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राजस्थान में 2 साल में 8,874 लापता महिलाओं का अब तक नहीं मिला सुराग, आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता

राजस्थान में 2 साल में 8,874 लापता महिलाओं का अब तक नहीं मिला सुराग, आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता

राजस्थान में 2 साल में 8,874 लापता महिलाओं का अब तक नहीं मिला सुराग, आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता

जयपुर। राजस्थान में महिलाओं की गुमशुदगी से जुड़े आंकड़ों को लेकर एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें 2024 और 2025 के दौरान दर्ज महिला गुमशुदगी के मामलों में 8,874 महिलाओं के संबंधित साल के अंत तक बरामद नहीं होने का दावा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार 2024 में 3,142 और 2025 में 5,732 महिलाओं का पता नहीं लगाया जा सका था।

रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2024 में राजस्थान में 24,591 महिलाओं के लापता होने के मामले दर्ज किए गए थे, जबकि 2025 में यह संख्या 26,825 बताई गई। इन आंकड़ों के आधार पर दोनों वर्षों में दर्ज महिला गुमशुदगी के मामलों की संख्या 51 हजार से अधिक बैठती है।

हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि लापता दर्ज होना और किसी व्यक्ति का स्थायी रूप से गायब होना एक ही बात नहीं है। कई गुमशुदा लोगों को पुलिस बाद में खोज लेती है। इसलिए 8,874 का आंकड़ा उन महिलाओं से संबंधित है जिनका संबंधित वर्ष के अंत तक पता नहीं चल सका था, न कि यह संख्या उन सभी महिलाओं की है जो हमेशा के लिए लापता हैं।

रिपोर्ट में पुरुषों की गुमशुदगी के आंकड़ों की तुलना भी की गई है। इसमें 2024 में 7,750 और 2025 में 7,641 पुरुषों के लापता होने की बात कही गई है। रिपोर्ट के अनुसार इनमें से बड़ी संख्या में लोगों को बाद में बरामद भी किया गया।

महिलाओं की इतनी बड़ी संख्या में गुमशुदगी कई सवाल खड़े करती है। इनमें घरेलू विवाद, व्यक्तिगत कारण, रोजगार या दूसरे स्थान पर जाना और अन्य परिस्थितियां शामिल हो सकती हैं। इन सभी मामलों को मानव तस्करी से जोड़ना अपने आप में सही निष्कर्ष नहीं होगा। रिपोर्ट में मानव तस्करी की आशंका को लेकर सवाल उठाए गए हैं, लेकिन हर गुमशुदगी के पीछे तस्करी होने की पुष्टि इन आंकड़ों से अकेले नहीं होती।

राजस्थान पुलिस का आधिकारिक CCTNS पोर्टल भी राज्य में दर्ज Missing Persons मामलों का डेटा उपलब्ध कराता है, जिससे गुमशुदगी से जुड़े मामलों की निगरानी की जाती है।

बड़ा सवाल क्या है?

8,874 महिलाओं के संबंधित वर्षों में अनट्रेस्ड रहने का आंकड़ा निश्चित रूप से गंभीर है। लेकिन इस आंकड़े को समझने के लिए यह देखना जरूरी है कि बाद की अवधि में इनमें से कितनी महिलाएं बरामद हुईं, कितने मामले अभी जांच में हैं और कितने मामलों में अपराध या तस्करी जैसी वजह सामने आई।

यानी फिलहाल उपलब्ध रिपोर्ट के आधार पर सबसे सटीक बात यही है कि 2024-25 में दर्ज महिला गुमशुदगी के मामलों में 8,874 महिलाएं संबंधित वर्ष के अंत तक ट्रेस नहीं हो पाई थीं।


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