकी सहयोग भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और नवाचार क्षमता को मजबूत कर सकता है।
इसके अलावा, दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध भी तेजी से बढ़ रहे हैं। द्विपक्षीय व्यापार में वृद्धि और संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं से आर्थिक सहयोग को नई दिशा मिल सकती है। स्टार्ट-अप और हाई-टेक सेक्टर में साझेदारी से भारत के डिजिटल और तकनीकी विकास को गति मिलने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री मोदी का यह इजरायल दौरा ऐतिहासिक और रणनीतिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है। केनेस्सेट में उनका संबोधन भारत-इजरायल संबंधों को और गहराई देगा, जबकि गाजा मुद्दे को लेकर वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भारत की संतुलित और जिम्मेदार कूटनीति पर भी दुनिया की नजरें टिकी रहेंगी।

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